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कहीं प्यासी है आबादी, कहीं हो रही पानी की बर्बादी

Sun, 23 Jun 2019 11:00 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2019 11:00 PM IST
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water suply
कचहरी रोड स्थित एक केंद्र पर बाइक की धुलाई करता युवक। - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। गली-मोहल्लों में हैंडपंपों पर लगी लाइन अक्सर देखी जाती हैं। आंखों में नींद होने के बाद भी लोग इस उम्मीद में खड़े रहते हैं कि उन्हें कम से कम पीने के लिए पानी मिल जाए। इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि पानी की धड़ल्ले से बर्बादी की जा रही है। चाहे सरकारी कार्यालय हो या निजी फर्म सभी जगह पानी को नालियों में बहाया जा रहा है।
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पानी हमारे लिए बेहद जरूरी है। इस बात से अब शायद ही कोई अंजान हो कि जल का सीमित भंडार है। इसमें से एक बड़ा भाग अब तक हम उपयोग कर चुके हैं, लेकिन ये सब जानने के बाद भी हम जल को खत्म करने में लगे हुए हैं। सबसे अधिक पानी की बर्बादी सार्वजनिक स्थलों और वाहन धुलाई केंद्रों पर हो रही है।
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अगर टोंटी से पानी बह रहा है तो कोई उसे सही कराने की जहमत नहीं उठाता। वहीं वाहनों की धुलाई में भी रोजाना लाखों लीटर पानी यूं ही बहा दिया जाता है। शहर में लगभग एक सैकड़ा वाहन धुलाई केंद्र हैं। इन केंद्रों पर पीने योग्य पानी बर्बाद किया जा रहा है। न तो प्रशासन की इस पर नजर जाती है और न ही लोगों की। लोग तो खुद मजे से अपने वाहनों को धुलवाते हैं। वो इस बात से अनजान हैं कि जिस तरह पानी की बर्बादी की जा रही है, भविष्य में इसके बेहद भयंकर परिणाम सामने आएंगे।
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जल संकट से जूझ रहे हैं कई इलाके
शहर की हिंदपुरम कॉलोनी, आजाद नगर, दरीबा, ककरैया, महमूद नगर, राजीव गांधी नगर, मधाऊ, बृज कॉलोनी समेत अन्य कई इलाके पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इन लोगों को पानी के लिए मारामारी करनी पड़ती है। कोई पीने के लिए पानी खरीदता है तो कोई घंटों हैंडपंप पर लाइन लगाकर एक बाल्टी पानी भरता है।
दृश्य एक: वाहन धुलाई केंद्र, कचहरी रोड।
शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले कचहरी रोड पर कई वाहन धुलाई केंद्र संचालित हैं। यहां दिन भर पानी की बर्बादी की जाती है। हाल ये है कि वाहनों की धुलाई के बाद अगर पिट खाली भी है तो भी पानी बहता रहता है। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है।
दृश्य दो: आपातकालीन विभाग, जिला अस्पताल।
जिला अस्पताल परिसर में आपातकालीन विभाग के बाहर मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए वाटर कूलर लगाया गया है। वाटर कूलर की टोंटी महीनों से खराब पड़ी है। दिन-रात यहां पानी फैलता रहता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन को इसकी कोई परवाह नहीं है।

दृश्य तीन: विकास भवन
विकास भवन परिसर में लोगों की प्यास बुझाने के लिए जगह-जगह टोंटी लगवाई गई थीं। अब ये टोंटी खराब पड़ी हुई हैं। दिनभर इनसे पानी बहता रहता है। यहां जिले के सभी आला अधिकारियों का आना-जाना रहता है, लेकिन पानी की बर्बादी पर किसी की नजर नहीं पड़ी।
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