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विविः स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षक अभी नहीं बन सकेंगे शोध पर्यवेक्षक
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में अभी स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षक अर्ह होने के बाद भी शोध पर्यवेक्षक नहीं बन सकेंगे। विश्वविद्यालय के अध्यादेश में स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाने की व्यवस्था नहीं है। परास्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले अर्ह शिक्षकों को ही शोध पर्यवेक्षक बनाया जाता है। आगामी सत्र में पीएचडी में प्रवेश लेने वाले छात्रों के शोध निर्देशन के लिए परास्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों से ही आवेदन लिए गए हैं। हालांकि अभी इनकी सूची जारी नहीं की गई है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध एडेड कॉलेजों के प्राचार्य परिषद के महामंत्री डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि स्नातक स्तर पर तमाम योग्य शिक्षक हैं। इनका लाभ शोध कार्यों में मिलना चाहिए। स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए अध्यादेश में जल्द से जल्द संशोधन करना चाहिए। यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और शासन स्तर से मंजूरी दे दी गई है तो विश्वविद्यालय को देरी नहीं करनी चाहिए। इनको शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने से पीएचडी की सीटें बढ़ जाएंगी। अपेक्षाकृत अधिक छात्र-छात्राएं शोध कार्य कर सकेंगे। इससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। समाज को भी लाभ मिलेगा।
विश्वविद्यालय के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के निदेशक प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए विश्वविद्यालय के अध्यादेश में व्यवस्था करना जरूरी है। वर्तमान स्थिति में इनको शामिल नहीं किया जा सकता है।
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शासन कॉलेजों में पढ़ाने वाले अर्ह शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने पर जोर दे रहा है। पीएचडी की उपाधि धारक व संदर्भित पत्रिका में शोध प्रकाशित करने वाले एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर शोध निर्देशक बन सकते हैं।
स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले अर्ह शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए विश्वविद्यालय के अध्यादेश में संशोधन का प्रस्ताव राजभवन भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया जल्द की जाएगी। जिससे स्नातक भी पर्यवेक्षक बन सकें। - प्रो. आलोक कुमार राय, प्रभारी कुलपति डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध एडेड कॉलेजों के प्राचार्य परिषद के महामंत्री डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि स्नातक स्तर पर तमाम योग्य शिक्षक हैं। इनका लाभ शोध कार्यों में मिलना चाहिए। स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए अध्यादेश में जल्द से जल्द संशोधन करना चाहिए। यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और शासन स्तर से मंजूरी दे दी गई है तो विश्वविद्यालय को देरी नहीं करनी चाहिए। इनको शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने से पीएचडी की सीटें बढ़ जाएंगी। अपेक्षाकृत अधिक छात्र-छात्राएं शोध कार्य कर सकेंगे। इससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। समाज को भी लाभ मिलेगा।
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विश्वविद्यालय के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के निदेशक प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए विश्वविद्यालय के अध्यादेश में व्यवस्था करना जरूरी है। वर्तमान स्थिति में इनको शामिल नहीं किया जा सकता है।
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शासन कॉलेजों में पढ़ाने वाले अर्ह शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने पर जोर दे रहा है। पीएचडी की उपाधि धारक व संदर्भित पत्रिका में शोध प्रकाशित करने वाले एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर शोध निर्देशक बन सकते हैं।
स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले अर्ह शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए विश्वविद्यालय के अध्यादेश में संशोधन का प्रस्ताव राजभवन भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया जल्द की जाएगी। जिससे स्नातक भी पर्यवेक्षक बन सकें। - प्रो. आलोक कुमार राय, प्रभारी कुलपति डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि