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मझधार में फंसे एमए फ्रेंच के छात्र
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई) में एमए फ्रेंच में गत शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्र मझधार में फंस गए हैं। इनको पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। तृतीय सत्र की कक्षाएं अक्तूबर से ही लगनी थी, अभी तक लगनी शुरू नहीं हुई है।
एमए फ्रेंच सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम है। इसको गत सत्र में ही शुरू किया गया। 15 सीटें हैं, चार सेमेस्टर का कोर्स है। तृतीय सेमेस्टर में 13 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। पाठ्यक्रम में पढ़ाने के लिए विषय विशेषज्ञों के साक्षात्कार हुए थे। पाठ्यक्रम में स्वीकृत पद न होने से विषय विशेषज्ञ नहीं दिए गए। इस पाठ्यक्रम के संचालन के संबंध में समिति ने वित्तीय औचित्य न होने की रिपोर्ट दी है। इससे विषय विशेषज्ञ मिलने की राह और मुश्किल हो गई है। छात्र-छात्राएं पढ़ाई शुरू न होने से परेशान हैं। लगातार संस्थान के निदेशक से संपर्क कर रहे हैं।
केएमआई के निदेशक व विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर का कहना है कि प्रभारी कुलपति के आने पर एमए फ्रेंच के छात्रों का विषय रखा जाएगा। उनसे एक विषय विशेषज्ञ रखे जाने का अनुरोध किया जाएगा। जिससे कोर्स पूरा कराया जा सके। उम्मीद है कि इसके लिए स्वीकृति मिल जाएगी। एमए फ्रेंच प्रथम वर्ष में 12 छात्रों का प्रवेश लिया गया है, यदि इसके संचालन की स्थिति नहीं बनती तो छात्रों की फीस वापस कर दी जाएगी।
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जर्मन और रशियन भाषा के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं लिया गया है। रशियन भाषा में एक पद स्वीकृत है, इसे पढ़ाने के लिए अर्ह विषय विशेषज्ञ नहीं मिल पाए। जबकि जर्मन भाषा में पद स्वीकृत नहीं है। ये पाठ्यक्रम वर्ष 1958 से संचालित हैं और नियमित पाठ्यक्रम हैं। पहली बार पाठ्यक्रम में विषय विशेषज्ञ (इससे पहले संविदा शिक्षक) की तैनाती के लिए स्वीकृत पदों को देखा जा रहा है। प्रति वर्ष विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रमों में 200-225 छात्र-छात्राओं का पंजीकरण होता रहा है।
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एमए फ्रेंच सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम है। इसको गत सत्र में ही शुरू किया गया। 15 सीटें हैं, चार सेमेस्टर का कोर्स है। तृतीय सेमेस्टर में 13 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। पाठ्यक्रम में पढ़ाने के लिए विषय विशेषज्ञों के साक्षात्कार हुए थे। पाठ्यक्रम में स्वीकृत पद न होने से विषय विशेषज्ञ नहीं दिए गए। इस पाठ्यक्रम के संचालन के संबंध में समिति ने वित्तीय औचित्य न होने की रिपोर्ट दी है। इससे विषय विशेषज्ञ मिलने की राह और मुश्किल हो गई है। छात्र-छात्राएं पढ़ाई शुरू न होने से परेशान हैं। लगातार संस्थान के निदेशक से संपर्क कर रहे हैं।
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केएमआई के निदेशक व विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर का कहना है कि प्रभारी कुलपति के आने पर एमए फ्रेंच के छात्रों का विषय रखा जाएगा। उनसे एक विषय विशेषज्ञ रखे जाने का अनुरोध किया जाएगा। जिससे कोर्स पूरा कराया जा सके। उम्मीद है कि इसके लिए स्वीकृति मिल जाएगी। एमए फ्रेंच प्रथम वर्ष में 12 छात्रों का प्रवेश लिया गया है, यदि इसके संचालन की स्थिति नहीं बनती तो छात्रों की फीस वापस कर दी जाएगी।
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जर्मन और रशियन भाषा के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं लिया गया है। रशियन भाषा में एक पद स्वीकृत है, इसे पढ़ाने के लिए अर्ह विषय विशेषज्ञ नहीं मिल पाए। जबकि जर्मन भाषा में पद स्वीकृत नहीं है। ये पाठ्यक्रम वर्ष 1958 से संचालित हैं और नियमित पाठ्यक्रम हैं। पहली बार पाठ्यक्रम में विषय विशेषज्ञ (इससे पहले संविदा शिक्षक) की तैनाती के लिए स्वीकृत पदों को देखा जा रहा है। प्रति वर्ष विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रमों में 200-225 छात्र-छात्राओं का पंजीकरण होता रहा है।