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उटंगन नदी हादसा: हरेश का भी मिला शव...मूर्ति विसर्जन करते डूबे सभी 12 लोगों की माैत, छह दिन चला सर्च ऑपरेशन

Tue, 07 Oct 2025 01:29 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 07 Oct 2025 01:29 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के आगरा में उटंगन  नदी में जारी सर्च ऑपरेशन मंगलवार को हरेश का शव मिलने के साथ समाप्त हो गया। मूर्ति विसर्जन के दाैरान डूबे सभी 12 लोगों के शव नदी से निकाले जा चुके ह्रैं।

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Utangan river tragedy Illegal Mining Turns Deadly 12 Youths Drown in Utangan River
उटंगन नदी हादसा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अवैध खनन के खेल ने खेरागढ़ के कुसियापुर गांव में कई घरों के चिराग बुझा दिए। मंगलवार सुबह दो, दोपहर में एक और शाम को आखिरी लापता हरेश का शव बरामद हुआ।  उटंगन नदी में 12 जिंदगियों के लिए 25 फीट गहरा और छह मीटर चौड़ा गड्ढा ऐसा भंवर बन गया, जहां से वो बाहर नहीं निकल सके। 12 शव छह मीटर के दायरे से ही निकाले गए हैं। इस हिस्से को छोड़कर उटंगन में तीन फीट से ज्यादा गहरा पानी ही नहीं है।
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सर्च ऑपरेशन के दौरान मंगलवार सुबह सचिन उर्फ महावीर पुत्र रामवीर का शव निकाला गया। इसके कुछ देर बाद ही  दीपक का शव भी बरामद कर लिया गया। दोपहर में गजेंद्र का शव नदी से निकाला गया। शाम को हरेश का शव नदी से बरामद हुआ। इसकी जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। बता दें दो अक्तूबर को उटंगन नदी में जिस जगह पर 12 लोग लापता हुए, उसके ठीक सामने 20 फीट चौड़ा कच्चा रास्ता है जो खनन से निकाली गई रेत को ले जाने में उपयोग होता है। इसी रास्ते से युवक दुर्गा मूर्ति को विसर्जन के लिए लेकर आए थे। नदी के किनारे पानी कम था, जहां वह एक फीट पानी में ही मूर्ति को रखकर नदी के अंदर चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक जब पानी में अंदर पहुंचे तो अचानक ही एक युवक का पैर गड्ढे में पड़ा और वह नीचे किसी कुएं सरीखी गहराई में चला गया। उसके साथ ही अन्य युवक भी गिरते चले गए।
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इनमें से अभिषेक, भगवती, वीनेश, ओकेश के शव मिट्टी की परत के नीचे दबे हुए मिले हैं। एनडीआरएफ के 60 सदस्य, 50 पैरा ब्रिगेड की 411 पैरा फील्ड यूनिट के 19 सदस्य इस अभियान में युवकों की तलाश में जुटे हैं। सांसद राजकुमार चाहर ने बताया कि खनन का गड्ढा न होता तो यह हादसा भी नहीं होता। नदी में ज्यादा पानी नहीं था। डूबने की घटना होती ही नहीं।
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खनन माफिया जिम्मेदार
हादसे में डूबने के बाद बचाए गए विष्णु को जब सीन रीक्रिएट करने के लिए लाया गया तो उसने नदी में प्रवेश से लेकर बाहर निकलकर आने तक का पूरा ब्योरा एनडीआरएफ और सेना के विशेषज्ञों के सामने बताया। विष्णु ने बताया कि नदी में पानी कम था, लेकिन जहां हादसा हुआ, वहां अचानक पैर पड़ते ही एकदम नीचे चले गए, मानो कोई कुआं हो। यहां 25 फीट से ज्यादा गहरा गड्ढा था जो खनन के कारण बन गया था। नदी में अक्सर पानी नहीं रहता। कई वर्षों के बाद उटंगन में इतना पानी आया। एनडीआरएफ के निरीक्षक विनोद कुमार के मुताबिक उटंगन में जिस जगह हादसा हुआ, वहां 25 फीट गहरा गड्ढा तो है ही, नजदीक में 15 फीट गहरे और गड्ढे हैं, जो खनन के कारण बने हैं। मूर्ति विसर्जन के लिए आए लोग इन गड्ढों से अनजान थे और हादसे का शिकार हो गए।

 
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