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अदालत की सख्ती- पांच साल से उपभोक्ता को क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया पॉलिसी बांड
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कासगंज। उपभोक्ता ने बीमा कराया तो उसे पॉलिसी बांड क्यों नहीं दिया गया। पॉलिसी बांड गलत पते पर भेज दिया गया। यह गलती उपभोक्ता की नहीं बल्कि एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस की है। द्वितीय प्रतिलिपि के लिए उपभोक्ता से शुल्क मांगा गया, उसे पांच साल तक मानसिक रूप से परेशान किया गया। स्थायी लोक अदालत ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से यह पूछे और फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता को नि:शुल्क पॉलिसी बांड की प्रति और क्षतिपूर्ति के रूप 25 हजार रुपये देने के आदेश दिए।
गांव मानपुर नगरिया निवासी राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। इसमें बताया कि वर्ष 2016 में उसने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से पॉलिसी कराई। 25000 रुपये इसकी एवज जमा किए, लेकिन पॉलिसी बांड एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने नहीं दिया। जब पॉलिसी बांड मांगा गया तो देने से पहले तो मना किया, बाद में द्वितीय प्रतिलिपि की एवज में शुल्क मांगा गया। कह दिया कि गलत पते पर पॉलिसी बांड चला गया है। उपभोक्ता ने अपना पक्ष रखा कि गलत पते पर पॉलिसी बांड भेजने की जिम्मेदारी एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस की है। अदालत ने उपभोक्ता के पक्ष को तर्क संगत माना। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, सदस्य बसंत शर्मा, डा. सपना अग्रवाल की पूर्णपीठ ने फैसला सुनाया कि उपभोक्ता को निशुल्क पॉलिसी बांड की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाए और मानसिक एवं आर्थिक क्षति को पूरा कराने के लिए 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति न्यायालय में जमा कराई जाए।
- मामला न्यायालय में आया तो संज्ञान लिया। उपभोक्ता को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ा। इसलिए क्षतिपूर्ति दिलाई गई है। अगर और मामले ऐसे आते हैं तो उनमें अदालत निर्णय लेगी।
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बसंत शर्मा, सदस्य, स्थायी लोक अदालत
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गांव मानपुर नगरिया निवासी राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। इसमें बताया कि वर्ष 2016 में उसने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से पॉलिसी कराई। 25000 रुपये इसकी एवज जमा किए, लेकिन पॉलिसी बांड एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने नहीं दिया। जब पॉलिसी बांड मांगा गया तो देने से पहले तो मना किया, बाद में द्वितीय प्रतिलिपि की एवज में शुल्क मांगा गया। कह दिया कि गलत पते पर पॉलिसी बांड चला गया है। उपभोक्ता ने अपना पक्ष रखा कि गलत पते पर पॉलिसी बांड भेजने की जिम्मेदारी एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस की है। अदालत ने उपभोक्ता के पक्ष को तर्क संगत माना। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, सदस्य बसंत शर्मा, डा. सपना अग्रवाल की पूर्णपीठ ने फैसला सुनाया कि उपभोक्ता को निशुल्क पॉलिसी बांड की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाए और मानसिक एवं आर्थिक क्षति को पूरा कराने के लिए 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति न्यायालय में जमा कराई जाए।
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- मामला न्यायालय में आया तो संज्ञान लिया। उपभोक्ता को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ा। इसलिए क्षतिपूर्ति दिलाई गई है। अगर और मामले ऐसे आते हैं तो उनमें अदालत निर्णय लेगी।
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बसंत शर्मा, सदस्य, स्थायी लोक अदालत