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उटंगन हादसा: चार दिन बाद मिली बेटों की लाश...शव से लिपटकर रोने लगा पिता, मां हुई बेसुध; रुला देगी ये तस्वीर
Tue, 07 Oct 2025 09:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 07 Oct 2025 09:07 AM IST
सार
आगरा के गांव कुसियापुर में घरों से उठतीं चीखें और करुण क्रंदन दिल दहला रहा है। सोमवार को चौथे दिन जब वीनेश और ओकेश के शव बाहर निकले, तो मां बेसुध हो गई। पिता शव से लिपटकर रोने लगे।
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आगरा हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
उटंगन नदी में डूबे वीनेश और ओकेश के शव सोमवार को मिलते ही दोनों के घरों में चीख-पुकार मच गई। वीनेश के पिता विजय सिंह नदी किनारे पर बैठे हुए थे। वह इस इंतजार में थे कि बेटा बाहर निकाल लिया जाएगा। दोपहर में सबसे पहले वीनेश का शव निकाला गया। बेटे को देखकर पिता उससे लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें गांव के लोगों ने किसी तरह संभाला। शव निकलने की जानकारी हुई तो घर में भी कोहराम मच गया।
परिवार की महिलाओं का करुण क्रंदन गूंज उठा। वीनेश की मां ममता देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पांच दिन से उन्होंने अन्न का दाना तक नहीं खाया। पड़ोस की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं, लेकिन वह बार-बार बेटे वीनेश को पुकार रही थीं। छोटी बहन वर्षा व बड़ा भाई लोकेश अपने भाई को याद कर फफक-फफक कर रो रहा था।
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परिवार की महिलाओं का करुण क्रंदन गूंज उठा। वीनेश की मां ममता देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पांच दिन से उन्होंने अन्न का दाना तक नहीं खाया। पड़ोस की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं, लेकिन वह बार-बार बेटे वीनेश को पुकार रही थीं। छोटी बहन वर्षा व बड़ा भाई लोकेश अपने भाई को याद कर फफक-फफक कर रो रहा था।
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छह भाइयों में सबसे छोटा था ओकेश
गांव में प्रवेश करते ही ओकेश का घर है। वह 6 भाइयों में सबसे छोटा था, घर में सभी का लाडला था। पिता किशन सिंह किसान हैं। वह बृहस्पतिवार से ही बेटे के मिलने की आस में नदी किनारे ही टकटकी लगाए हुए बैठे थे। मां शांति देवी के आंसू नहीं रुक रहे हैं। पांच बड़े भाई राजेंद्र, नरेंद्र, ज्ञानी, श्रीनिवास व राहुल अपने छोटे भाई को याद कर फफक पड़ते हैं। घर पर रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। हादसे में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों में पांचवें दिन भी चूल्हा नहीं जले हैं। उधर, देर रात रविवार को मिले करन, सोमवार को मिले ओकेश और वीनेश के शव घर पहुंचे। इससे पूरे गांव में कोहराम मच गया।
ये भी पढ़ें - UP Rain: आ गई सर्दी! अगले तीन दिन बारिश, 5.9 डिग्री गिरा आगरा का पारा; पश्चिमी विक्षोभ का दिखा असर
गांव में प्रवेश करते ही ओकेश का घर है। वह 6 भाइयों में सबसे छोटा था, घर में सभी का लाडला था। पिता किशन सिंह किसान हैं। वह बृहस्पतिवार से ही बेटे के मिलने की आस में नदी किनारे ही टकटकी लगाए हुए बैठे थे। मां शांति देवी के आंसू नहीं रुक रहे हैं। पांच बड़े भाई राजेंद्र, नरेंद्र, ज्ञानी, श्रीनिवास व राहुल अपने छोटे भाई को याद कर फफक पड़ते हैं। घर पर रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। हादसे में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों में पांचवें दिन भी चूल्हा नहीं जले हैं। उधर, देर रात रविवार को मिले करन, सोमवार को मिले ओकेश और वीनेश के शव घर पहुंचे। इससे पूरे गांव में कोहराम मच गया।
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महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुरू
खेरागढ़ नगर पंचायत चेयरमैन सुधीर गर्ग ने बताया कि बचाव अभियान में तमाम बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ टीम होने के बावजूद डूबे लोग बमुश्किल निकल पा रहे हैं। सेना के स्कूबा डाइवर्स भी कार्य करने में चुनाैती का सामना कर रहे हैं। वह अपना अभियान पूरा कर पाएं इसलिए प्रार्थना भी शुरू हो गई। वहीं खेरागढ़ के गुफा मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप पंडित जयंती शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। यह तब तब जारी रहेगा, जब तक तलाशी अभियान पूरा नहीं हो जाता।
खेरागढ़ नगर पंचायत चेयरमैन सुधीर गर्ग ने बताया कि बचाव अभियान में तमाम बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ टीम होने के बावजूद डूबे लोग बमुश्किल निकल पा रहे हैं। सेना के स्कूबा डाइवर्स भी कार्य करने में चुनाैती का सामना कर रहे हैं। वह अपना अभियान पूरा कर पाएं इसलिए प्रार्थना भी शुरू हो गई। वहीं खेरागढ़ के गुफा मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप पंडित जयंती शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। यह तब तब जारी रहेगा, जब तक तलाशी अभियान पूरा नहीं हो जाता।