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अनलॉकः जब काम पर लौटे तो पता लगा बेरोजगार हैं...मालिक ने घर से भी निकला, डीएम दफ्तर में आईं शिकायतें

Thu, 10 Sep 2020 12:07 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 10 Sep 2020 12:07 PM IST
सार

कलक्ट्रेट में इसी तरह की रोज आठ से दस शिकायतें आ रही हैं। इनके अलावा जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से 2 अगस्त से 8 सितंबर तक श्रम विभाग को जांच के लिए 42 शिकायत मिली हैं। अनलॉक में लोग काम पर पहुंचे तो उन्हें फिर से रखा नहीं गया।

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Unemployed In Unlock Owner Out From Factory Complaint To Dm Office
फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

लॉकडाउन खत्म होने के बाद जब काम पर लौटे तो पता लगा कि अब वे बेरोजगार हैं। काम न होने के कारण किराया नहीं दे पाए तो मकान मालिक ने घर खाली करा लिया। कलक्ट्रेट में इसी तरह की रोज आठ से दस शिकायतें आ रही हैं। इनके अलावा जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से 2 अगस्त से 8 सितंबर तक श्रम विभाग को जांच के लिए 42 शिकायत मिली हैं। अनलॉक में लोग काम पर पहुंचे तो उन्हें फिर से रखा नहीं गया।
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छह माह का किराया नहीं दे पाया तो घर खाली करा लिया
विनोद पुत्र रमेश चंद बेलदार है। गैलाना में किराए के मकान में पत्नी व तीन बच्चों के साथ रहता था। मार्च से काम नहीं मिला। छह माह का किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने मारपीट कर पांच सितंबर को घर से निकाल दिया। अब डीएम से शिकायत की। थाना प्रभारी सिकंदरा को जांच दी गई है।
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वेतन दिया नहीं, फैक्टरी से निकाल दिया
रमेश ढल पुत्र जगदीश पाल शास्त्रीपुरम निवासी हैं। अगस्त 2013 से अरतौनी स्थित जूता फैक्टरी में क्वालिटी सुपरवाइजर काम करते थे। मार्च 2020 तक उन्हें वेतन मिला, फिर लॉकडाउन के बाद जून में फैक्टरी खुलने पर उन्हें दोबारा नहीं रखा। मार्च से जून तक का वेतन नहीं दिया। शिकायत पर अपर नगर मजिस्ट्रेट ने उपश्रमायुक्त को जांच के आदेश दिए हैं।
 

रेस्तरां खुलने पर काम पर नहीं रखा
सतीश चंद पुत्र सुरेश चंद ताजगंज निवासी है। बेहद गरीबी की हालत है। रेस्तरां में सफाई कार्य करते थे। मार्च में लॉकडाउन के बाद रेस्तरां बंद हो गए। रेस्तरां स्वामी ने पांच माह का वेतन नहीं दिया। रेस्तरां खुलने के बाद उन्हें दोबारा काम पर नहीं लिया गया। शिकायत पर एडीएम वित्त एवं राजस्व ने उप श्रमायुक्त को जांच के आदेश दिए हैं।

नौकरी से निकालना गलत, कोई और विकल्प हो : डीएम
आर्थिक गतिविधियां सभी जगह प्रभावित हुई हैं। ऐसे में किसी कर्मचारी को कोई नियोक्ता निकालता है तो यह गलत है। नियोक्ताओं की व्यवहारिक दिक्कतें हैं, लेकिन उन्हें कर्मचारी को निकालने की जगह और दूसरे विकल्प सोचने चाहिए। - प्रभु एन सिंह, जिला मजिस्ट्रेट

श्रम विभाग को जांच
लोगों को काम से निकालने, आर्थिक तंगी और वेतन नहीं मिलने की रोज 8 से 10 शिकायत आ रही हैं। श्रम विभाग से मामलों की जांच करा रहे हैं। - डॉ. प्रभाकांत अवस्थी, एडीएम सिटी
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