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गुरु की अनूठी कला को जिंदा रखे हैं मोहम्मद शान, रेशम के धागे से बनाते हैं बोलती तस्वीर
Tue, 16 Jul 2019 12:04 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 16 Jul 2019 12:04 PM IST
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रेशम के धागे से ईसा मसीह की तस्वीर बनाते मोहम्मद शान
- फोटो : अमर उजाला
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हाथ में सुई और रेशम का धागा। आगरा के मोहम्मद शान और उनके भाई बिलाल ने बचपन में वालिद के हाथों में जब इनसे कपड़े पर कढ़ाई कर तस्वीर बनाते देखा तो कौतूहल जागा कि रंग, ब्रश के अलावा कैसे ऐसी बोलती तस्वीर बना सकते हैं।
वालिद ने जब हाथ में सुई और रेशम थमाया तो उन्हीं की तरह करने की कोशिश शुरू की। हर शब्द पर अमल किया। पद्मश्री और शिल्प गुरु से सम्मानित फजल मोहम्मद के इंतकाल के बाद अब रेशमदोजी-जरदोजी को उन्हीं के बेटे आगे बढ़ा रहे हैं।
मोहम्मद शान भी लोहामंडी, बेसनबस्ती के उसी कमरे में बैठकर रेशमदोजी से ईसा मसीह की वैसी ही तस्वीर बना रहे हैं, जहां उनके गुरु फजल मोहम्मद ने तैयार की थी। खाड़ी देशों में उनकी बनाई रेशमदोजी की तस्वीरों की मांग ज्यादा है।
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वालिद ने जब हाथ में सुई और रेशम थमाया तो उन्हीं की तरह करने की कोशिश शुरू की। हर शब्द पर अमल किया। पद्मश्री और शिल्प गुरु से सम्मानित फजल मोहम्मद के इंतकाल के बाद अब रेशमदोजी-जरदोजी को उन्हीं के बेटे आगे बढ़ा रहे हैं।
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मोहम्मद शान भी लोहामंडी, बेसनबस्ती के उसी कमरे में बैठकर रेशमदोजी से ईसा मसीह की वैसी ही तस्वीर बना रहे हैं, जहां उनके गुरु फजल मोहम्मद ने तैयार की थी। खाड़ी देशों में उनकी बनाई रेशमदोजी की तस्वीरों की मांग ज्यादा है।
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शान का कहना है कि उनके वालिद और उस्ताद फजल मोहम्मद ने उन्हें ऐसी कला सिखाई है, जो दुनिया में कहीं नहीं है। खाड़ी देश कुवैत के तीनों शाह की तस्वीर उनके गुरु ने बनाई थी, तब कुवैत सरकार ने उन्हें वहीं बसने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया।
अपने गुरु की तरह वो इस हुनर को बच्चे बच्चे तक पहुंचाना चाहते हैं। पांच हजार लोगों को वह रेशमदोजी सिखा चुके हैं। वालिद के अधूरे ख्वाब को उन्हें पूरा करना है। मोहम्मद शान चाहते हैं कि रेशमदोजी की कला पूरी दुनिया में पहुंचे।
जरदोजी के कारीगर मोहम्मद शान ने बताया कि मेरे गुरु और वालिद ने जरदोजी के लिए ख्वाब देखा था, जिसे मुझे पूरा करना है। मेरे गुरु का हर शब्द मेरे कानों में गूंजता है कि इस हुनर को दुनिया भर में पहुंचाना है, चाहे जो हो जाए।
अपने गुरु की तरह वो इस हुनर को बच्चे बच्चे तक पहुंचाना चाहते हैं। पांच हजार लोगों को वह रेशमदोजी सिखा चुके हैं। वालिद के अधूरे ख्वाब को उन्हें पूरा करना है। मोहम्मद शान चाहते हैं कि रेशमदोजी की कला पूरी दुनिया में पहुंचे।
जरदोजी के कारीगर मोहम्मद शान ने बताया कि मेरे गुरु और वालिद ने जरदोजी के लिए ख्वाब देखा था, जिसे मुझे पूरा करना है। मेरे गुरु का हर शब्द मेरे कानों में गूंजता है कि इस हुनर को दुनिया भर में पहुंचाना है, चाहे जो हो जाए।