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धोखाधड़ी करने वाले गैंग को फर्जी सिम सप्लाई करने वाला शातिर गिरफ्तार

Sun, 03 Apr 2022 06:48 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 06:48 PM IST
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Vicious arrested for providing sim to fraud gang
मैनपुरी। ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गैंग को फर्जी सिम मुहैया कराने वाले शातिर को साइबर सेल की टीम ने कोतवाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। शातिर के कब्जे से 116 प्री-एक्टिवेटेड सिम व मोबाइल बरामद हुआ। पूछताछ उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
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एसपी अशोक कुमार राय के निर्देशन में फर्जी सिमकार्ड के जरिए जनता के खाते से रुपये निकालने वाले शातिर गिरोह की तलाश में साइबर सेल की टीम जुटी हुई है। सीओ (पर्यवेक्षण अधिकारी-साइबर) चंद्रकेश सिंह ने बताया कि शनिवार को साइबर सेल प्रभारी विक्रम सिंह को सूचना मिली कि ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गैंग को प्री-एक्टिवेटेड सिम सप्लाई करने वाला शातिर जिले में मौजूद है। टीम के एक्सपर्ट सरयू कुमार, विजय कुमार, महीपाल, मनोज कुमार ने उसे ट्रैस किया। देर शाम करीब आठ बजे पुलिस ने शातिर को बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी ने अपना नाम दिलदार खां उर्फ लल्ला निवासी फिरोजपुर सलोनी थाना मारहरा, एटा हाल पता मकान नंबर 88 गली नंबर 17कल्याणपुरी दिल्ली बताया। उसने बताया कि वह कासगंज, एटा, दिल्ली में झोपड़ पट्टियों में रहने वाले लोगों के नाम पर सिम निकलवाकर उसे पेटीएम, गूगल प्ले आदि बनाकर धोखाधड़ी करने वाले गैंग को सप्लाई करता है। प्रति प्री-एक्टिवेटेड सिम को एक हजार रुपये में बेचता था। सिम को वह साथी विशाल निवासी मैनपुरी, पंकज कश्यप, गौरव शाक्य निवासी सौंरिख कन्नौज को देता है, वह लोग दिल्ली व अन्य जनपदों में इसकी सप्लाई करते करते हैं।
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एएमयू के नाम पर बनाई थी फर्जी बेवसाइट
साइबर सेल प्रभारी ने बताया कि पकड़ा गया दिलदार खां शातिर अपराधी है। उसके द्वारा एएमयू के नाम से फर्जी बेवसाइट बनाकर लाखों रुपये की ठगी की थी। इसके माध्यम से वह स्टाफ नर्स, स्टोर कीपर, वायरलैस ऑपरेटर की नौकरी देने के नाम पर कई युवाओं से ठगी कर चुका है। पूछताछ में बताया कि वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का कुलसचिव बनकर एटा, कासगंज, बुलंदशहर, हाथरस में ग्रामीण परिवेश के युवाओं को फर्जी तैयार की गई इंटरव्यू कॉल लैटर भेजता था। अलीगढ़ में अच्छे होटल में उनसे मुलाकात कर पांच से सात लाख रुपये नौकरी लगवाने के नाम पर ठग लेता था। दबाव बनाने पर वह लोग दिल्ली में छिपकर रहने लगे थे।
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