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जमीन छीनने के खिलाफ छेड़ दो असहयोग आंदोलन : जयंत
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 21 Mar 2015 02:12 AM IST
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बढ़ी हुई दाढ़ी, चेहरे पर गंभीरता। बाबा का नाम और यादें। जैंगारा के गांधी स्मारक इंटर कालेज मैदान में रालोद महासचिव जयंत चौधरी का लहजा और तेवर बदले हुए थे। महज 11 महीने पहले जाट लैंड पर आ चुके जयंत ने जाट आरक्षण के खारिज होने और किसानों की जमीन के अधिग्रहण के मुद्दों को अपने बदले हुए अंदाज में धार दी। सहारनपुर से जनजागरण यात्रा निकाल रहे जयंत ने जैंगारा की सभा में बार-बार कहा कि वह वोट नहीं, जंग में साथ मांगने आए हैं। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ बस एक हो जाइए और केंद्र सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू करना होगा।
रालोद महासचिव 10 मार्च से सहारनपुर से जनजागरण यात्रा पर निकले हैं। शुक्रवार को बिसावर से वह आगरा आए और जैंगारा में किसानों से रूबरू हुए। बारिश से बर्बाद हुए किसान अपने खेतों में बची हुई फसल की चिंता में थे, सो मैदान पर अपेक्षाकृत भीड़ भी कम थी। जयंत ने इसे भांपा और शुरूआत अच्छे दिनों के सवाल से की। जवाब आया कि अच्छे दिन तो नहीं आए। जयंत ने इसके बाद मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि 119 साल पुराने कानून को 2013 में उन्होंने ही बदलवाया था, लेकिन मोदी सरकार ने 9 महीने में ही बदल दिया। किसान बर्बाद है, लेकिन मुआवजा न देकर जमीनें छीनी जा रही हैं। बैंकों का 95 हजार करोड़ रुपया महज 30 उद्योगपतियों ने दबा रखा है, लेकिन किसानों के मुआवजे को 200 करोड़ ही निकले।
जाट आरक्षण पर फैसला संवैधानिक संकट
जाट आरक्षण पर हवा के रुख संग चलते हुए जयंत ने कहा कि साल भर पहले सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया, वह एक साल बाद कैसे पलट गया। यह संवैधानिक संकट के हालात हैं। किसानों के बेटों को रोजगार चाहिए। फसल खराब हो गई तो मुआवजे में 15 रुपये का चेक मिलेगा। इससे बेटों को कैसे पढ़ाओगे। केंद्र सरकार ने कोर्ट में कमजोर पैरवी की है। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट जरूरी नहीं।
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आगरा की छू ली नब्ज
रालोद महासचिव ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ अपनी जंग में आगरा के किसानों को साथ लेते हुए उनकी नब्ज को तब छू लिया, जब उन्होंने लेदर पार्क, थीम पार्क, यमुना एक्सप्रेस वे, लखनऊ एक्सप्रेस वे के नाम पर जमीन अधिग्रहण का मुद्दा उठाया। जयंत ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस वे ने कई किसानों की जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया। सर्विस लेन बनाई नहीं तो किसान अपने ही खेत के उस पार के हिस्से में कैसे पहुंचता है। रेलवे, रक्षा मंत्रालय, यूपीएसआईडीसी पर जमीनें बहुत हैं। सरकार उन खाली जमीनों पर प्रोजेक्ट क्यों नहीं लाती।
मंच पर इनकी मौजूदगी
जिलाध्यक्ष बृजेश चाहर, मंडलाध्यक्ष केदार सिंह चौहान, मालती चौधरी, जयपाल सिंह खिरवार, पूर्व विधायक उम्मेद सिंह, अंगद सिंह धारिया, फौरन सिंह इंदौलिया, नेत्रपाल सिंह, देव चौधरी, सुरेंद्र रावत, गीता चौधरी, उदय सिंह, रूमाल सिंह, उदय सिंह, राजेंद्र सिंह, ओम प्रकाश, बिजेंद्र सिंह, राकेश चौधरी, संजय फौजदार समेत रालोद कार्यकर्ता मौजद रहे।
जिंदाबाद के कम, मुर्दाबाद के नारे ज्यादा
जनजागरण सभा में रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी के पहुंचते ही जिंदाबाद के नारे लगे, लेकिन उसके बीच में ही नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद के नारे गूंजने शुरू हुए तो जयंत भी भीड़ की ओर देखकर मुस्कराए।
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रालोद महासचिव 10 मार्च से सहारनपुर से जनजागरण यात्रा पर निकले हैं। शुक्रवार को बिसावर से वह आगरा आए और जैंगारा में किसानों से रूबरू हुए। बारिश से बर्बाद हुए किसान अपने खेतों में बची हुई फसल की चिंता में थे, सो मैदान पर अपेक्षाकृत भीड़ भी कम थी। जयंत ने इसे भांपा और शुरूआत अच्छे दिनों के सवाल से की। जवाब आया कि अच्छे दिन तो नहीं आए। जयंत ने इसके बाद मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि 119 साल पुराने कानून को 2013 में उन्होंने ही बदलवाया था, लेकिन मोदी सरकार ने 9 महीने में ही बदल दिया। किसान बर्बाद है, लेकिन मुआवजा न देकर जमीनें छीनी जा रही हैं। बैंकों का 95 हजार करोड़ रुपया महज 30 उद्योगपतियों ने दबा रखा है, लेकिन किसानों के मुआवजे को 200 करोड़ ही निकले।
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जाट आरक्षण पर फैसला संवैधानिक संकट
जाट आरक्षण पर हवा के रुख संग चलते हुए जयंत ने कहा कि साल भर पहले सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया, वह एक साल बाद कैसे पलट गया। यह संवैधानिक संकट के हालात हैं। किसानों के बेटों को रोजगार चाहिए। फसल खराब हो गई तो मुआवजे में 15 रुपये का चेक मिलेगा। इससे बेटों को कैसे पढ़ाओगे। केंद्र सरकार ने कोर्ट में कमजोर पैरवी की है। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट जरूरी नहीं।
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आगरा की छू ली नब्ज
रालोद महासचिव ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ अपनी जंग में आगरा के किसानों को साथ लेते हुए उनकी नब्ज को तब छू लिया, जब उन्होंने लेदर पार्क, थीम पार्क, यमुना एक्सप्रेस वे, लखनऊ एक्सप्रेस वे के नाम पर जमीन अधिग्रहण का मुद्दा उठाया। जयंत ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस वे ने कई किसानों की जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया। सर्विस लेन बनाई नहीं तो किसान अपने ही खेत के उस पार के हिस्से में कैसे पहुंचता है। रेलवे, रक्षा मंत्रालय, यूपीएसआईडीसी पर जमीनें बहुत हैं। सरकार उन खाली जमीनों पर प्रोजेक्ट क्यों नहीं लाती।
मंच पर इनकी मौजूदगी
जिलाध्यक्ष बृजेश चाहर, मंडलाध्यक्ष केदार सिंह चौहान, मालती चौधरी, जयपाल सिंह खिरवार, पूर्व विधायक उम्मेद सिंह, अंगद सिंह धारिया, फौरन सिंह इंदौलिया, नेत्रपाल सिंह, देव चौधरी, सुरेंद्र रावत, गीता चौधरी, उदय सिंह, रूमाल सिंह, उदय सिंह, राजेंद्र सिंह, ओम प्रकाश, बिजेंद्र सिंह, राकेश चौधरी, संजय फौजदार समेत रालोद कार्यकर्ता मौजद रहे।
जिंदाबाद के कम, मुर्दाबाद के नारे ज्यादा
जनजागरण सभा में रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी के पहुंचते ही जिंदाबाद के नारे लगे, लेकिन उसके बीच में ही नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद के नारे गूंजने शुरू हुए तो जयंत भी भीड़ की ओर देखकर मुस्कराए।