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पुराने पन्नों से: संजय गांधी की नसबंदी नीति की कांग्रेस को चुकानी पड़ी भारी कीमत, सत्ता से हाथ धोना पड़ा
Wed, 17 Apr 2024 02:49 PM IST
शाहरुख खान
अशोक सिंह, अमर उजाला, आगरा
अशोक सिंह, अमर उजाला, आगरा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 17 Apr 2024 02:49 PM IST
सार
संजय गांधी की नसबंदी नीति की कांग्रेस को भारी कीमत चुकानी पड़ी। कांग्रेस को इस नीति के कारण सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था।
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UP Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आपातकाल में परिवार नियोजन इंदिरा गांधी सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल था। संजय गांधी ने युवक कांग्रेस में शामिल होने के लिए हर महीने दो लोगों की नसबंदी कराने की शर्त लगा दी थी। नसबंदी में जोर जबर्दस्ती से लोगों में रोष फैल गया। इसकी कीमत पार्टी को 1977 में हुए आम चुनाव में चुकानी पड़ी। कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा।
अमर उजाला के 29 मार्च 1976 को प्रकाशित खबर के मुताबिक, लखनऊ में युवक कांग्रेस की रैली में संजय गांधी ने कहा कि 37 वर्ष से कम आयु वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए युवक कांग्रेस के लिए दरवाजे खुले हैं।
इसके लिए सिर्फ एक शर्त है कि उन्हें प्रत्येक महीने दो लोगों की नसबंदी करानी पड़ेगी। संजय गांधी ने जनसंघ और 1971 में चुनावी गठबंधन करने वाले दलों पर फासीवादी होने का आरोप लगाया।
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रैली में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने संजय गांधी और उनके कार्यक्रमों की जमकर तारीफ की। उन्होंने संजय को इतिहास बदलने वाला युवा बताया। इस बात से संजय गांधी का मनोबल तो बढ़ा, लेकिन जनता में इसका गलत संदेश गया।
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अमर उजाला के 29 मार्च 1976 को प्रकाशित खबर के मुताबिक, लखनऊ में युवक कांग्रेस की रैली में संजय गांधी ने कहा कि 37 वर्ष से कम आयु वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए युवक कांग्रेस के लिए दरवाजे खुले हैं।
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इसके लिए सिर्फ एक शर्त है कि उन्हें प्रत्येक महीने दो लोगों की नसबंदी करानी पड़ेगी। संजय गांधी ने जनसंघ और 1971 में चुनावी गठबंधन करने वाले दलों पर फासीवादी होने का आरोप लगाया।
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रैली में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने संजय गांधी और उनके कार्यक्रमों की जमकर तारीफ की। उन्होंने संजय को इतिहास बदलने वाला युवा बताया। इस बात से संजय गांधी का मनोबल तो बढ़ा, लेकिन जनता में इसका गलत संदेश गया।