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लॉकडाउनः दो महीने के मासूम को सीने से लगाए सिसकती रही मां, नहीं मिला इलाज, मौत
Wed, 13 May 2020 08:09 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 13 May 2020 08:09 AM IST
सार
जूता की फैक्टरी में काम करता है पिता
पैदल निकला बच्चे के इलाज के लिए
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विस्तार
बिचपुरी ब्लाक के टपरा नगला आनंदी में इलाज न मिलने से मासूम की मौत हो गई है। इलाज के लिए परिजन पूरी रात भटकते रहे। क्लीनिक-अस्पताल बंद मिले। मंगलवार की सुबह एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी के लिए पैदल चल दिए लेकिन रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
मलपुरा थाने के टपरा नगला आनंदी में सुरेंद्र सिंह जूते के कारखाने में काम करता है। उसके दो महीने के बेटे मंगल को सोमवार की शाम को पेट में दर्द हुआ। सुरेंद्र ने बताया कि बच्चे को पेशाब भी नहीं आ रहा था। रात में धनौली समेत आसपास भटकते रहे लेकिन अस्पताल बंद होने से इलाज नहीं मिला। ऐसे में सुबह बच्चे को पैदल लेकर आगरा में एसएन के लिए चल दिए।
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रास्ते में पुलिस मिली तो एंबुलेंस मंगवाने के लिए कहा। पुलिसकर्मियों ने पैदल लेकर ही जाने के लिए कह दिया। पंचकुइयां तक पहुंच गए। यहां बच्चे की
मौत हो गई। रोते-बिलखते परिजन घर लौट आए और बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वह किराए पर रहता है, इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे, सात बच्चे हैं। सभी अस्पताल बंद मिले। समय पर इलाज मिल जाता तो बच्चे की जान बच जाती।
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मलपुरा थाने के टपरा नगला आनंदी में सुरेंद्र सिंह जूते के कारखाने में काम करता है। उसके दो महीने के बेटे मंगल को सोमवार की शाम को पेट में दर्द हुआ। सुरेंद्र ने बताया कि बच्चे को पेशाब भी नहीं आ रहा था। रात में धनौली समेत आसपास भटकते रहे लेकिन अस्पताल बंद होने से इलाज नहीं मिला। ऐसे में सुबह बच्चे को पैदल लेकर आगरा में एसएन के लिए चल दिए।
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रास्ते में पुलिस मिली तो एंबुलेंस मंगवाने के लिए कहा। पुलिसकर्मियों ने पैदल लेकर ही जाने के लिए कह दिया। पंचकुइयां तक पहुंच गए। यहां बच्चे की
मौत हो गई। रोते-बिलखते परिजन घर लौट आए और बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वह किराए पर रहता है, इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे, सात बच्चे हैं। सभी अस्पताल बंद मिले। समय पर इलाज मिल जाता तो बच्चे की जान बच जाती।
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खाने-पीने तक के लाले
सुरेंद्र सिंह जूता की फैक्टरी में काम करता है। लॉकडाउन के चलते फैक्टरी बंद है। उसने बताया कि घर में खाने-पीने के भी लाले हैं। राशन के चावल मिले हैं, जिनसे ही गुजारा किया जा रहा है। ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह का कहना है कि लेखपाल को सुरेंद्र सिंह के यहां राशन पहुंचाने के लिए आवश्यक कागजात भेज दिए हैं। हालांकि उसको अभी तक राशन नहीं मिला है।
सुरेंद्र सिंह जूता की फैक्टरी में काम करता है। लॉकडाउन के चलते फैक्टरी बंद है। उसने बताया कि घर में खाने-पीने के भी लाले हैं। राशन के चावल मिले हैं, जिनसे ही गुजारा किया जा रहा है। ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह का कहना है कि लेखपाल को सुरेंद्र सिंह के यहां राशन पहुंचाने के लिए आवश्यक कागजात भेज दिए हैं। हालांकि उसको अभी तक राशन नहीं मिला है।