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UP Police: तनाव में पुलिसकर्मी, पत्नी और बच्चों से इसलिए बिगड़ रहे रिश्ते...सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा
Sat, 27 Dec 2025 09:12 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 27 Dec 2025 09:12 AM IST
सार
यूपी पुलिस के जवान तनाव में हैं। पत्नी और बच्चों से भी उनके रिश्ते बिगड़ रहे हैं। कमिश्नरेट में तैनात एक हजार पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर हुए एक सर्वे में ये खुलासा हुआ।
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UP Police, यूपी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
जब वर्दी नहीं थी, तब पीड़ितों की सेवा, विभागीय अनुशासन की बात करते थे। खाकी वर्दी पहनते ही व्यवहार बदल गया। आम लोगों के नमस्कार नहीं करने पर गुस्सा आता है। छुट्टी न मिलने पर तनाव में आ रहे हैं। पत्नी और बच्चों से भी रिश्ते बिगड़ रहे हैं। यह खुलासा कमिश्नरेट में तैनात एक हजार पुलिस कर्मियों-अधिकारियों पर हुए एक सर्वे में हुआ है। 50 फीसदी पुलिसकर्मी वर्दी में राैब दिखाते हैं। 80 फीसदी डयूटी के ज्यादा घंटे, कम छुट्टी से तनाव में रहते हैं। 20 फीसदी में ही सकारात्मक धारणा की बात सामने आई।
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि थाने-चाैकी जाने पर अच्छा व्यवहार नहीं मिलने, बात न सुनने, पीड़ितों और आरोपियों की पिटाई की शिकायतें मिलती हैं। इन शिकायतों को कम करने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। व्यवहार विज्ञानी और जीवन प्रशिक्षक डाॅ. नवीन गुप्ता की टीम ने सर्वे किया, जिसमें सवाल-जवाब और व्यवहारिक दिक्कतों को जाना गया।
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डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि थाने-चाैकी जाने पर अच्छा व्यवहार नहीं मिलने, बात न सुनने, पीड़ितों और आरोपियों की पिटाई की शिकायतें मिलती हैं। इन शिकायतों को कम करने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। व्यवहार विज्ञानी और जीवन प्रशिक्षक डाॅ. नवीन गुप्ता की टीम ने सर्वे किया, जिसमें सवाल-जवाब और व्यवहारिक दिक्कतों को जाना गया।
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सभी के साथ सम्मान पूर्वक करें व्यवहार
डीसीपी सिटी ने बताया कि आगरा कमिश्नरेट में सात हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें से एक हजार कर्मचारियों से एक फाॅर्म भरवाकर पूछा कि वह अपने बारे में क्या सोचते हैं। लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। इसमें 50 फीसदी ने लिखा कि लोग उनसे अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। ट्रैफिक डयूटी में रहें तो वाहन चालक निर्देशों का पालन नहीं करते। कानून की बात करने पर लोग विवाद करने लगते हैं। इस पर गुस्सा आता है। उन्होंने समझाया कि वह लोगों से अच्छा व्यवहार करेंगे तो उनके प्रति लोगों की सोच बदलेगी।
डीसीपी सिटी ने बताया कि आगरा कमिश्नरेट में सात हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें से एक हजार कर्मचारियों से एक फाॅर्म भरवाकर पूछा कि वह अपने बारे में क्या सोचते हैं। लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। इसमें 50 फीसदी ने लिखा कि लोग उनसे अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। ट्रैफिक डयूटी में रहें तो वाहन चालक निर्देशों का पालन नहीं करते। कानून की बात करने पर लोग विवाद करने लगते हैं। इस पर गुस्सा आता है। उन्होंने समझाया कि वह लोगों से अच्छा व्यवहार करेंगे तो उनके प्रति लोगों की सोच बदलेगी।
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समूह चर्चा से सामने आया सच
व्यवहार विज्ञानी डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि 3 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हर दिन 50-50 पुलिसकर्मियों के दो ग्रुप बनाए गए थे। समूह चर्चा में समस्याओं पर बात हुई। इसमें सच सामने आया कि पुलिसकर्मी घर में समय नहीं दे पाते। अधिकारियों और नेताओं का बाव रहता है। वीआईपी आगमन के दाैरान ट्रैफिक रोकने पर लोग गलत व्यवहार करते हैं। पुलिसकर्मियों से अपना व्यवहार सुधारने और सेवा पर ध्यान देने को कहा गया। उनसे कहा कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि काैन क्या सोचता है। कानून व्यवस्था से समझाैता नहीं करना है। अपनी एक अलग सही इमेज बनानी है।
व्यवहार विज्ञानी डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि 3 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हर दिन 50-50 पुलिसकर्मियों के दो ग्रुप बनाए गए थे। समूह चर्चा में समस्याओं पर बात हुई। इसमें सच सामने आया कि पुलिसकर्मी घर में समय नहीं दे पाते। अधिकारियों और नेताओं का बाव रहता है। वीआईपी आगमन के दाैरान ट्रैफिक रोकने पर लोग गलत व्यवहार करते हैं। पुलिसकर्मियों से अपना व्यवहार सुधारने और सेवा पर ध्यान देने को कहा गया। उनसे कहा कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि काैन क्या सोचता है। कानून व्यवस्था से समझाैता नहीं करना है। अपनी एक अलग सही इमेज बनानी है।
किराये पर मकान नहीं, शादी नहीं हो रही
पुलिसकर्मियों ने कहा कि उनके बच्चे गलत रास्ते पर चलने लगते हैं। कोई किराये पर मकान नहीं देता है। स्कूल में बच्चों को आसानी से प्रवेश नहीं मिलता और शादी करने में समस्या आती है। छुट्टी नहीं मिलती। इससे तनाव आता है। इस पर विज्ञानी ने बताया कि जब हम सोच बदलेंगे तो लोग भी बदल जाएंगे।
पुलिसकर्मियों ने कहा कि उनके बच्चे गलत रास्ते पर चलने लगते हैं। कोई किराये पर मकान नहीं देता है। स्कूल में बच्चों को आसानी से प्रवेश नहीं मिलता और शादी करने में समस्या आती है। छुट्टी नहीं मिलती। इससे तनाव आता है। इस पर विज्ञानी ने बताया कि जब हम सोच बदलेंगे तो लोग भी बदल जाएंगे।
थानों में जाकर लिया जाएगा फीडबैक
टॉम एंड जैरी, नीबू रेस में खुद को बदलने का तरीका सिखाया गया। समझाया कि जीवन टॉम एंड जैरी की तरह है। परिवार और विभाग के बीच समन्वय बनाना सीखना होगा। नींबू रेस के माध्यम से बताया कि अपना व्यवहार नहीं बदलना चाहिए। डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का जल्द फीडबैक लिया जाएगा। एक टीम थानों में जाकर देखेगी कि जिन पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया, उनके व्यवहार में कितना बदलाव आया। उनके साथियों, अधिकारियों और आम लोगों से जानकारी ली जाएगी।
टॉम एंड जैरी, नीबू रेस में खुद को बदलने का तरीका सिखाया गया। समझाया कि जीवन टॉम एंड जैरी की तरह है। परिवार और विभाग के बीच समन्वय बनाना सीखना होगा। नींबू रेस के माध्यम से बताया कि अपना व्यवहार नहीं बदलना चाहिए। डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का जल्द फीडबैक लिया जाएगा। एक टीम थानों में जाकर देखेगी कि जिन पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया, उनके व्यवहार में कितना बदलाव आया। उनके साथियों, अधिकारियों और आम लोगों से जानकारी ली जाएगी।