घर लौटी खुशियां: यूक्रेन से मथुरा के चार बच्चे सकुशल वापस आए, परिजनों के छलके खुशी के आंसू
युद्धग्रस्त यूक्रेन में हालात बेहद खराब हो गए हैं। इन हालातों के बीच से मथुरा के चार छात्र-छात्राएं सकुशल घर वापस आ गए हैं। अपने बच्चों को देखते परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूक्रेन से मथुरा के चार छात्र-छात्राएं सकुशल घर वापस आ गए हैं। बच्चों के घर लौटते ही परिजनों के खुशी के आंसू छलक गए। बच्चो के घर वापस आने पर परिजनों ने मिष्ठान वितरण किया। यूक्रेन से लौटे छात्रों ने वहां की स्थिति के बारे में बताया तो लोग भी सहम गए। छात्रों ने कहा कि यूक्रेन में लगातार बमबारी हो रही थी, हर वक्त हमले का डर रहता था।
बरसाना के सात चौक निवासी जगदीश गोयल की पुत्री राधिका गोयल यूक्रेन के इवानो शहर से लौटी है। चार दिन युद्ध में फंसे होने के बाद राधिका सोमवार को पैतृक गांव पहुंची। यहां सभी ने बेटी को गले लगा लिया। आसपास के लोगों ने बेटी का स्वागत किया। बेटी को गले लगाते ही माता-पिता के आंसू खुशी से छलक उठे।
राधिका ने बताई आंखों देखी
राधिका ने बताया कि युद्ध शुरू होने पर सभी छात्र घबरा गए थे। लग रहा था कि अब यहां से निकल नहीं पाएंगे। हॉस्टल में रहने वाले जिले के सभी सात छात्रों ने युद्ध होने के साथ ही एक माह का राशन एकत्र कर लिया था। उसके बाद हमारे सभी पैसे खर्च हो गए। भारत सरकार की मदद से हम निकलने में कामयाब रहे। हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बहुत काम आया।
ये छात्र अभी फंसे हुए हैं
सौंख पुन्नाथोक निवासी अशोक कुमार का बेटा मनीष कुमार यूक्रेन के सूमी शहर में फंसा है। वह पल-पल की जानकारी अपने परिजनों को वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दे रहा है। वहां की स्थिति को देखते हुए मनीष के पिता अशोक कुमार सोमवार को दिल्ली विदेश मंत्रालय पहुंचे। यहां उन्हें अपनी समस्या हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराने को कहा गया।छात्र मनीष ने बताया कि भारतीय दूतावास के माध्यम से उन्होंने भारत जाने के लिए आवेदन कर दिया है। आसपास के शहरों के छात्रों को भी सूमी यूनिवर्सिटी में एकत्रित कर लिया है। फिलहाल यहां गोलाबारी बंद है। भोजन के पर्याप्त प्रबंध कर दिए गए हैं। बताया कि जल्द ही दूतावास भारत वापस जाने वाले छात्रों की सूची जारी कर देगा।
कस्बा राया के रामलीला मैदान निवासी डॉ. राजकुमार सिंघल के पुत्र निखिल सिंघल और रेतिया बाजार निवासी डॉ. संजय वर्मा का पुत्र रितिक वर्मा भी अभी यूक्रेन में फंसे हैं। निखिल ने बताया कि करीब 1500 छात्र-छात्राएं यहां बंकरों में फंसे हैं। इससे परिजन परेशान हैं। निखिल की मां मंजू रानी, दादी नर्मदा देवी, चाचा रामकुमार सिंघल, रेखा आदि सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।