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टोकन न मिलने से गेहूं नहीं बेच पा रहे किसान
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कोसीकलां (मथुरा)। किसानों को खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने में पसीने आ रहे हैं। यहां पर किसानों को ऑनलाइन टोकन जारी कराने के लिए कर्मचारियों व अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी गेहूं बेचने के लिए टोकन जारी नहीं हो पा रहे हैं। सोशल डिस्टेंस पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन किसान एक स्थान से दूसरे स्थान पर भाग दौड़ कर रहे हैं, इसके बाद भी टोकन जारी नहीं हो रहे हैं। ऐसे में किसान परेशान होकर माटी मोल गेहूं बेचना बेहतर समझ रहा है।
शासन द्वारा किसानों को गेहूं बिक्री के लिए सुलभ व्यवस्था की गई है। इसके तहत छाता क्षेत्र में 19 गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं। जहां पर अभी तक 4640 किसानों ने पंजीकरण कराया हैं। गेहूं 1925 प्रति क्विंटल की दर से बेचने की सुविधा दी गई है। अभी तक करीब पांच हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है, लेकिन अफसरों की उदासीनता के कारण गेहूं खरीद केंद्र पर गेहूं बेच पाना किसान के लिए लोहे के चना चबाने जैसा साबित हो रहा है। खरीद केंद्र पर किसानों को गेहूं बिक्री के लिए पहले वेबसाइट पर आवेदन ऑनलाइन करने के बाद टोकन नही मिल पा रहा हैं और न ही गेहूं तौलने की तिथि मिल पा रही है। इससे किसान की मुसीबत बढ़ गई है।
यह प्रक्रिया किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। शासन किसानों को उपज बेचना सरल करने की बात कह रहा है। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। इससे किसानों को क्रय केंद्र पर गेहूं बेचना मुश्किल साबित हो रहा है। मंडी सचिव उमेश चौधरी का कहना था कि ऑनलाइन साइड पर लोड बढ़ जाने से किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहे हैं। टोकन का मैसेज देरी से पहुंच रहा है।
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शासन द्वारा किसानों को गेहूं बिक्री के लिए सुलभ व्यवस्था की गई है। इसके तहत छाता क्षेत्र में 19 गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं। जहां पर अभी तक 4640 किसानों ने पंजीकरण कराया हैं। गेहूं 1925 प्रति क्विंटल की दर से बेचने की सुविधा दी गई है। अभी तक करीब पांच हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है, लेकिन अफसरों की उदासीनता के कारण गेहूं खरीद केंद्र पर गेहूं बेच पाना किसान के लिए लोहे के चना चबाने जैसा साबित हो रहा है। खरीद केंद्र पर किसानों को गेहूं बिक्री के लिए पहले वेबसाइट पर आवेदन ऑनलाइन करने के बाद टोकन नही मिल पा रहा हैं और न ही गेहूं तौलने की तिथि मिल पा रही है। इससे किसान की मुसीबत बढ़ गई है।
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यह प्रक्रिया किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। शासन किसानों को उपज बेचना सरल करने की बात कह रहा है। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। इससे किसानों को क्रय केंद्र पर गेहूं बेचना मुश्किल साबित हो रहा है। मंडी सचिव उमेश चौधरी का कहना था कि ऑनलाइन साइड पर लोड बढ़ जाने से किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहे हैं। टोकन का मैसेज देरी से पहुंच रहा है।
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