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...तो दुनिया यहां इतनी आई न होती
...तो दुनिया यहां इतनी आई न होती
Updated Sat, 25 Mar 2017 01:00 AM IST
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...तो दुनिया यहां इतनी आई न होती
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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न रात थम रही थी, न कृष्ण की भक्ति का सिलसिला। मंद हवाओं के बीच विनोद अग्रवाल के भजनों की ऐसी बयार बही कि कोई सुधबुध खोकर नाच रहा था तो कोई झूम रहा था। तो कोई आंखें मूंद कर कान्हा की प्रतिबिंब का अहसास कर रहा था। क्या बच्चे और क्या बूढ़े, सब पर कृष्ण की भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा कि रात का पहला पहर कब गुजर गया पता ही नहीं चला। धीरज बावरा और बल्देव कृष्ण जगाधरी की संगत ने श्रोताओं को उठने नहीं दिया। जितनी भीड़ शुरू में थी, अंत तक उतनी ही रही।
पचकुइंया के जीआईसी मैदान पर मुरलीधर मनुहार ने शुक्रवार को कृष्ण मिलन की चाह में एक शाम सजाई। नव संवत्सर 2074 का स्वागत। ‘कहा प्रभु से बिगड़ता क्या, मेरी बिगड़ी बनाने में। मजा क्या आ रहा तुमको, मुझे यूं तड़पाने में। वो बोले क्यों मेरे पीछे पड़ा तू रोज रहता है। मैं बोला दूसरा कोई बता दो मुझको जमाने में’...विनोद अग्रवाल ने जब इस भजन की पंक्तियां गुनगुनाई तो भक्त दीवाने हो गए। कहीं नेत्र बंद हो गए तो कहीं लोग झूम उठे। भजनों के बीच उनके सूफियाने शेरों पर श्रोता कभी आह तो कभी वाह करते रहे। ‘बंशी वाले के चरणों में सर हो मेरा। फिर न पूछो कि उस वक्त क्या बात है। जब से डाला है डेरा तेरे द्वार पर। फिर न पूछो कि कैसे मुलाकात है। मैं न चाहूं कि मुझको खुदा ही मिले। मैं न चाहूं मुझे बादशाही मिले। खाक दर की मिले ये मुकद्दर मेरा। इससे बढ़कर भला और क्या सौगात है’ पर तो श्रोता वाह-वाह कर उठे। इसके बाद तो श्रोता भजनों की रसधारा में बह गए। ‘अगर तेरे दर पे सुनाई न होती, तो दुनिया यहां इतनी आई न होती’, भजन पर आयोजन स्थल तालियों से गूंज उठा। ‘गोपाल संवरिया मेरे, नंदलाल संवरिया मेरे’, भजन पर सभी मंत्रमुग्ध हो गए। ‘हे गोविंद, हे गोपाल’ की जुगलबंदी पर तो पूरा प्रांगण ही उठकर झूमने लगा। इससे पूर्व बल्देव कृष्ण जगाधरी वाले ने अपने भजनों से समां बांध दिया। उन्होंने ‘एक कोर कृपा की कर दो लाडली श्री राधे। दासी की झोली भर दो लाड़ली श्रीराधे’ से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई भजन सुनाए। आरंभ में मुरलीधर मनुहार के संरक्षक विधायक योेगेंद्र उपाध्याय व मुख्य अतिथि भानुपुरा पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने मंच पर सजाए गए बांके बिहारी के भव्य मंदिर में दीप जलाकर समारोह का शुभारंभ किया। विधायक जगन प्रसाद गर्ग व चौधरी उदयभान सिंह, अध्यक्ष पुष्पेंद्र त्रिवेदी, भाजपा महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे, दिनेश कातिब, गौरव बंसल, जेपी यादव, रमाशंकर अग्रवाल, मुरारी लाल गोयल पेंट, राजेश चतुर्वेदी, रीतेश शुक्ला आदि मौजूद थे।
स्वच्छता का संदेश दिया
आगरा। विनोद अग्रवाल ने भक्ति रस में डूबकर शहद घुले शब्दों को राधा-कृष्ण भक्तों के दिल में उतारने के दौरान स्वच्छता का संदेश भी दिया। उन्होंने सफाई और हरियाली को राधा-कृष्ण की महिमा से जोड़ा। कहा, राधा रानी का एक नाम हरे भी है। जहां स्वच्छता होती है, हरियाली होती है, वहां राधा रानी होती हैं, नीला अंबर तो कृष्ण हैं हीं। इस तरह पूरी कायनात राधा-कृष्ण ही तो है। अगर आप राधा और कृष्ण के दीवाने हैं तो स्वच्छता रखें, पर्यावरण को हरा भरा रखें।
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मुरलीधर मनुहार
- पूरा कार्यक्रम स्थल फूलों से सजाया गया था, चारों और राधा-कृष्ण की भव्य झांकियां लगाई गई थी।
- भजन संध्या के दौरान खुश्बू की फुहार छोड़ी गई, भक्ति धुनों के बीच पूरा वातावरण सुगंधित हो उठा।
- राधा-कृष्ण भक्ति की दिल में सीधे उतर रही धुनों में लीन श्रद्धालु सुध-बुध होकर देर रात तक नाचते रहे।
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पचकुइंया के जीआईसी मैदान पर मुरलीधर मनुहार ने शुक्रवार को कृष्ण मिलन की चाह में एक शाम सजाई। नव संवत्सर 2074 का स्वागत। ‘कहा प्रभु से बिगड़ता क्या, मेरी बिगड़ी बनाने में। मजा क्या आ रहा तुमको, मुझे यूं तड़पाने में। वो बोले क्यों मेरे पीछे पड़ा तू रोज रहता है। मैं बोला दूसरा कोई बता दो मुझको जमाने में’...विनोद अग्रवाल ने जब इस भजन की पंक्तियां गुनगुनाई तो भक्त दीवाने हो गए। कहीं नेत्र बंद हो गए तो कहीं लोग झूम उठे। भजनों के बीच उनके सूफियाने शेरों पर श्रोता कभी आह तो कभी वाह करते रहे। ‘बंशी वाले के चरणों में सर हो मेरा। फिर न पूछो कि उस वक्त क्या बात है। जब से डाला है डेरा तेरे द्वार पर। फिर न पूछो कि कैसे मुलाकात है। मैं न चाहूं कि मुझको खुदा ही मिले। मैं न चाहूं मुझे बादशाही मिले। खाक दर की मिले ये मुकद्दर मेरा। इससे बढ़कर भला और क्या सौगात है’ पर तो श्रोता वाह-वाह कर उठे। इसके बाद तो श्रोता भजनों की रसधारा में बह गए। ‘अगर तेरे दर पे सुनाई न होती, तो दुनिया यहां इतनी आई न होती’, भजन पर आयोजन स्थल तालियों से गूंज उठा। ‘गोपाल संवरिया मेरे, नंदलाल संवरिया मेरे’, भजन पर सभी मंत्रमुग्ध हो गए। ‘हे गोविंद, हे गोपाल’ की जुगलबंदी पर तो पूरा प्रांगण ही उठकर झूमने लगा। इससे पूर्व बल्देव कृष्ण जगाधरी वाले ने अपने भजनों से समां बांध दिया। उन्होंने ‘एक कोर कृपा की कर दो लाडली श्री राधे। दासी की झोली भर दो लाड़ली श्रीराधे’ से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई भजन सुनाए। आरंभ में मुरलीधर मनुहार के संरक्षक विधायक योेगेंद्र उपाध्याय व मुख्य अतिथि भानुपुरा पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने मंच पर सजाए गए बांके बिहारी के भव्य मंदिर में दीप जलाकर समारोह का शुभारंभ किया। विधायक जगन प्रसाद गर्ग व चौधरी उदयभान सिंह, अध्यक्ष पुष्पेंद्र त्रिवेदी, भाजपा महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे, दिनेश कातिब, गौरव बंसल, जेपी यादव, रमाशंकर अग्रवाल, मुरारी लाल गोयल पेंट, राजेश चतुर्वेदी, रीतेश शुक्ला आदि मौजूद थे।
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स्वच्छता का संदेश दिया
आगरा। विनोद अग्रवाल ने भक्ति रस में डूबकर शहद घुले शब्दों को राधा-कृष्ण भक्तों के दिल में उतारने के दौरान स्वच्छता का संदेश भी दिया। उन्होंने सफाई और हरियाली को राधा-कृष्ण की महिमा से जोड़ा। कहा, राधा रानी का एक नाम हरे भी है। जहां स्वच्छता होती है, हरियाली होती है, वहां राधा रानी होती हैं, नीला अंबर तो कृष्ण हैं हीं। इस तरह पूरी कायनात राधा-कृष्ण ही तो है। अगर आप राधा और कृष्ण के दीवाने हैं तो स्वच्छता रखें, पर्यावरण को हरा भरा रखें।
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मुरलीधर मनुहार
- पूरा कार्यक्रम स्थल फूलों से सजाया गया था, चारों और राधा-कृष्ण की भव्य झांकियां लगाई गई थी।
- भजन संध्या के दौरान खुश्बू की फुहार छोड़ी गई, भक्ति धुनों के बीच पूरा वातावरण सुगंधित हो उठा।
- राधा-कृष्ण भक्ति की दिल में सीधे उतर रही धुनों में लीन श्रद्धालु सुध-बुध होकर देर रात तक नाचते रहे।