{"_id":"6763dfb778bf5c8af7002afa","slug":"two-girls-who-were-taken-away-by-wolves-grew-up-with-wild-animals-found-in-such-a-condition-in-cave-2024-12-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जंगल गर्ल: भेड़िये जिन दो लड़कियों को उठा ले गए...जंगली जानवरों संग पली-बढ़ीं, मासूम बच्चों का करती थीं शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगल गर्ल: भेड़िये जिन दो लड़कियों को उठा ले गए...जंगली जानवरों संग पली-बढ़ीं, मासूम बच्चों का करती थीं शिकार
Thu, 19 Dec 2024 03:55 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संजीव जूरैल, अमर उजाला आर्काइव, आगरा
संजीव जूरैल, अमर उजाला आर्काइव, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 19 Dec 2024 03:55 PM IST
सार
जंगल में भेड़ियों के साथ रहकर पले बढ़े मोंगली को तो जानते ही हैं, लेकिन दो बच्चियों की कहानी भी सामने आई है, जो जंगली जानवरों के साथ रहीं। अमर उजाला के 1981 के अंक में प्रकाशित खबर के अनुसार उड़ीसा के मयूरभंज में भेड़ियों के बीच ये दो बच्चियां मिलीं थीं।
विज्ञापन
भेड़ियों द्वारा पाली गई बच्ची, जो बन गई आदमखोर
- फोटो : AI प्रतीकात्मक
विस्तार
फिल्म और टीवी कार्यक्रमों में भेड़ियों के बीच पले-बढ़े मानव सनीचर मोगली का किरदार चर्चित है। उसके अंतिम दिनों का किस्सा आगरा के अनाथालय से जुड़ा है। लेकिन भेड़ियों के बीच पला बढ़ा मानव सनीचर अकेला नहीं था, पूर्व में भी ऐसी पचास से अधिक घटनाएं हुई हैं जिनमें भेड़ियों ने इंसानी बच्चों का शिकार कर अपनी गुफाओं में पालन पोषण किया और वे उन्हीं की तरह हो गए। उनमें अमला और कमला भी शामिल हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला के 13 सितंबर, 1981 के अंक में प्रकाशित खबर के अनुसार, भेड़ियों द्वारा बच्चों को उठा ले जाने और उन्हें पालने की 50 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जिसमें पहली कहानी ग्वालियर रियासत की है। तत्कालीन ग्वालियर महाराज जीवाजी राव को शिवपुरी के जंगलों में एक आदमखोर औरत के उपद्रव की शिकायत मिली थी, जो औरतों, बच्चों व जानवरों का शिकार करती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
महाराज ने शिकारी मजीद खां को उसके शिकार का आदेश दिया। उसने एक साहसी महिला नाजिमा को सतत बाड़ा गांव के तालाब पर भेजा, जब आदमखोर भेड़िया महिला उसकी शिकार को आई, शिकारी दल ने उसे गोली मार दी। 16 दिसंबर 1940 को उसकी मौत हो गई। उसके शरीर पर जानवरों जैसे बाल थे जिनसे चेहरा और शरीर ढका हुआ था। हाथ और पैरों के नाखून जानवरों की तरह बड़े थे जिनसे शिकार को फाड़ देती थी।
ऐसे ही दूसरी घटना उड़ीसा के मयूरभंज जिले की है। जहां दो लड़कियों अमला और कमला को भेड़ियों ने पाला था। येल यूनिवर्सिटी के बाल मनोविज्ञानी डाॅक्टर गेसेल व डेनवर यूनिवर्सिटी के डाॅक्टर रॉबर्ट जिग्ग के अध्ययन कागजात गैसैल इंस्टीट्यूट न्यू हेवन व सेंट वियल म्यूजियम एल पासो अमेरिका में सुरक्षित हैं। इनके अध्ययन रेवरेंड की डायरी पर आधारित हैं।
रेवरेंड जोसेफ के अनुसार, वह उड़ीसा के मयूरभंज जिले के गांव संथाल गए, तो लोगों ने बताया कि यहां भूत प्रेत के रूप में भेड़िया आते हैं। 10 अक्टूबर, 1880 ग्रामीण रेवरेंड को ग्रामीण प्रेत रूपी भेड़ियों की गुफा पर ले गए, उसकी खुदाई शुरू की। उससे भेड़ियों के दो इंसानी बच्चे निकले जिनके हाथ पैरों पर बड़े-बड़े बाल और नाखून थे, वह भी भेड़ियों के साथ झाड़ियों में जा मिले। संथालों दोनो को मारना चाहते थे, लेकिन रेवरेंड ने उन्हें रोक दिया कि यह प्रेत नहीं इंसानी बच्चे हैं, इन्हें कभी भेड़ियों उठा ले गए थे।
रेवरेंड 17 अक्टूबर, 1880 को भेड़ियों के बीच पल रहें उन इंसानी बच्चों को अपने साथ संथाल से डाक बंगला ले आए। जब उन्हें नहाया तो पता चला कि दोनों छह व तीन साल की बच्ची हैं। रेवरेंड वहां से उन्हें अपने निवास मिदनापुर ले गए। उनका नाम अमला और कमला रखा।
वह उन्हें इंसान की तरह रखने का प्रयास किया, लेकिन वह सब्जी में से केवल गोश्त को खा लेती थी। चूहा, छिपकली व अन्य जीव दिख जाते थे तो उन्हे मार कर खा जाती थी। एक वर्ष बाद अमला बीमार पड़ गई और उसकी माैत हाे गई। बड़ी वाली कमला आखिर कार मनुष्य की तरह चलना सीख गई। कुल 30 शब्द बोलना सीख पाई। उसे टाइफाइड हो गया। 13 नवंबर को उसकी भी मौत हो गई।
कमला को देखने आए थे वायसराय लार्ड लिटन
भेड़ियों के बीच पली कमला की खबर जब लार्ड लिटन को मिली, तो वह रेवरेंड के निवास स्थान मिदनापुर पर उनसे मिलने आए। कमला के बारे में जानकारी ली। वह जंगल से इंसानों के बीच किस तरह जीवन व्यतीत कर रही है।
भेड़ियों के बीच पली कमला की खबर जब लार्ड लिटन को मिली, तो वह रेवरेंड के निवास स्थान मिदनापुर पर उनसे मिलने आए। कमला के बारे में जानकारी ली। वह जंगल से इंसानों के बीच किस तरह जीवन व्यतीत कर रही है।