कुत्ते का क्यों किया गया पोस्टमार्टम, क्या खोलेगा राज, जानिए पूरा मामला
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11 जून 2018 को कुत्ते के ऊपर सड़क बनाने के मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस को उलझा दिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आरोपियों पर दोष सिद्ध किया जा सकता है, पर सामने आई रिपोर्ट में कई तरह के पेंच मिले हैं। पुलिस अब इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट की ही दोबारा जांच करा रही है।
दरअसल सदर में फूल सैयद चौराहे पर दो महीने पहले कुत्ते के ऊपर सड़क बना दी गई थी। कुत्ते के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुत्ते की मौत पोस्टमार्टम से सात दिन पहले बताई गई है। सवाल यह है कि सात दिन में कुत्ते का शव सड़-गल जाता है। जबकि सड़क के नीचे दबे कुत्ते की बाडी ठीकठाक है। इसी कारण से पुलिस अफसरों के गले के नीचे पोस्टमार्टम रिपोर्ट उतर नहीं रही है।
अब आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं अन्य कुत्ते के शव का पोस्टमार्टम तो नहीं कर दिया गया। इन सभी आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सीनियर वेटनरी डाक्टरों को भेजी गई है। उनकी फाइनल रिपोर्ट के बाद पुलिस अपनी जांच आगे बढ़ाएगी।
मालूम हो कि सदर में फूल सैयद चौराहे पर सड़क निर्माण का काम चल रहा था। 11 जून को सड़क निर्माण के ठेकेदार ने कुत्ते के ऊपर ही सड़क बना दी। ये मामला गरम हुआ, तो पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम और कुत्ते की जान लेने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया।
इस मामले में सड़क निर्माण से जुड़े सुपरवाइजर रविंद्र सिंह, रोड रोलर चालक कुलदीप और दो मजदूर सतीश और वीरेंद्र को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें थाने से जमानत भी दे दी गई थी। उन पर दोष साबित करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट बहुत अहम होगी। रिपोर्ट में ये साबित हो गया कि कुत्ते की मौत सड़क निर्माण सामाग्री में दबने से हुई, तो सभी आरोपियों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
पुलिस ने दो धाराएं 428 और 429 लगाई हैं। 428 में मुजरिम को दो साल तक की सजा का प्रावधान है। 429 के तहत किसी भी मूल्य के पशु को घायल, विकलांग करने या उसकी जान लेने पर पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। इस केस में पशुओं के प्रति क्रूरता के निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 लगाई गई है।
इसमें दोष सिद्ध होने पर 10 से 50 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस का कहना है कि जिस कुत्ते को मारा गया, उसका मूल्य तय नहीं है, इसके तय हो जाने पर एक धारा हटा दी जाएगी। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम में 2017 में योगी सरकार ने संशोधन किया है। इस पर पुलिस विधि विशेषज्ञ की राय ले रही है।