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Agra News: दो महीने बीते नहीं उपलब्ध हो सकीं जरूरी किताबें
Sat, 01 Jun 2024 12:35 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sat, 01 Jun 2024 12:35 AM IST
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मैनपुरी। बेसिक शिक्षा विभाग में नवीन सत्र के दो महीने बीत चुके हैं लेकिन अभी तक कुछ जरूरी विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसको लेकर न केवल छात्र-छात्राएं चिंतित हैं बल्कि शिक्षक और अभिभावक भी चिंतित हैं। छात्र-छात्राओं को किताबें न होने के कारण संबंधित विषयों का गृह कार्य भी नहीं दिया जा सका है।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से एक अप्रैल से नवीन शिक्षा सत्र का शुभारंभ किया गया है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि सत्र शुभांरभ के साथ ही छात्र-छात्राओं को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें भी उपलब्ध करा दी जाएं, लेकिन अभी तक जिले में इतिहास, भूगोल, पर्यावरण और स्काउट गाइड सहित कई मुख्य विषयों की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसके चलते परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को ग्रीष्मकालीन अवकाश में संबंधित विषयों का गृह कार्य नहीं दिया जा सका है।
एक जुलाई को ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल खुलेंगे तो जिन विषयों की किताबें छात्र-छात्राओं के पास नहीं है उन विषयों का तीन महीने का कोर्स प्रभावित होगा। आखिर इस तीन महीने के कोर्स को छात्र आने वाले समय में किस प्रकार से पूरा कर सकेंगे। शिक्षकों के सामने भी कोर्स पूरा कराने और छात्रों को बेहतर शिक्षा देने की चुनौती होगी। प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव का कहना है कि यदि कान्वेंट से बराबरी करनी है तो पहले व्यवस्थाएं उनकी जैसी करनी होंगी। उनका कहना था कि तीन-तीन महीने बाद किताबें मिलेंगी तो कैसे कान्वेंट स्कूलों के बच्चों से बराबरी की जा सकेगी।
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बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से एक अप्रैल से नवीन शिक्षा सत्र का शुभारंभ किया गया है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि सत्र शुभांरभ के साथ ही छात्र-छात्राओं को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें भी उपलब्ध करा दी जाएं, लेकिन अभी तक जिले में इतिहास, भूगोल, पर्यावरण और स्काउट गाइड सहित कई मुख्य विषयों की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसके चलते परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को ग्रीष्मकालीन अवकाश में संबंधित विषयों का गृह कार्य नहीं दिया जा सका है।
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एक जुलाई को ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल खुलेंगे तो जिन विषयों की किताबें छात्र-छात्राओं के पास नहीं है उन विषयों का तीन महीने का कोर्स प्रभावित होगा। आखिर इस तीन महीने के कोर्स को छात्र आने वाले समय में किस प्रकार से पूरा कर सकेंगे। शिक्षकों के सामने भी कोर्स पूरा कराने और छात्रों को बेहतर शिक्षा देने की चुनौती होगी। प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव का कहना है कि यदि कान्वेंट से बराबरी करनी है तो पहले व्यवस्थाएं उनकी जैसी करनी होंगी। उनका कहना था कि तीन-तीन महीने बाद किताबें मिलेंगी तो कैसे कान्वेंट स्कूलों के बच्चों से बराबरी की जा सकेगी।
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