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Turmeric Farming: किन्नू के बाग में ऐसे करें हल्दी की खेती, डबल हो जाएगी इनकम; बरौली अहीर में सफल हुआ ट्रायल

Thu, 23 Jan 2025 02:59 PM IST
धीरेन्द्र सिंह देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, बिचपुरी
देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, बिचपुरी Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 23 Jan 2025 02:59 PM IST
सार

आगरा के बरौली अहीर के किन्नू के बागों में हल्दी की खेती का सफल ट्रायल हो चुका है। अब किसान किन्नू के साथ ही हल्थी की  खेती करते हुए आय दोगुनी कर सकेंगे। 
 

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Turmeric Farming Cultivate turmeric like this in Kinnow garden income will double
Turmeric Farming - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में हल्दी की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के उद्यान विशेषज्ञ ने गत वर्ष मई माह में बरौली अहीर क्षेत्र के गांव थार पारौली और नगला बिंदू के पांच किसानों को एक हेक्टेयर भूमि में हल्दी की खेती के ट्रायल के लिए पी एच-1 प्रजाति का बीज दिया था। दिसंबर और जनवरी माह में हल्दी की खुदाई हुई है। जिसमें उत्पादन ठीक हुआ है और ट्रायल सफल हो गया है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के उद्यान विशेषज्ञ अनुपम दुबे ने बताया है कि थार पारौली और नगला बिंदू के किसान किन्नू की खेती करते हैं। किसान वर्षभर में एक बार अक्टूबर से दिसंबर के बीच में किन्नू की तुडाई करते हैं। इसके बाद किन्नू के बगीचे का स्थान खाली रहता है। जिसमें किसानों को किसी भी प्रकार की कोई आमदनी प्राप्त नहीं होती है। किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए उन्हें हल्दी की खेती के ट्रायल के लिए दोनों गांवों के किसान जमुनादास, अमित त्यागी, देवी सिंह, मुन्नालाल, हरेंद्र सिंह को बीज दिया। अनुपम दुबे के मुताबिक सभी किसानों ने एक हेक्टेयर किन्नू के बागों में बीज की बुवाई की। जिसमें 220-230 क्विंटल हल्दी की उपज हुई है। 

 
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हल्दी की खेती से नहीं होता खरपतवार
अनुपम दुबे ने बताया है कि हल्दी की खेती सात से नौ महीने की होती है। एक हेक्टेयर में 15 से 20 कुंतल हल्दी का बीज लगता है। प्रजाति पी एच -1, मेघा-1, रोमा आदि बीज की बुवाई कर सकते हैं। इसमें पानी की आवश्यकता कम होती है। किसान हल्दी की बुवाई अप्रैल माह से लेकर 15 जून तक कर सकते हैं। हल्दी की खेती के लिए बलुई दोमट मिटटी सबसे अच्छी मानी जाती है। साथ ही इसे बाग या छायादार जगहों पर बोना सही माना जाता है। किन्नू के बागों में हल्दी की खेती से करने से पौधों में कई प्रकार के होने वाले मृदा जनित रोगों से बचा जा सकता है। हल्दी की खेती से खरपतवार भी नहीं होता है। औषधीय गुण होने की वजह से जानवर भी इस फसल को खाना नहीं चाहते है।

 
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किन्नू का उत्पादन भी रहा ठीक
थार पारौली के किसान जमुनादास ने बताया है कि उसने अपने किन्नू के बाग में ट्रायल के लिए दो विस्वा जमीन पर हल्दी की खेती की थी। हल्दी की खेती के कारण किन्नू का उत्पादन ठीक रहा है। किन्नू में कोई रोग नहीं आया है। इस बार बाग से ही किन्नू 22 रुपए प्रति किलो बिका है। उनका करीब पांच-छह बीघा में किन्नू का बाग लगा हुआ है। इस वर्ष वे पूरे बाग में हल्दी की खेती करेंगे। ट्रायल में हुई दो क्विंटल उपज का बीज के लिए इस्तेमाल करेंगे। इससे उन्हें एक ही खेत में दो फसलों की आमदनी मिलेगी।
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