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आगराः 16 रोहिंग्या मुस्लिमों को मिली क्लीन चिट, बांग्लादेशियों पर जांच का घेरा

Thu, 11 Oct 2018 12:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 11 Oct 2018 12:23 AM IST
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UNHCR verifies refugee card of Rohingya Muslims
Rohingya

हिरासत में लेकर छोड़े गए सभी 16 रोहिंग्या मुस्लिमों को क्लीन चिट मिल गई है। खुफिया एजेंसियों ने विशेष टीम दिल्ली भेजकर यूनाइटेड नेशन हाई कमीशन फॉर रिफ्यूजी (यूएनएचसीएफआर) से उनके शरणार्थी कार्ड का सत्यापन कराया है। दूसरी ओर रुनकता में इनके पास ही रह रहे बांग्लादेशी फंस गए हैं, उनके बारे में जांच शुरू की गई है।

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फोर्ट स्टेशन से पकड़े गए सभी रोहिंग्या मुस्लिमों के शरणार्थी कार्ड में सभी की जन्म की तिथि एक जनवरी है। चाहे पांच साल का बच्चा हो या 70 साल का बुजुर्ग, पुरुष हो या महिला। इस पर भी यूएनएचसीएफआर में बात की गई। वहां से बताया कि रोहिंग्या अपने जन्म की तारीख नहीं बता पा रहे थे। केवल जन्म का वर्ष बताया था। इस कारण तारीख एक और महीना जनवरी लिखा गया। बताया कि सभी कार्ड यूएनएचसीएफआर ने ही जारी किए हैं। सीओ एलआईयू हृदेश कठेरिया ने बताया कि जांच टीम सत्यापन कर लौट आई है।
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उधर यह भी जानकारी मिली है कि रुनकता में रोहिंग्या के बराबर में ही जो लोग खुद को रोहिंग्या बताकर रह रहे हैं, उनमें से कई बांग्लादेशी हैं। खुफिया एजेंसियां इनके बारे में पड़ताल कर रही हैं। इनके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। ये लोग कूड़ा बीनने का काम करते हैं। 
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बांग्लादेशी नागरिकों ने बनवा लिए आधार कार्ड
रुनकता और एत्माद्दौला में रह रहे कई बांग्लादेशी नागरिकों ने दलालों के माध्यम से अपने आधार कार्ड बनवा लिए हैं। खुफिया पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ये कार्ड कैसे बने हैं? इन लोगों ने खुद को पश्चिमी बंगाल का नागरिक बताया है, जबकि ये रहने वाले हैं बांग्लादेश के। रुनकता में कूड़ा बीनने वाले इन बांग्लादेशियों में से एक ने तो 3.5 लाख में प्लॉट भी खरीद लिया है। कई बांग्लादेशी तो पासपोर्ट तक बनवा चुके हैं। पिछले साल यमुना पार में जाली नोटों के धंधे में पकड़ी गई फातिमा उर्फ लीची के पास भी पासपोर्ट था। वह मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है।

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