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बच्चों की बीमारी के आगे बेबस माता-पिता, राष्ट्रपति से लगाई इच्छामृत्यु की गुहार
Thu, 24 Jan 2019 05:40 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 24 Jan 2019 05:40 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मैनपुरी जिले में बच्चों की बीमारी के आगे बेबस माता-पिता ने इच्छामृत्यु की मांगी है। बच्चों के इलाज में सारी जमापूंजी खत्म हो गई। लोगों की मदद भी नाकाफी साबित हुई। शासन से भी गुहार लगाई, लेकिन इलाज में मदद की कोई आस न देख लाचार माता-पिता ने इच्छामृत्यु दिए जाने की गुहार लगाई है।
किशनी क्षेत्र के गांव कत्तरा निवासी शिववीर सिंह के तीन बच्चे करिश्मा (8), दिव्यांशु (6), राधा (2) हैं। तीनों बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। इनमें करिश्मा और दिव्यांशु की हालत गंभीर है। हर महीने दोनों का खून बदला जाता है, जिसमें 10 से ज्यादा का खर्च आता है। वहीं छोटी बेटी राधा भी बीमार रहती है।
पिता शिववीर के मुताबिक बीमार बच्चों के इलाज में सारी जमापूंजी खर्च हो गई है। जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी है। सैफई, आगरा और दिल्ली तक इलाज करवा चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। डॉक्टरों ने थैलेसीमिया का स्थायी इलाज ऑपरेशन बताया है। इसमें एक बच्चे का खर्चा करीब 22 लाख रुपये आएगा।
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किशनी क्षेत्र के गांव कत्तरा निवासी शिववीर सिंह के तीन बच्चे करिश्मा (8), दिव्यांशु (6), राधा (2) हैं। तीनों बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। इनमें करिश्मा और दिव्यांशु की हालत गंभीर है। हर महीने दोनों का खून बदला जाता है, जिसमें 10 से ज्यादा का खर्च आता है। वहीं छोटी बेटी राधा भी बीमार रहती है।
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पिता शिववीर के मुताबिक बीमार बच्चों के इलाज में सारी जमापूंजी खर्च हो गई है। जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी है। सैफई, आगरा और दिल्ली तक इलाज करवा चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। डॉक्टरों ने थैलेसीमिया का स्थायी इलाज ऑपरेशन बताया है। इसमें एक बच्चे का खर्चा करीब 22 लाख रुपये आएगा।
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कुछ जमीन बेची, कुछ गिरवी पड़ी
इतनी बड़ी रकम जुटाने में शिववीर असमर्थ हैं। उनके पास पैतृक सात बीघा जमीन है, जिसमें से चार बीघा जमीन वो 11 लाख में बेचकर बच्चों का इलाज करा चुके हैं। तीन बीघा शेष जमीन भी रिश्तेदारों के पास गिरवी रखी है। हालात यह हो गए हैं कि अब हर महीने बच्चों के इलाज में आने वाला खर्च भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
पीड़ित शिववीर का कहना है कि इलाज में मदद के लिए प्रशासन से शासन तक पत्र लिखे, लेकिन कहीं से भी कोई मदद की आस न देख परिवार निराश हो चुका है। इसलिए उसने राष्ट्रपति से अपनी और पत्नी के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगने का फैसला लिया है।
पीड़ित शिववीर का कहना है कि इलाज में मदद के लिए प्रशासन से शासन तक पत्र लिखे, लेकिन कहीं से भी कोई मदद की आस न देख परिवार निराश हो चुका है। इसलिए उसने राष्ट्रपति से अपनी और पत्नी के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगने का फैसला लिया है।