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अवैध निर्माण नहीं किया तो तोड़ने पर परेशान क्यों : एनजीटी
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 06 Aug 2016 01:33 AM IST
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एनजीटी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अब बिल्डर्स यमुना डूब क्षेत्र में खसरा संख्या 276 पर विवादित संरचनाओं और निर्माण कार्य से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान बिल्डर्स की ओर से पेश अधिवक्ता एक-दूसरे पर आरोप मढ़ते रहे। वहीं आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने अवैध निर्माण के लिए पुष्पांजलि हाइट्स और मंगलम एस्टेट एक्सटेंशन का नाम लिया है। हालांकि सबने यह अवैध निर्माण उनका होने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि जब अवैध निर्माण उनका नहीं तो इसे तोड़ने में परेशान क्यों हैं। इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति के सदस्य व याची डीके जोशी के मामले पर सुनवाई कर रही है। प्रधान पीठ ने मौखिक तौर पर एडीए के अधिकारी को निरीक्षण करने और अगली सुनवाई में स्पष्ट तस्वीर पेश करने को कहा है। बिल्डरों के वकीलों ने अवैध निर्माण में शामिल न होने की बात कही। पीठ ने कहा कि याची की ओर से अवैध निर्माण को लेकर पेश की गईं चार तस्वीरें साफ बताती हैं कि डूब क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि नदी के भीतर तक निर्माण कार्य का दायरा बढ़ाया गया है।
सुनवाई के दौरान कई बार भ्रम पैदा हुआ। पिछली सुनवाई में अवैध निर्माण को मंगलम एस्टेट का बताया था। जबकि शुक्रवार को मंगलम एस्टेट के अधिवक्ता ने कहा कि ये उनका निर्माण कार्य नहीं कल्याणी का है। कल्याणी के अधिवक्ता ने कहा कि यह निर्माण कार्य उनका नहीं बल्कि पुष्पांजलि हाइट्स का है। जबकि पुष्पांजलि हाइट्स के अधिवक्ता ने भी इसे अपना बताने इनकार कर दिया। इन दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि यदि यह निर्माण किसी का नहीं है तो प्राधिकरण इसे तुरंत नष्ट करे।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति के सदस्य व याची डीके जोशी के मामले पर सुनवाई कर रही है। प्रधान पीठ ने मौखिक तौर पर एडीए के अधिकारी को निरीक्षण करने और अगली सुनवाई में स्पष्ट तस्वीर पेश करने को कहा है। बिल्डरों के वकीलों ने अवैध निर्माण में शामिल न होने की बात कही। पीठ ने कहा कि याची की ओर से अवैध निर्माण को लेकर पेश की गईं चार तस्वीरें साफ बताती हैं कि डूब क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि नदी के भीतर तक निर्माण कार्य का दायरा बढ़ाया गया है।
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सुनवाई के दौरान कई बार भ्रम पैदा हुआ। पिछली सुनवाई में अवैध निर्माण को मंगलम एस्टेट का बताया था। जबकि शुक्रवार को मंगलम एस्टेट के अधिवक्ता ने कहा कि ये उनका निर्माण कार्य नहीं कल्याणी का है। कल्याणी के अधिवक्ता ने कहा कि यह निर्माण कार्य उनका नहीं बल्कि पुष्पांजलि हाइट्स का है। जबकि पुष्पांजलि हाइट्स के अधिवक्ता ने भी इसे अपना बताने इनकार कर दिया। इन दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि यदि यह निर्माण किसी का नहीं है तो प्राधिकरण इसे तुरंत नष्ट करे।
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