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15 साल की उम्र में आईआईटियन बनने का राज, जानिए जीनियस के बारे में सब कुछ
टीम डिजिटल फिरोजाबाद
Updated Tue, 04 Jul 2017 08:11 PM IST
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अभय अग्रवाल पिता मुकेश अग्रवाल और मां एकता के साथ
- फोटो : अमर उजाला
महज 15 साल की उम्र में जेईई एडवांस की परीक्षा पास कर भारत के सर्वोच्च शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश लेने वाले सुहागनगरी के हीरे की सफलता की कहानी भी अपने आप में खास है। जिस उम्र में बच्चे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा को लेकर आशंकित रहते हैं, उस उम्र में फिरोजाबाद के अभय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में प्रवेश पा लिया है। अमर उजाला से खास बातचीत में अभय और उनके पिता ने इस सफलता की हर बात साझा की।
अभय के पिता मुकेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने बेटे को प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही दी। मां एकता अग्रवाल ने उन्हें बेसिक स्तर की सभी जानकारी स्कूल में प्रवेश से पहले ही सिखा दी। अभय की कैचिंग पावर अच्छी होने के कारण वे जल्दी इसे सीख भी गए। यही कारण रहा कि जब उन्हें प्रो. राजेंद्र सिंह इंटर कॉलेज में प्रवेश के लिए ले गए तो सीधे पहली कक्षा में प्रवेश कर मिल गया।
9 नवंबर 2001 को जन्मे अभय ने वर्ष 2015 में प्रो. राजेंद्र सिंह इंटर कॉलेज से 85.63 प्रतिशत अंकों के साथ यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। इसके बाद इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग क्लासेज ज्वाइन की। साथ ही आगरा के वनस्थली स्कूल से 2017 में 87.2 प्रतिशत अंकों के साथ सीबीएसई 12वीं की परीक्षा पास की।
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उधर, जेईई एडवांस में भी चयन हो गया। इसके बाद काउंसलिंग में आईआईटी बीएचयू में प्रवेश मिलने के बाद वे महज 15 साल की उम्र में यह सफलता पाने वाले होनहार बन गए। बता दें कि अभय के पिता मुकेश अग्रवाल नगर निगम में पंप अटेंडेंट हैं और एकता अग्रवाल गृहिणी हैं।
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अभय के पिता मुकेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने बेटे को प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही दी। मां एकता अग्रवाल ने उन्हें बेसिक स्तर की सभी जानकारी स्कूल में प्रवेश से पहले ही सिखा दी। अभय की कैचिंग पावर अच्छी होने के कारण वे जल्दी इसे सीख भी गए। यही कारण रहा कि जब उन्हें प्रो. राजेंद्र सिंह इंटर कॉलेज में प्रवेश के लिए ले गए तो सीधे पहली कक्षा में प्रवेश कर मिल गया।
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9 नवंबर 2001 को जन्मे अभय ने वर्ष 2015 में प्रो. राजेंद्र सिंह इंटर कॉलेज से 85.63 प्रतिशत अंकों के साथ यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। इसके बाद इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग क्लासेज ज्वाइन की। साथ ही आगरा के वनस्थली स्कूल से 2017 में 87.2 प्रतिशत अंकों के साथ सीबीएसई 12वीं की परीक्षा पास की।
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उधर, जेईई एडवांस में भी चयन हो गया। इसके बाद काउंसलिंग में आईआईटी बीएचयू में प्रवेश मिलने के बाद वे महज 15 साल की उम्र में यह सफलता पाने वाले होनहार बन गए। बता दें कि अभय के पिता मुकेश अग्रवाल नगर निगम में पंप अटेंडेंट हैं और एकता अग्रवाल गृहिणी हैं।
बचपन में ही तय कर लिया था लक्ष्य...
अभय अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डा. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानने वाले अभय बचपन से ही रोबोटिक्स इंजीनियर बनना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने आईआईटी में प्रवेश का लक्ष्य तय कर लिया था। अभय ने बताया कि उनकी पढ़ाई में उनके बड़े भाई देवांशु अग्रवाल काफी मदद करते हैं। देवांशु इस समय जीएलए यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे हैं। उन्हीं की गाइडेंस से वे जेईई की परीक्षा में सफल हुए।
कोचिंग के बाद 7 से आठ घंटे पढ़ाई...
फिरोजाबाद के सुहागनगर में अभय का घर
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला से बातचीत में अभय अग्रवाल ने बताया कि यूं तो उनके पढ़ने का कोई निश्चित शेड्यूल नहीं है। जब तक उनका मन करता है वे पढ़ाई में जुटे रहते हैं। मन नहीं करता तो सो जाते हैं और दोबारा जागने पर पढ़ाई शुरू करते हैं। हालांकि जेईई एडवांस की परीक्षा के लिए उन्होंने कोचिंग के बाद रोजाना करीब 7-8 घंटे पढ़ाई की। मेंस के लिए वे 4-5 घंटे रोजाना पढ़ाई करते थे।
परीक्षा से पहले वे सुबह छह बजे से 12 बजे तक कोचिंग जाते थे। इसके बाद घर आकर एक घंटा खाना-पीना और रेस्ट के बाद दोबारा कोचिंग के लिए निकल जाते थे। शाम को छह बजे कोचिंग से लौटने के बाद वे दो घंटे का रेस्ट लेते और फिर देर शाम करीब आठ बजे से पढ़ाई शुरू करते थे। ऐसे में अगर वे रम गए तो रात में तीन बजे तक भी पढ़ाई जारी रहती थी। उनका पसंदीदा विषय गणित है।
परीक्षा से पहले वे सुबह छह बजे से 12 बजे तक कोचिंग जाते थे। इसके बाद घर आकर एक घंटा खाना-पीना और रेस्ट के बाद दोबारा कोचिंग के लिए निकल जाते थे। शाम को छह बजे कोचिंग से लौटने के बाद वे दो घंटे का रेस्ट लेते और फिर देर शाम करीब आठ बजे से पढ़ाई शुरू करते थे। ऐसे में अगर वे रम गए तो रात में तीन बजे तक भी पढ़ाई जारी रहती थी। उनका पसंदीदा विषय गणित है।