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Ukraine Russia War: आगरा के देवेंद्र ने बताया- कैसे हैं हालात, वीडियो भेज दिखाया खौफनाक मंजर

Sat, 26 Feb 2022 02:18 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sat, 26 Feb 2022 02:18 PM IST
सार

आगरा के बमरौली कटारा निवासी छात्र देवेंद्र सिंह ने एक वीडियो भेजा है। वह इस वक्त यूक्रेन की टीम में फंसे हुए हैं। उनका कहना है या स्थिति बहुत बिगड़ गई है और अभी तक कई फॉर्म भरवा लिए गए लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया है।

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Ukraine Russia War: Devendra of Agra told how the situation is, sent a video and showed a scary scene
देवेंद्र सिंह के हॉस्टल के बाहर लाइन में खड़े यूक्रेनवासी - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

यूक्रेन में फंसे आगरा के छात्र-छात्राओं की चिंता उनके परिजनों को सता रही है। खैरखबर के लिए बार-बार फोन कर रहे हैं। नजरें भी टीवी पर जमी हुई हैं। बस ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके बच्चे और परिजन यूक्रेन में सुरक्षित हों और जल्द घर वापसी हो। परिजनों की हालत यह है कि एक-एक पल भारी पड़ रहा है। दिल्ली के हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर परिजन यही पूछ रहे हैं कि कब फ्लाइट जाएगी और उनके बच्चों को लेकर भारत आएगी।

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आगरा के बमरौली कटारा निवासी छात्र देवेंद्र सिंह ने एक वीडियो भेजा है। वह इस वक्त यूक्रेन की कीव शहर में फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि यहां स्थिति बहुत बिगड़ गई है और अभी तक कई फॉर्म भरवा लिए गए लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया है। खाना भी पर्याप्त नहीं है। ज्यादा से ज्यादा पानी बचाने के लिए उसे कप, कटोरी में भरकर रख रहे हैं। किसी भी समय बिजली-पानी की आपूर्ति बंद हो सकती है। उन्होंने बताया कि पांच मिनट पहले ही उनके सर के ऊपर से दो लड़ाकू विमान गुजरे थे तो लगा कि ये जीवन का अंतिम पल है।
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दर्द: बेटी से कहा है कि छोटे बैग में बेहद जरूरी सामान लेकर तैयार रहो

शास्त्रीपुरम निवासी संतोष सिंह ने बताया कि मेरी बेटी श्रेया सिंह यूक्रेन में डॉक्टरी की पढ़ाई पढ़ रही है। वह इवानो फ्रेंक्विक्स नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी में एमबीबीएस चतुर्थ साल की छात्रा हैं। शुक्रवार की दोपहर बेटी से फोन पर बात हुई तो उसने बताया कि मम्मी, भारतीय दूतावास से उनको संदेश मिला है कि एक छोटे बैग में बेहद ही जरूरी सामान रखकर तैयार रहें। पौलेंड या फिर हंगरी के रास्ते से भारत लाया जाएगा। बेटी की चिंता खाई जा रही है। दिल्ली हेल्पलाइन नंबरों पर भी फोन कर जानकारी कर रही हूं। 

दास्तां: शुक्र है कि युद्ध से पहले ही यूक्रेन छोड़कर घर आ गया

विभव नगर के आदित्य शुक्ला ने बताया कि करीब बीते 10-15 दिन से ही यूक्रेन में दहशत का माहौल था। युद्ध की आशंका पर उन्होंने घर जाना ही उचित समझा। टिकट कराई और 20 फरवरी को वह यूक्रेन से भारत आए। अब समाचार पत्र और टीवी चैनलों पर वहां का हाल देखकर यही लगता है कि शुक्र है कि वह युद्ध से पहले आ गए। इनके पिता आरके शुक्ला और मां अर्चना शुक्ला को बेटे के घर आने पर राहत मिली है। बेटा ओडेसा नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी से एमबीबीएस चतुर्थ साल का छात्र है। उसके कई दोस्त पहले ही आ गए हैं।

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