{"_id":"5ef092ca8ebc3e42e6731a97","slug":"wether-disturbance-mainpuri-news-agr447179966","type":"story","status":"publish","title_hn":"तापमान अधिक होने से धान की फसल पर मंडरा रहा खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तापमान अधिक होने से धान की फसल पर मंडरा रहा खतरा
विज्ञापन
22एमएनपी-01-खेत में सूख रही धान की नर्सरी
- फोटो : MAINPURI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे न केवल लोग परेशान हैं, वहीं फसलों के लिए भी यह ठीक नहीं है। किसानों की चिंता बढ़ गई है। अगर जल्द ही तापमान में कमी न आई तो धान का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी।
जिले में किसान कुल कृषि योग्य भूमि के सापेक्ष लगभग 75 प्रतिशत भाग पर धान की ही रोपाई करते हैं। इस बार भी किसानों ने धान की नर्सरी डाल दी है, लेकिन मौसम को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई। तापमान में कोई कमी न आने से धान की नर्सरी की प्रगति रुक गई है। लगातार तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। ऐसे में धान की नर्सरी सूख भी रही है। इसकी सिंचाई के लिए भी बारिश न होने से किसानों को निजी संसाधनों पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
25 से 30 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त तापमान
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान सबसे उपयुक्त होता है। इसी तापमान में नर्सरी का विकास भी तेजी के साथ होता है।
विज्ञापन
इन बातों का रखें ध्यान
-नर्सरी को सूखने न दें
-दिन में नर्सरी की सिंचाई न करें
-नर्सरी में पानी भरा न रहने दें
-25 दिन से अधिक नर्सरी खड़ी न रखें।
किसानों की बात
धान की नर्सरी गर्मी अधिक होने के चलते नही बढ़ रही है। इससे नर्सरी तैयार होने में समय लगेगा। जितने अधिक समय की नर्सरी होगी, उतना ही उत्पादन कम होगा।
चरन सिंह।
इस बार मौसम को देखकर धान में नुकसान होने की आशंका बढ़ती जा रही है। बारिश न हुई तो किसानों को धान की फसल में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सुमन कुमार।
पहले जून के पहले सप्ताह से ही बारिश शुरू हो जाती थी। इसके बाद ही नर्सरी की बुवाई होती थी। लेकिन इस बार तो नर्सरी की सिंचाई के लिए भी बारिश नहीं मिल सकी।
जबर सिंह।
तापमान अधिक होने से किसान निजी संसाधनों से नर्सरी की सिंचाई कर रहे हैं। हालांकि इसके बाद मौसम ठंडा रहने पर जो प्रगति होती है वह नहीं हो रही है।
कुलदीप।
विज्ञापन
जिले में किसान कुल कृषि योग्य भूमि के सापेक्ष लगभग 75 प्रतिशत भाग पर धान की ही रोपाई करते हैं। इस बार भी किसानों ने धान की नर्सरी डाल दी है, लेकिन मौसम को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई। तापमान में कोई कमी न आने से धान की नर्सरी की प्रगति रुक गई है। लगातार तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। ऐसे में धान की नर्सरी सूख भी रही है। इसकी सिंचाई के लिए भी बारिश न होने से किसानों को निजी संसाधनों पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
25 से 30 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त तापमान
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान सबसे उपयुक्त होता है। इसी तापमान में नर्सरी का विकास भी तेजी के साथ होता है।
विज्ञापन
इन बातों का रखें ध्यान
-नर्सरी को सूखने न दें
-दिन में नर्सरी की सिंचाई न करें
-नर्सरी में पानी भरा न रहने दें
-25 दिन से अधिक नर्सरी खड़ी न रखें।
किसानों की बात
धान की नर्सरी गर्मी अधिक होने के चलते नही बढ़ रही है। इससे नर्सरी तैयार होने में समय लगेगा। जितने अधिक समय की नर्सरी होगी, उतना ही उत्पादन कम होगा।
चरन सिंह।
इस बार मौसम को देखकर धान में नुकसान होने की आशंका बढ़ती जा रही है। बारिश न हुई तो किसानों को धान की फसल में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सुमन कुमार।
पहले जून के पहले सप्ताह से ही बारिश शुरू हो जाती थी। इसके बाद ही नर्सरी की बुवाई होती थी। लेकिन इस बार तो नर्सरी की सिंचाई के लिए भी बारिश नहीं मिल सकी।
जबर सिंह।
तापमान अधिक होने से किसान निजी संसाधनों से नर्सरी की सिंचाई कर रहे हैं। हालांकि इसके बाद मौसम ठंडा रहने पर जो प्रगति होती है वह नहीं हो रही है।
कुलदीप।