फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   twenty years ago agra was announced to make a smart city

1999 में हो गई थी इस शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा, लेकिन हालात अब भी जस के तस

Fri, 11 May 2018 04:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Fri, 11 May 2018 04:49 PM IST
विज्ञापन
twenty years ago agra was announced to make a smart city
स्मार्ट सिटी - फोटो : डेमो फोटो
कहते हैं कि ताजमहल के बनने में 20 साल का वक्त लगा था। उस दौर में यह सचमुच लंबा वक्त था, लेकिन वर्तमान में शहर में चल रही सरकारी योजनाओं का हाल देखें तो यह वक्त कम लगता है।
विज्ञापन


पहले स्मार्ट सिटी की बात करते हैं। यह प्रोजेक्ट अभी कागजों से बाहर नहीं निकला है जबकि इसकी कहानी 20 साल पहले शुरू हुई थी। मई 

1999 में भी आगरा सहित कानपुर, इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ, नोएडा, बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव था। तब भी शहरवासी इसी तरह खुश होते थे कि अपना शहर स्मार्ट होने जा रहा है। 
विज्ञापन

twenty years ago agra was announced to make a smart city
स्मार्ट सिटी
हालात अभी वही हैं, खुशी तो बहुत है, पर काम कहीं नजर नहीं आ रहा। अब गंगाजल की बात। गंगा का पानी शहर को मिलेगा, पेयजल संकट खत्म होगा। 

यही उम्मीद तो है लेकिन यह कहानी भी 20 साल से चली आ रही है। तब मुद्दा यह होता था कि अगर गोकुल बैराज को गंगाजल डाउनस्ट्रीम में मिल जाए तो आगरा के लोगों को कुछ अच्छा पानी मिले। 

तत्कालीन मेयर बेबी रानी मौर्य ने गोकुल बैराज में हरनाल स्कैप से लाकर मिलाए जाने वाले करीब 150 क्यूसेक गंगाजल को डाउन स्ट्रीम में मिलाने की मांग की थी। 

2008 में बनना था स्मार्ट सिटी

दरअसल, हरनाल स्कैप से आने वाला गंगाजल गोकुल बैराज के अप स्ट्रीम में मिलाया जाता है, ताकि यमुना का पानी शुद्ध हो सके लेकिन इसका लाभ आगरा को नहीं मिल पाता है। 

1999 में भी 150 क्यूसेक के स्थान पर महज 60 क्यूसेक गंगाजल मिलाया जा रहा था। इसके बाद 2007 में मेयर अंजुला सिंह माहौर के कार्यकाल में गंगाजल प्रोजेक्ट की डीपीआर बनी। 

इस योजना के तहत 2008 तक सभी शहरों की पुलिसिंग को स्मार्ट करने, सरकारी कार्यालयों को स्मार्ट करने की योजना थी ताकि लोगों को अपने काम के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े हैं। 

लेकिन 2018 तक यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। पुलिस उसी ढर्रे पर काम रही है और सरकारी कार्यालयों में ई-गवर्नेंस पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed