कासगंज। बाढ़ की आपदा ने प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों को दुश्वारियों ने जकड़ रखा है। अभी प्रभावित इलाकों से बाढ़ के पानी की निकासी न होने से ग्रामीण बेहद परेशान हैं। खेतों में भरे पानी ने फसलों को सड़ा दिया है। ऐसी स्थिति में किसान फसलों की क्षति से हो रही बर्बादी को लेकर बेहद चिंतित हैं। गंगा के जलस्तर में लगातार मामूली उतार-चढ़ाव का क्रम बना हुआ है। सोमवार को तीन सेंटीमीटर की गिरावट जलस्तर में दर्ज की गई।सोमवार को हरिद्वार व बिजनौर के बैराज से प्रवाह में मामूली कमी आई। वहीं नरौरा से पानी का प्रवाह स्थिर बना रहा। वहीं पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण अभी और जलस्तर में गिरावट के आसार नजर नहीं आ रहे। इसे देखते हुए ग्रामीणों की चिंताएं लगातार बढ़ी हुई हैं। किसानों की मक्का, बाजरा की फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो गई है, लेकिन लगातार पानी भरा होने के कारण धान और ईख की फसल लगातार प्रभावित हो रही हैं। जिले के पटियाली इलाके के मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती, अलीपुर भकुरी, रिकहरा, गठैरा, नरदौली पुख्ता सहित आस पास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी भरा है। वहीं सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, शहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे सहित आस पास के तमाम गांव बाढ़ से प्रभावित है। ग्रामीण सोनू ने बताया कि गंगा की बाढ़ में फसलें पूरी तरह तबाह हो गई हैं। इतने लंबे समय तक बाढ़ का ठहराव हुआ है। इससे पानी की निकासी नहीं हो पा रही। ग्रामीण बेहद परेशान हैं। बाढ़ के प्रकोप को एक महीना पूरा होने वाला है। पूरी तरह से ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं। नगला जयकिशन के उर्वेश ने बताया कि बाढ़ की विभीषिका से अभी राहत नहीं मिल पा रही। पूरी तरह से बर्बादी का आलम बन गया है। प्रशासन ने अभी तक कोई आर्थिक सहायता नहीं दी है केवल राशन के पैकेट ही दिए हैं।