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US Tariffs: अमेरिकी टैरिफ से बढ़ी हस्तशिल्प निर्यातकों की चिंता, हर साल 1500 करोड़ रुपये का निर्यात
Sat, 05 Apr 2025 10:27 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 05 Apr 2025 10:27 AM IST
सार
अमेरिकी टैरिफ से हस्तशिल्प निर्यात पर संकट गहरा सकता है। आगरा से हर साल 1500 करोड़ रुपये का निर्यात होता है।
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हस्तशिल्प उत्पाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
संगमरमर पर पच्चीकारी, पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियों की मांग सबसे ज्यादा अमेरिका में है। अमेरिका ने 26 फीसदी टैरिफ लगाया तो हस्तशिल्प निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। आगरा से हर साल 1500 करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात होता है। इनमें से 80 फीसदी से ज्यादा अकेले अमेरिका में है।
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ताजमहल का दीदार करने आने वाले अमेरिकी पर्यटक सबसे ज्यादा खरीदारी करते हैं। शहर में 500 से ज्यादा हस्तशिल्प के एंपोरियम हैं, जहां से वह खरीदारी करते हैं। अपने साथ हस्तशिल्प उत्पाद ले जाने की जगह वह इसे अमेरिका भेजने के लिए कहते हैं, पर अब अमेरिकी टैरिफ लगने से खरीद के समय रेट और अमेरिका पहुंचने के रेट में 26 फीसदी का अंतर आ जाएगा।
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आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रह्लाद अग्रवाल ने बताया कि हस्तशिल्प की मांग सबसे ज्यादा अमेरिका में है। अभी तक उनके उत्पाद नामकरण की सामंजस्यपूर्ण प्रणाली (एचएसएन कोड) से एक फीसदी की ड्यूटी पर जा रहे थे। अब अमेरिकी 26 फीसदी टैरिफ का भार पड़ेगा तो मुश्किल हो जाएगी।
पर्यटक अपने साथ इन कृतियों को नहीं ले जाते। वह अमेरिका में ही मंगवाते हैं। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना ने बताया कि हस्तशिल्प में अब तक 5 फीसदी तक टैक्स था, अमेरिकी टैरिफ लगने से यह 31 फीसदी तक हो जाएगा। अभी देखो और इंतजार करो की नीति अपनाई जा रही है। माना जा रहा है कि टैरिफ से पूरा हस्तशिल्प उद्योग ही मंदी का शिकार हो जाएगा।
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ड्राॅ बैक मिले या सरकार कदम उठाए
हस्तशिल्प निर्यातकों के सामने यह संकट पहली बार आया है। अमेरिकी खरीदारों ने पूर्व में जो ऑर्डर दिए थे, उन्हें 9 अप्रैल के बाद भेजने पर टैरिफ का बोझ झेलना होगा। निर्यातकों का कहना है कि सरकार से मदद मिलनी जरूरी है। ड्राॅ बैक मिले या कोई अन्य कदम उठाया जाए। अगर 26 फीसदी टैरिफ बरकरार रहा तो पूरा हस्तशिल्प बर्बाद हो जाएगा। पहले ही जीएसटी के कारण हस्तशिल्प उद्योग संकट में है।
हस्तशिल्प निर्यातकों के सामने यह संकट पहली बार आया है। अमेरिकी खरीदारों ने पूर्व में जो ऑर्डर दिए थे, उन्हें 9 अप्रैल के बाद भेजने पर टैरिफ का बोझ झेलना होगा। निर्यातकों का कहना है कि सरकार से मदद मिलनी जरूरी है। ड्राॅ बैक मिले या कोई अन्य कदम उठाया जाए। अगर 26 फीसदी टैरिफ बरकरार रहा तो पूरा हस्तशिल्प बर्बाद हो जाएगा। पहले ही जीएसटी के कारण हस्तशिल्प उद्योग संकट में है।