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दया याचिका पर दो कैदियों को मिली रिहाई, एक नोएडा का पूर्व सिपाही और दूसरा बुलंदशहर का है
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Updated Sun, 04 Nov 2018 05:33 AM IST
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कैदी
- फोटो : फाइल फोटो
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केंद्रीय कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो कैदियों को शनिवार को रिहाई मिल गई। उनकी दया याचिका पर राज्यपाल ने सुनवाई की थी। एक नोएडा का पूर्व सिपाही है तो दूसरा बुलंदशहर का रहने वाला है।
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डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने बताया कि नोएडा निवासी प्रताप नागर को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वह पुलिस में सिपाही था। फर्जी मुठभेड़ के मामले में उसे जेल भेजा गया था। वह तकरीबन 25 साल से जेल में बंद था। अब 70 साल की उम्र है। उन्होंने दया याचिका दाखिल की थी। याचिका मंजूर होने पर प्रताप नागर को रिहाई मिल गई। वहीं, बुलंदशहर निवासी वीरेंद्र सिंह को भी हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वह केंद्रीय कारागार में कई साल से बंद था। उन्होंने रिहाई के लिए शासन में अपील की थी। इसके बाद राज्यपाल से अपील की। राज्यपाल ने दया याचिका मंजूर कर दी। शनिवार शाम को दोनों को रिहा कर दिया गया।
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बागपत के माया त्यागी कांड में आया था नाम सामने
जेल में चर्चा है कि बागपत के माया त्यागी कांड में प्रताप नागर का सामने आया था। 18 जून 1980 को गाजियाबाद निवासी ईश्वर त्यागी बागपत के पास एक शादी में शामिल होने आया था। बागपत में उनकी कार पंक्चर हो गई। कार ठीक करने के दौरान बागपत में तैनात एक एसआई नरेंद्र सिंह से ईश्वर त्यागी और अन्य की कहासुनी हो गई। तब तो वह चला गया। बाद में नरेंद्र सिंह अपने अन्य पुलिस कर्मियों के साथ आया। उसने ईश्वर त्यागी और उनके दो साथियों की हत्या कर दी थी। इस मामले के बाद जमकर बवाल हुआ था। लोग सरकार के खिलाफ हो गए थे। सरकार को न्यायिक जांच और सीबीसीआईडी जांच का आदेश देना पड़ा था, जिसमें दस से ज्यादा पुलिस कर्मियों को दोषी पाया गया था। कोर्ट ने छह पुलिसकर्मियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
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