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फेसबुक-व्हाट्स एप की लत है तो टापर बनना मुश्किल
अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 22 May 2016 01:56 AM IST
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फेसबुक
- फोटो : getty
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आगरा के टॉपर फेसबुक और व्हाट्स एप से हैं दूर
पढ़ाई में सोशल मीडिया को बाधक मानते हैं दोनों
यह खबर उन स्टूडेंटों के लिए खास है जो सोशल मीडिया की दीवाने हैं और फ्रेंड लिस्ट बढ़ाने की होड़ में रहते हैं। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में जिले की टॉपर और इलाहाबाद परिक्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहीं हर्षिता शर्मा सोशल मीडिया से जुड़ीं ही नहीं। यही हाल 97.4 फीसदी अंक के साथ जिले में दूसरे स्थान पर रहे प्रशांत बघेल का है। ये दोनों सोशल मीडिया को पढ़ाई में बाधक मानते हैं।
हर्षिता शर्मा की दोस्तों ने कई बार उन पर फेसबुक पर जुड़ने का दबाव बनाया। हर किसी के लिए हर्षिता एक जवाब होता, ‘नोटबुक से फुर्सत मिले तो फेसबुक से जुडे़ं।’ उनका मानना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए जरूरी एकाग्रता को नहीं आने देता। मोबाइल की हर बीप कान खड़े हो जाते हैं। झटपट उसको देखने की चेष्टा होती है। हर्षिता ने जो महत्वपूर्ण बात कही वह यह है कि सोशल मीडिया का सबसे नकारात्मक पहलू यह है कि इसे इस्तेमाल करने वालों के लिए दूर के लोग तो पास रहते हैं लेकिन पास बैठे लोग दूर हो जाते हैं। वह कम से कम पढ़ाई जारी रहने तक सोशल मीडिया से वह दूर ही रहना चाहेंगी।
सोशल मीडिया के बारे में प्रशांत का अनुभव भी अच्छा नहीं है। वह देखते हैं कि उनके तमाम दोस्त हमेशा फेसबुक, व्हाट्स एप, हाइक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि पर ही लगे रहते हैं। इसे वह पढ़ाई में बाधा मानते हैं। प्रशांत साधारण फोन रखते हैं। पढ़ाई के लिए ही नेट का इस्तेमाल अन्य माध्यम से करते हैं।
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दूर ही रहें तो अच्छा
सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बचे रहना विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होता है। सोशल मीडिया पर चैटिंग करने वाले विद्यार्थी पढ़ाई में एकाग्रता नहीं बना पाते। इसके कई नकारात्मक प्रभाव हैं।
रामसेवक, मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र
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पढ़ाई में सोशल मीडिया को बाधक मानते हैं दोनों
यह खबर उन स्टूडेंटों के लिए खास है जो सोशल मीडिया की दीवाने हैं और फ्रेंड लिस्ट बढ़ाने की होड़ में रहते हैं। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में जिले की टॉपर और इलाहाबाद परिक्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहीं हर्षिता शर्मा सोशल मीडिया से जुड़ीं ही नहीं। यही हाल 97.4 फीसदी अंक के साथ जिले में दूसरे स्थान पर रहे प्रशांत बघेल का है। ये दोनों सोशल मीडिया को पढ़ाई में बाधक मानते हैं।
हर्षिता शर्मा की दोस्तों ने कई बार उन पर फेसबुक पर जुड़ने का दबाव बनाया। हर किसी के लिए हर्षिता एक जवाब होता, ‘नोटबुक से फुर्सत मिले तो फेसबुक से जुडे़ं।’ उनका मानना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए जरूरी एकाग्रता को नहीं आने देता। मोबाइल की हर बीप कान खड़े हो जाते हैं। झटपट उसको देखने की चेष्टा होती है। हर्षिता ने जो महत्वपूर्ण बात कही वह यह है कि सोशल मीडिया का सबसे नकारात्मक पहलू यह है कि इसे इस्तेमाल करने वालों के लिए दूर के लोग तो पास रहते हैं लेकिन पास बैठे लोग दूर हो जाते हैं। वह कम से कम पढ़ाई जारी रहने तक सोशल मीडिया से वह दूर ही रहना चाहेंगी।
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सोशल मीडिया के बारे में प्रशांत का अनुभव भी अच्छा नहीं है। वह देखते हैं कि उनके तमाम दोस्त हमेशा फेसबुक, व्हाट्स एप, हाइक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि पर ही लगे रहते हैं। इसे वह पढ़ाई में बाधा मानते हैं। प्रशांत साधारण फोन रखते हैं। पढ़ाई के लिए ही नेट का इस्तेमाल अन्य माध्यम से करते हैं।
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दूर ही रहें तो अच्छा
सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बचे रहना विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होता है। सोशल मीडिया पर चैटिंग करने वाले विद्यार्थी पढ़ाई में एकाग्रता नहीं बना पाते। इसके कई नकारात्मक प्रभाव हैं।
रामसेवक, मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र