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जहां हाथी चला धीमी चाल, उसी सीट पर किया कमाल

Tue, 10 Jan 2017 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
अमर उजाला ब्यूरो आगरा Updated Tue, 10 Jan 2017 12:08 AM IST
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Where elephants running in slow motion, the same seat the amazing
1989 में बसपा के पहले चुनाव में फतेहाबाद सीट पर सबसे कम वोट मिले, 2012 में सबसे ज्यादा वोट वहीं पाए
1989 में पहली बार चुनावी मैदान में उतरी बसपा का हाथी जिले में धीमी चाल से चला लेकिन बाद हाथी की चाल लगातार तेज होती गई। हर चुनाव में बसपा के वोटों में बढ़ोत्तरी हुई। पहली बार जिले में बसपा के विधायक 1996 में जीते और उसके बाद बसपा का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। रोचक पहलू ये है कि जिस विधानसभा सीट पर 1989 में पहली बार उतरी बसपा को सबसे कम वोट मिले, उसी फतेहाबाद सीट पर पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा वोट हासिल हुए। फतेहाबाद सीट भी बसपा के खाते में पहली बार ही पहुंची। हालांकि चुनाव से ऐन पहले बसपा विधायक पार्टी छोड़ गए।
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1984 में गठन के बाद बसपा ने 1989 में पहली बार चुनावी मैदान में योद्धा उतारे। तब प्रदेश में बसपा 10.72 फीसदी वोट पाने में कामयाब रही लेकिन आगरा में केवल बाह सीट पर ही प्रत्याशी पांच अंकों में पहुंचकर 10.9 फीसदी वोट पा सका। बाकी सीटों पर बसपा का प्रदर्शन कमजोर रहा। बसपा की फतेहाबाद सीट की प्रत्याशी अनार देवी महज 344 वोट ही पा सकीं थीं। शहर की तीनों सीटों पूर्वी, पश्चिमी, छावनी पर बसपा को क्रमश: 2170, 1774 और 3840 वोट मिले। 1991 के चुनाव में बसपा ने आठ सीटों पर प्रत्याशी  उतारे। सभी प्रत्याशियों में फतेहाबाद पर ही पार्टी को सबसे ज्यादा 7125 वोट मिल पाए। इस चुनाव में पार्टी पांचवें और छठवें नंबर पर ही रही। 1993 में गठबंधन में केवल दो सीटों पर लड़ी और दोनों में वोट प्रतिशत बढ़ा। बसपा ने 1996 में दमदार प्रदर्शन किया और पहली बार दो विधायक जीते। उसके बाद 2002 में दयालबाग सीट बरकरार रखी तो छावनी पर पहले मुस्लिम विधायक चौ. बशीर ने शहर में बसपा का खाता खोला। 2007 और 2012 में बसपा ने जिले की दो तिहाई यानी नौ में से छह सीटें जीती। 2012 में जहां बसपा को प्रदेश में 25.9 फीसदी वोट मिले, वहीं आगरा में 33 से 39 फीसदी तक वोट मिले।
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1990 में महामंत्री और 1993 में जिलाध्यक्ष बने सुनील कुमार चित्तौड़ अब जोनल कोआर्डिनेटर और एमएलसी हैं। चित्तौड़ कहते हैं कि हर बूथ तक संगठन खड़ा करने और मिशन की भावना से कार्यकर्ताआें ने जो काम किया, उसी ने बसपा के लिए आगरा को अभेद दुर्ग बनाया है।
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बसपा का पहला चुनावी मुकाबला
क्षेत्र    प्रत्याशी    वोट    मत प्रतिशत
फतेहाबाद    अनार देवी    344    0.47 %
खेरागढ़    फूल सिंह कुशवाह    551    0.61 %
फ. सीकरी    डालचंद    858    1.03 %
आगरा वेस्ट    बैजनाथ    1774    3.15 %
आगरा ईस्ट    कल्लू अंसारी    2170    3.06 %
दयालबाग    बनवारी लाल बघेल    3026    3.58 %
छावनी    रामचरन भाष्कर    3840    5.66 %
एत्मादपुर    कान सिंह    5564    7.21 %
बाह    पदम सिंह    10,645    10.92 %

1996 में दो हाथी सवार पहुंचे लखनऊ
1993 में सपा से गठबंधन में बसपा ने आगरा में फतेहाबाद और पश्चिमी विधानसभा क्षेत्रों पर प्रत्याशी उतारे, बाकी पर सपा प्रत्याशी मैदान में थे। हालांकि सपा तब केवल एक सीट पर ही जीती। बसपा के पश्चिमी सीट प्रत्याशी वीरेंद्र सोनी 27,850 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं फतेहाबाद में 3683 वोट मिल पाए। 1996 में बसपा जिले में केवल पांच सीटों पर चुनाव लड़ी। एत्मादपुर से जीपी पुष्कर 49,188 और दयालबाग में किशन लाल बघेल 50077 वोट पाकर बसपा से विधायक बने। बसपा तब छावनी और पश्चिमी पर दूसरे नंबर पर रही। फतेहाबाद में पार्टी प्रत्याशी अशोक दीक्षित 34,946 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे।
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