गणेशजी ने दिया था सपना: 12 साल पहले रखी गई थी मंदिर की नींव, अब बनकर तैयार हुआ अष्टकोणीय भव्य मंदिर
भगवान गणेश जी सपने में दिखे तो आगरा कारोबारी परिवार ने 12 साल पहले भव्य मंदिर निर्माण के लिए नींव रखी। अब ये मंदिर बनकर तैयार हो गया है।
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आगरा- कानपुर हाइवे पर छलेसर में दक्षिण भारतीय शैली में विघ्न विनाशक भगवान गणेश जी का अष्टकोणीय मंदिर 12 वर्षों से चल रहे निर्माण कार्य के बाद भव्य आकार ले चुका है। मंदिर में पद्मश्री पेरूमल सत्पति द्वारा एक वर्ष में बनाई गई वरद वल्लभा गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मंदिर 28 अप्रैल 2022 से भक्तों के लिए खुल जाएगा। अभी मंदिर में भगवान की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूजा-अर्चना चल रही है।
12 साल पहले रखी गई थी नींव
एत्मादपुरआगरा-फिरोजाबाद रोड स्थित छलेसर पर अष्टकोणीय वरद वल्लभा गणपति मंदिर की नींव 12 साल पहले एनआरएल ग्रुप के हरीमोहन गर्ग व उनके बेटे रोहित व सिद्धांत गर्ग द्वारा रखी गई थी। सिद्धांत गर्ग ने बताया कि करीब 12 साल पहले उनके पिता हरीमोहन गर्ग के सपने में भगवान गणेश आए थे। इसके बाद ही उन्होंने गणपति का मंदिर बनाने की सोची।
जैसलमेर के पत्थरों का हुआ प्रयोग
मंदिर को दक्षिण भारतीय मंदिरों की तर्ज पर बनाया गया है। मंदिर निर्माण की कारीगरी में प्रयुक्त हस्त कला और हस्तशिल्प के साथ जैसलमेर की विशेष आभा लिए पीले पत्थर ने मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं। मंदिर दो हजार वर्ग में बना है। मंदिर में दक्षिण भारत के पुजारी हर दिन विधि विधान से पूजा अर्चना करेंगे।
चल रही प्राण प्रतिष्ठा
दक्षिण भारत चैन्नई के कांचीपुरम के विद्वान पंडित शबरी राजन के नेतृत्व में आठ विद्वान पंडितों की टीम ने जहां प्राण प्रतिष्ठा के लिए विशेष पूजन पद्धतियों का शुभारंभ किया, वहीं पंच कुंडीय यज्ञशाला में कांचीपुरम के यज्ञाचार्य भरनीधरन आर ने सुबह वास्तु हवन और शाम की बेला में जया हवन करवाया। इस दौरान दोपहर को शयनादिवासम के अंतर्गत भगवान की प्रतिमा को धान्य की शैया पर एक दिन के लिए शयन कराया गया।