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दरोगा ने इनामी अपराधी की जगह बेकसूर को भेजा जेल, छह साल बाद सामने आया सच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 17 Jul 2018 06:43 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
आगरा में अपहरण जैसे संगीन अपराध में पुलिस ने असली अपराधी को बचाने के लिए बेकसूर युवक को जेल भेज दिया। वह भी मुठभेड़ की फर्जी कहानी बनाकर ताकि वो आसानी से जेल से बाहर न आ पाए।
केस के ट्रायल के दौरान पुलिस की यह करतूत सामने आने पर कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ रिपोर्ट के आदेश दिए हैं। एसएसपी को दरोगा पर विभागीय कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है।
यह था मामला
12 फरवरी 2002 को आगरा के पिंढौरा थाना के राटौरी गांव से मायाराम के पुत्र हरिओम उर्फ कल्ला का बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। 11 लाख 51 हजार 101 रुपये की फिरौती मांगी थी।
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पुलिस की जांच में अपहरण करने वाले की पहचान कानपुर देहात के गजनेर के सैंया के बबलू उर्फ टाइगर उर्फ जितेंद्र पुत्र शिव प्रकाश के रूप में हुई। फरार होने के कारण एसएसपी ने उस पर इनाम भी घोषित किया।
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केस के ट्रायल के दौरान पुलिस की यह करतूत सामने आने पर कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ रिपोर्ट के आदेश दिए हैं। एसएसपी को दरोगा पर विभागीय कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है।
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यह था मामला
12 फरवरी 2002 को आगरा के पिंढौरा थाना के राटौरी गांव से मायाराम के पुत्र हरिओम उर्फ कल्ला का बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। 11 लाख 51 हजार 101 रुपये की फिरौती मांगी थी।
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पुलिस की जांच में अपहरण करने वाले की पहचान कानपुर देहात के गजनेर के सैंया के बबलू उर्फ टाइगर उर्फ जितेंद्र पुत्र शिव प्रकाश के रूप में हुई। फरार होने के कारण एसएसपी ने उस पर इनाम भी घोषित किया।
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कोर्ट में सामने आई सच्चाई
तत्कालीन थानाध्यक्ष कुंदन लाल ने उसे पकड़ने के बजाय खेल कर दिया। उसकी जगह गिरफ्तार किया कानपुर नगर के थाना बिल्हौर के गांव औरंगपुर के बबलू उर्फ टाइगर पुत्र राजकुमार को। गिरफ्तारी मुठभेड़ के बाद बताई गई।
युवक पर अपहरण के साथ पुलिस पर जानलेवा हमले का केस भी बना। गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया गया। वो कई सालों तक जेल में रहा, जबकि ईनामी अपराधी खुला घूमता रहा।
अब स्पेशल जिला जज राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कोर्ट में चल रहे केस के ट्रॉयल के दौरान सच्चाई सामने आई। वादी मायाराम ने साफ कहा कि पुलिस ने अपहर्ता की जगह उसी के नाम के दूसरे बेकसूर युवक को जेल भेज दिया था।
दरोगा पर दर्ज होगा केस
उनसे पहचान के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि यह वो बदमाश नहीं है। हरिओम ने भी यही कहा कि असली अपराधी अभी तक फरार चल रहा है। इस पर जज ने दरोगा कुंदन लाल के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए।
युवक पर अपहरण के साथ पुलिस पर जानलेवा हमले का केस भी बना। गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया गया। वो कई सालों तक जेल में रहा, जबकि ईनामी अपराधी खुला घूमता रहा।
अब स्पेशल जिला जज राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कोर्ट में चल रहे केस के ट्रॉयल के दौरान सच्चाई सामने आई। वादी मायाराम ने साफ कहा कि पुलिस ने अपहर्ता की जगह उसी के नाम के दूसरे बेकसूर युवक को जेल भेज दिया था।
दरोगा पर दर्ज होगा केस
उनसे पहचान के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि यह वो बदमाश नहीं है। हरिओम ने भी यही कहा कि असली अपराधी अभी तक फरार चल रहा है। इस पर जज ने दरोगा कुंदन लाल के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए।