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52 सरकारी केंद्रों में से 29 पर नहीं हो सकी बोहनी
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कासगंज अमर उजाला लाइव की खबर से संबधित फोटो गंजडुंडवारा में खाली पडा क्षेत्रीय सहकारी गेंहू खरी?
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। जिले के क्रय केंद्र पर गेहूं की खरीद की स्थिति की शुक्रवार को पड़ताल की गई। इस दौरान जिन केंद्रों पर जाना हुआ वहां किसी भी केंद्र पर गेहूं की आवक नहीं थी। जिले में 52 सरकारी क्रय केंद्र संचालित हैं। जिनमें 29 क्रय केंद्रों पर अभी तक बिल्कुल खरीद नहीं हो सकी है। केवल 23 क्रय केंद्रों पर 1010 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। यह खरीद भी तब हुई है जब एमएसपी से कम मूल्य पर मंडी में गेहूं बिक रहा था। बताते चलें कि 53 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का है लक्ष्य इस बार रखा गया है।
इसका कारण नजर आया कि सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों को चेक के माध्यम से भुगतान मिलता है और काफी समय किसान का खर्च होता है वहीं दूसरा प्रमुख कारण सरकारी केंद्र पर गेहूं की खरीद का मूल्य 2015 रुपये का है जबकि मंडी में गेहूं 2050 व अधिक कीमत पर बिक रहा है। वहीं, गल्ला मंडी में नकद भुगतान किसानों को मिल जाता है और समय नहीं लगता। ऐसी स्थिति में किसान अपना गेहूं क्रय केंद्रों पर लेकर नहीं पहुंच रहे।
क्रय केंद्र क्षेत्रीय सहकारी समिति मोहल्ला घासी- दोपहर 1 बजे
क्षेत्रीय सहकारी समिति मोहल्ला घासी गंजडुंडवारा का केंद्र खुला मिला, लेकिन यह केंद्र पूरी तरह सन्नाटे में था। केंद्र के प्रभारी सुधीर बघेल मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि केवल अभी तक 20 क्विंटल गेहूं की खरीद हो सकी है। किसान सरकारी भाव कम होने से गेहूं लेकर नहीं पहुंच रहे।
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एरिया मार्केटिंग विभाग क्रय केंद्र- दोपहर 1:30 बजे
इस क्रय केंद्र पर भी कोई किसान मौजूद नहीं था। इस केंद्र पर भी गेहूं खरीद काफी कम हुई है। किसान गेहूं लेकर नहीं पहुंच रहे। इससे गेहूं की खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा होगा समझ नहीं आ रहा। मार्केटिंग इंस्पेक्टर मदन लाल ने बताया कि गुड फ्राइडे की छुट्टी भी है।
पीसीएफ क्रय केंद्र गल्ला मंडी- दोपहर 2:30 बजे
गल्ला मंडी के पीसीएफ क्रय केंद्र पर भी सन्नाटे का आलम नजर आया। गल्ला मंडी के इस क्रय केंद्र पर कोई किसान मौजूद नहीं था। कुछ श्रमिक बैठे हुए थे। मौके पर श्रमिकों ने बताया कि गल्ला मंडी में ऊंची कीमत पर गेहूं बिक रहा है इसलिए किसान गेहूं लेकर नहीं आ रहे।
क्या बोले किसान-
- सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने पर काफी दिक्कत होती है। भुगतान में देरी होती है। इस समय मंडी में अच्छा भाव मिल रहा है और भुगतान भी तत्काल होता है। पिछली बार सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने में काफी दिक्कतें हुईं। - ओमकार सिंह, चंडौस।
- गेहूं का भाव मंडी में सही मिल रहा है। मंडी का भाव सरकारी मूल्य से अधिक है। कोई परेशानी भी नहीं होती। पिछली बार सरकारी केंद्र पर हमारा गेहूं नहीं लिया गया। लौटकर मंडी में ही बेचना पड़ा। - रामपाल, मुनीमनगर, अमांपुर।
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इसका कारण नजर आया कि सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों को चेक के माध्यम से भुगतान मिलता है और काफी समय किसान का खर्च होता है वहीं दूसरा प्रमुख कारण सरकारी केंद्र पर गेहूं की खरीद का मूल्य 2015 रुपये का है जबकि मंडी में गेहूं 2050 व अधिक कीमत पर बिक रहा है। वहीं, गल्ला मंडी में नकद भुगतान किसानों को मिल जाता है और समय नहीं लगता। ऐसी स्थिति में किसान अपना गेहूं क्रय केंद्रों पर लेकर नहीं पहुंच रहे।
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क्रय केंद्र क्षेत्रीय सहकारी समिति मोहल्ला घासी- दोपहर 1 बजे
क्षेत्रीय सहकारी समिति मोहल्ला घासी गंजडुंडवारा का केंद्र खुला मिला, लेकिन यह केंद्र पूरी तरह सन्नाटे में था। केंद्र के प्रभारी सुधीर बघेल मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि केवल अभी तक 20 क्विंटल गेहूं की खरीद हो सकी है। किसान सरकारी भाव कम होने से गेहूं लेकर नहीं पहुंच रहे।
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एरिया मार्केटिंग विभाग क्रय केंद्र- दोपहर 1:30 बजे
इस क्रय केंद्र पर भी कोई किसान मौजूद नहीं था। इस केंद्र पर भी गेहूं खरीद काफी कम हुई है। किसान गेहूं लेकर नहीं पहुंच रहे। इससे गेहूं की खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा होगा समझ नहीं आ रहा। मार्केटिंग इंस्पेक्टर मदन लाल ने बताया कि गुड फ्राइडे की छुट्टी भी है।
पीसीएफ क्रय केंद्र गल्ला मंडी- दोपहर 2:30 बजे
गल्ला मंडी के पीसीएफ क्रय केंद्र पर भी सन्नाटे का आलम नजर आया। गल्ला मंडी के इस क्रय केंद्र पर कोई किसान मौजूद नहीं था। कुछ श्रमिक बैठे हुए थे। मौके पर श्रमिकों ने बताया कि गल्ला मंडी में ऊंची कीमत पर गेहूं बिक रहा है इसलिए किसान गेहूं लेकर नहीं आ रहे।
क्या बोले किसान-
- सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने पर काफी दिक्कत होती है। भुगतान में देरी होती है। इस समय मंडी में अच्छा भाव मिल रहा है और भुगतान भी तत्काल होता है। पिछली बार सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने में काफी दिक्कतें हुईं। - ओमकार सिंह, चंडौस।
- गेहूं का भाव मंडी में सही मिल रहा है। मंडी का भाव सरकारी मूल्य से अधिक है। कोई परेशानी भी नहीं होती। पिछली बार सरकारी केंद्र पर हमारा गेहूं नहीं लिया गया। लौटकर मंडी में ही बेचना पड़ा। - रामपाल, मुनीमनगर, अमांपुर।