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Taj Mahotsav 2026: ताज महोत्सव में इस बार शिल्पी हो गए निराश, जो सोचकर आए थे; वैसा कुछ भी नहीं मिला
Fri, 27 Feb 2026 09:13 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 27 Feb 2026 09:13 AM IST
सार
शिल्पग्राम से टाटा ग्राउंड शिफ्ट हुए ताज महोत्सव में भीड़ तो उमड़ रही है, लेकिन शिल्पियों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। विदेशी पर्यटकों की कमी और कम बिक्री के कारण देशभर से आए कारीगर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
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ताज महोत्सव 2026
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित टाटा मैदान पर लगे ताज महोत्सव इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है। 20 एकड़ के इस मिनी भारत में रौनक और सजावट तो भरपूर है, लेकिन देश भर से आए शिल्पियों के चेहरे मायूस हैं। भीड़ तो हजारों की है, लेकिन खरीदारों की कमी ने शिल्पियों की कमर तोड़ दी है।
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हर साल 18 से 27 फरवरी तक आयोजित होने वाला यह महोत्सव अपनी पारंपरिक जगह शिल्पग्राम से हटकर इस बार फतेहाबाद रोड स्थित टाटा ग्राउंड पर आयोजित हो रहा है। शिल्पग्राम में यूनिटी मॉल के निर्माण के चलते प्रशासन ने आयोजन स्थल बदला। जगह बड़ी हुई, व्यवस्थाएं बेहतर हुई, लेकिन पर्यटकों की वो आवाजाही खत्म हो गई जो शिल्पियों की कमाई का मुख्य जरिया थी।हस्तशिल्पी हाथ पर हाथ धरे बैठने को मजबूर हैं। दुकान का किराया निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
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विदेशी पर्यटकों की कमी
शिल्पग्राम से ताजमहल पास था, जिससे ताज जाने वाले पर्यटक महोत्सव में पहुंचते थे। टाटा ग्राउंड पर पर्यटक नहीं जा रहे हैं। शिल्पियों को उम्मीद है कि शायद खरीदारी की रफ्तार बढ़े, अन्यथा हुनरमंदों को अपना शिल्प वापस ले जाना पड़ेगा। मुरादाबाद के अनुज अग्रवाल बताते है, कि शाम को स्थानीय लोगों की भीड़ तो है, लेकिन वे घूमने और खाने-पीने तक सीमित हैं। खरीदारी बेहद कम है। मध्य प्रदेश के विनोद का कहना है कि पीतल की मूर्तियों की बिक्री पिछले वर्षों के मुकाबले बेहद कम है। असम से आए आबिद के चेहरे पर कुछ सुकून है। उनके बांस के सजावटी सामान, टोकरियां और कप की खरीदारी हुई है। वहीं हस्तशिल्पियों की निराशा के उलट स्थानीय निवासी शिवांगी गोस्वामी का कहना है कि बड़ा मैदान होने के कारण महोत्सव काफी व्यवस्थित है।
शिल्पग्राम से ताजमहल पास था, जिससे ताज जाने वाले पर्यटक महोत्सव में पहुंचते थे। टाटा ग्राउंड पर पर्यटक नहीं जा रहे हैं। शिल्पियों को उम्मीद है कि शायद खरीदारी की रफ्तार बढ़े, अन्यथा हुनरमंदों को अपना शिल्प वापस ले जाना पड़ेगा। मुरादाबाद के अनुज अग्रवाल बताते है, कि शाम को स्थानीय लोगों की भीड़ तो है, लेकिन वे घूमने और खाने-पीने तक सीमित हैं। खरीदारी बेहद कम है। मध्य प्रदेश के विनोद का कहना है कि पीतल की मूर्तियों की बिक्री पिछले वर्षों के मुकाबले बेहद कम है। असम से आए आबिद के चेहरे पर कुछ सुकून है। उनके बांस के सजावटी सामान, टोकरियां और कप की खरीदारी हुई है। वहीं हस्तशिल्पियों की निराशा के उलट स्थानीय निवासी शिवांगी गोस्वामी का कहना है कि बड़ा मैदान होने के कारण महोत्सव काफी व्यवस्थित है।