यूपी: क्या आपने देखी है ऐसी लाचारी...घर की एक दीवार के लिए 14 साल से जंग; यशवंत की आपबीती सुन रो पड़ेंगे
जमीन विवाद में पीड़ित 14 साल से कलेक्ट्रेट के चक्कर लगा रहे हैं। हिम्मत नहीं टूटी है। उम्मीद तो ये है कि कभी तो सुनवाई होगी।
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माथे पर चिंता की लकीरें, आंखों पर चश्मा, लंबी सफेद दाढ़ी, बदन पर धारीदार शर्ट और पैंट, दुबली-पतली देह और पांव में हवाई चप्पल। नाम यशवंत, यह 14 साल से कलेक्ट्रेट में अफसरों के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। इस उम्मीद में कि उसे जमीन विवाद में न्याय मिलेगा। पूछने पर उन्होंने कहा कि कोई सुनवाई नहीं हो रही भाई साहब... क्या करें, आत्महत्या कर लें।
देवरी रोड स्थित नगला लटूरी निवासी यशवंत को ‘राग दरबारी’ के पात्र ‘लंगड़’ की तरह न्याय व्यवस्था में पूर्ण विश्वास है। उस कहानी में लंगड़ दीवानी के चक्कर काटता था, यहां यशवंत कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे हैं, 14 साल से लगभग हर दिन। यशवंत ने अमर उजाला को बताया कि उसके पिता के नाम से फर्जी वसीयत बनाकर आरोपियों ने 6 सितंबर 2009 को उसके घर का ताला तोड़कर माल लूट लिया। कच्चे घर की दीवार ढहा दी।
तत्कालीन जिलाधिकारी अजय चौहान को आपबीती सुनाई तो उन्होंने एडीएम वित्त राम आसरे से मामले की जांच कराई। जांच में आरोप सही निकले। एडीएम के आदेश पर आरोपियों के विरुद्ध थाना सदर में केस दर्ज हुआ था। लेकिन, 14 साल से उनके घर की दीवार दोबारा खड़ी नहीं हो सकी। पुलिस ने विवेचना के नाम पर लीपापोती की। जब वह टूटी दीवार बनाने की कोशिश करते हैं तो आरोपी उसके साथ मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। उसे अपने ही घर की दीवार नहीं बनाने दे रहे।
न्याय की उम्मीद लेकर वह रोज कलेक्ट्रेट आते हैं। कभी डीएम कक्ष, तो कभी एडीएम तो कभी मजिस्ट्रेट कक्ष के बाहर घंटों इस आस में खड़े रहते हैं कि शायद न्याय मिल जाए। अब अधिकारी भी उससे बात करना पसंद नहीं करते।
जरूर मिलेगा न्याय
जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। पीड़ित मुझसे आकर मिले। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उसे न्याय जरूर मिलेगा।