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मिसाल: माटी बनने से पहले दूसरों की दुनिया कर गए रोशन, आगरा में 200 महादानी कर चुके हैं नेत्रदान

Fri, 29 Apr 2022 04:32 PM IST
मुकेश कुमार धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 29 Apr 2022 04:32 PM IST
सार

आगरा में ऐसे ही 200 महादानी रहे, जो माटी बनने से पहले दूसरों की दुनिया रोशन कर गए। इनकी आखों से आज कई लोग दुनिया देख रहे हैं। 

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two hundred people have donated eyes in Agr
नेत्रदान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुछ विरले ही हैं जो दुनिया से विदा होकर भी औरों का भला कर गए। आगरा में ऐसे ही 200 महादानी रहे, जो माटी बनने से पहले दूसरों की दुनिया रोशन कर गए। इनके नेत्रदान से मिली 400 कॉनिया में से 224 मरीजों के जीवन से अंधेरा मिट गया। अभी एसएन मेडिकल कॉलेज की नेत्रबैंक में कॉनिया के लिए 60 मरीजों की वेटिंग है।

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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की नेत्र बैंक प्रभारी डॉ. शेफाली मजूमदार ने बताया कि नेत्रदान का प्रकल्प वर्ष 2005 से चल रहा है, लेकिन इसमें गति 2015 से आई। 200 लोगों के नेत्रदान से 400 कॉर्निया प्राप्त हुईं। इनमें से 224 मरीजों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट की, बाकी 176 की गुणवत्ता खराब होने के चलते डॉक्टरी पढ़ाई में उपयोग हो रही हैं। 
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ये कॉर्निया उनको लगाईं, जो पूर्ण नेत्रहीन या आंशिक रूप से ही एक आंख से देख पाते थे। मेडिकल जांच कर 12 से 70 साल तक के मरीजों को कॉर्निया लगा चुके हैं। इससे इनकी दुनिया बदल गई, जीवन से अंधेरा मिट गया।

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नेत्रदान के लिए फोन पर दे सकते हैं जानकारी

एसएन के नेत्रदान काउंसलर दीपक शर्मा ने बताया कि कार्निया के लिए 50-60 मरीजों की वेटिंग रहती है। किसी के निधन के बाद परिजन 9639592894 पर जानकारी दे सकते हैं। टीम घर से कॉर्निया प्राप्त करेगी।आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने कहा कि मंच, हेल्प आगरा, क्षेत्र बजाजा कमेटी से भी कॉर्निया दान के लिए संपर्क कर सकते हैं।

65 साल बाद देख पा रहीं दुनिया

महर्षिपुरम निवासी 70 साल की श्यामा कौर ने बताया कि बीमारी से पांच साल की उम्र में दोनों आंखें खराब हो गईं। एक आंख से मामूली दिखता था, लेकिन मोतियाबिंद से वह भी दिखना बंद हो गया। कॉर्निया लगने से 65 साल बाद दुनिया देख पा रही हूं। 

आंख लगी तो करने लगा कामकाज

मथुरा के 30 साल के गया लाल ने बताया कि चोट से आंख खराब हो गई। कामकाज भी नहीं कर पाता था। एसएन में 2015 में आंख लगी। इससे मेरी दुनिया ही बदल गई। अब सब कुछ नजर आता है। मैं फर्नीचर का कामकाज भी करने लगा हूं।

जिन्होंने आंख दान की उनका आभार

खंदौली की 24 साल की नीशू ने बताया कि चोट से आंख खराब हो गई थी। इससे मन दुखी हो गया। एसएन में इलाज के वक्त कॉर्निया के लिए पंजीकरण कराया। आंख लगने से मेरी दुनिया बदल गई। डॉक्टर और जिन्होंने आंख दान की उनका आभार है।

ये हैं नेत्रदान के प्रहरी

आगरा विकास मंच के संयोजक सुनील कुमार जैन ने बताया कि मंच के दिवंगत संरक्षक अशोक जैन सीए ने 2005 में ये प्रकल्प शुरू किया था। किसी के निधन की जानकारी पर परिजनों को शोकाकुल माहौल में नेत्रदान करवाने के लिए प्रेरित करते हुए जागरूक कर रहे हैं। 

इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं

क्षेत्र बजाजा कमेटी के अध्यक्ष अशोक गोयल ने बताया कि मृतक के सगे-संबंधियों से संपर्क कर नेत्रदान करवाने के लिए कहते हैं। इससे इनकी आंखों से किसी की दुनिया रोशन हो सकेगी। संस्था एसएन के डॉक्टरों के साथ कॉर्निया लाने के लिए वाहन भी भेजती है।

लोग खुद भी कर रहे पहल

हेल्प आगरा के नेत्रदान प्रभारी विजय बंसल ने बताया कि नेत्रदान के लिए सामाजिक संस्थाओं की मदद ली जाती है। गमगीन माहौल में नेत्रदान के लिए प्रेरित करना जटिल है, लेकिन लोग जागरूक हो रहे हैं और स्वत: नेत्रदान के लिए संपर्क भी करने लगे हैं। 

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