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सरकारी मेडिकल कॉलेज में नहीं मिला वेंटिलेटर, बिना इलाज के मासूम को लौटाया, तोड़ा दम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 13 Nov 2018 01:10 PM IST
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इलाज के अभाव में बच्ची की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में इलाज न मिलने पर निजी अस्पताल ले जाते वक्त दो महीने की मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। अब इस मामले में कॉलेज प्राचार्य ने जांच रिपोर्ट मांगी है।
जगदीशपुरा निवासी ज्योति पत्नी सागर की दो महीने की बेटी को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिजन रविवार को बच्ची को एसएन इमरजेंसी ले गए। यहां बच्ची को भर्ती तो किया गया लेकिन काफी जद्दोजहद के बाद यहां से बाल रोग विभाग में शिफ्ट कर दिया।
मां ज्योति के अनुसार, बच्ची को सांस में तकलीफ थी। वार्ड में शाम को छह बजे तक वेंटिलेटर नहीं दिया गया। हालत और बिगड़ने लगी। जब डॉक्टरों से कहा तो उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर नहीं है, बच्ची की जान बचानी है तो प्राइवेट अस्पताल ले जाओ।
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जगदीशपुरा निवासी ज्योति पत्नी सागर की दो महीने की बेटी को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिजन रविवार को बच्ची को एसएन इमरजेंसी ले गए। यहां बच्ची को भर्ती तो किया गया लेकिन काफी जद्दोजहद के बाद यहां से बाल रोग विभाग में शिफ्ट कर दिया।
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मां ज्योति के अनुसार, बच्ची को सांस में तकलीफ थी। वार्ड में शाम को छह बजे तक वेंटिलेटर नहीं दिया गया। हालत और बिगड़ने लगी। जब डॉक्टरों से कहा तो उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर नहीं है, बच्ची की जान बचानी है तो प्राइवेट अस्पताल ले जाओ।
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लिफ्ट में बच्ची की मौत
ज्योति अपनी बहन गायत्री के साथ बेटी को लेकर कमला नगर स्थित निजी अस्पताल गई। यहां हालत गंभीर बताते हुए दिल्ली गेट स्थित अस्पताल ले जाने को कहा। अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लिफ्ट से ऊपर जा रहे थे, कि बीच में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया।
डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने मृत घोषित कर दिया। गायत्री ने बताया कि बच्ची का पिता ऑटो चलाता है, इतने ही रुपये होते तो पहले ही प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराते। ऐसे डॉक्टरों पर कार्रवाई करें।
प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि बच्ची के इलाज में क्या लापरवाही रही, वेंटिलेटर क्यों नहीं मिला, इसकी रिपोर्ट तलब की गई है। उधर, डॉक्टरों की लापरवाही से मरने वाली बच्ची की मां का रो रोकर बुरा हाल है।
डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने मृत घोषित कर दिया। गायत्री ने बताया कि बच्ची का पिता ऑटो चलाता है, इतने ही रुपये होते तो पहले ही प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराते। ऐसे डॉक्टरों पर कार्रवाई करें।
प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि बच्ची के इलाज में क्या लापरवाही रही, वेंटिलेटर क्यों नहीं मिला, इसकी रिपोर्ट तलब की गई है। उधर, डॉक्टरों की लापरवाही से मरने वाली बच्ची की मां का रो रोकर बुरा हाल है।