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बारिश से बदला मौसम, सर्द हवाओं ने बढ़ाई गलन
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शहर में रिमझिम बारिश के बीच गुजरते वाहन
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। मंगलवार को हुई रिमझिम बारिश से सर्दी बढ़ गई है। दिन में न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस रहा। बारिश के चलते लोगों को आने-जाने में भी परेशानी हुई। मौसम का बदला मिजाज आलू की फसल के लिए खतरा बना है।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से 28 और 29 दिसंबर को बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया था। सोमवार रात से ही बादल छाए रहने के साथ ही मौसम बदल गया। मंगलवार को सुबह बूंदाबांदी शुरू हो गई। इससे सर्दी और बढ़ गई। दिन में बूंदाबांदी के साथ ही सर्द हवाएं भी गलन बढ़ाती रहीं।
अधिकतम तापमान जहां 21 डिग्री सेल्सियस रहा तो वहीं न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस रहा। पूरे दिन लोगों को गलन और सर्दी से राहत नहीं मिल सकी। सुबह बच्चे भी बूंदाबांदी के बीच ही स्कूल पहुंचे। वहीं वापसी में भी मौसम साफ नहीं हो सका। शाम को भी मौसम अधिक सर्द रहा। मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि बुधवार को भी मौसम ऐसा ही रहेगा। ऐसे में सर्दी और बढ़ सकती है। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडेय ने सर्दी में पशुओं का विशेष ध्यान रखने की लिए कहा है।
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मौसम बदलने के साथ केवल लोगों की ही परेशानी नहीं बढ़ी है बल्कि आलू की फसल पर भी खतरा बढ़ गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ उद्यान वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी बताते हैं कि बारिश से आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से फैलता सकता है। इससे बचाव के लिए किसान आलू की फसल में मैंकोजेब या प्रोपीनेब या क्लोरोथेलोनील युक्त फफूंदनाशक दवा का 2.0-2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। वहीं जिन खेतों में बीमारी आ चुकी है उनमें साईमोक्सेनिल, डाईमेंथोमाफऱ् और मैंकोजेब का तीन किलोग्राम मिश्रिण एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यह छिड़काव दस दिन के अंतराल पर दोहराया जा सकता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से 28 और 29 दिसंबर को बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया था। सोमवार रात से ही बादल छाए रहने के साथ ही मौसम बदल गया। मंगलवार को सुबह बूंदाबांदी शुरू हो गई। इससे सर्दी और बढ़ गई। दिन में बूंदाबांदी के साथ ही सर्द हवाएं भी गलन बढ़ाती रहीं।
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अधिकतम तापमान जहां 21 डिग्री सेल्सियस रहा तो वहीं न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस रहा। पूरे दिन लोगों को गलन और सर्दी से राहत नहीं मिल सकी। सुबह बच्चे भी बूंदाबांदी के बीच ही स्कूल पहुंचे। वहीं वापसी में भी मौसम साफ नहीं हो सका। शाम को भी मौसम अधिक सर्द रहा। मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि बुधवार को भी मौसम ऐसा ही रहेगा। ऐसे में सर्दी और बढ़ सकती है। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडेय ने सर्दी में पशुओं का विशेष ध्यान रखने की लिए कहा है।
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मौसम बदलने के साथ केवल लोगों की ही परेशानी नहीं बढ़ी है बल्कि आलू की फसल पर भी खतरा बढ़ गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ उद्यान वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी बताते हैं कि बारिश से आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से फैलता सकता है। इससे बचाव के लिए किसान आलू की फसल में मैंकोजेब या प्रोपीनेब या क्लोरोथेलोनील युक्त फफूंदनाशक दवा का 2.0-2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। वहीं जिन खेतों में बीमारी आ चुकी है उनमें साईमोक्सेनिल, डाईमेंथोमाफऱ् और मैंकोजेब का तीन किलोग्राम मिश्रिण एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यह छिड़काव दस दिन के अंतराल पर दोहराया जा सकता है।