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UP: गोल्डन ऑवर में इलाज, जानें क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश...सड़क हादसे के घायलों को मिलेगा जीवनदान

Wed, 14 May 2025 09:50 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 14 May 2025 09:50 AM IST
सार

Cashless Treatment For Road Accident Victms: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सड़क हादसे के घायलों को नया जीवनदान मिला है। गोल्डन ऑवर में इलाज से कोई वंचित नहीं होगा। कैशलेस इलाज की योजना लागू कर दी गई है। 
 

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Treatment in the Golden Hour know what is the order of the Supreme Court Road accident victims
road accident. demo pic - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गोल्डन ऑवर में बिना किसी देरी, बिना किसी खर्च घायल व्यक्ति को नकद रहित (कैशलेस) इलाज मिल सकेगा। भारत सरकार ने 5 मई को अधिसूचना जारी कर कैशलेस योजना को लागू कर दिया है। योजना सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई। इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने अक्तूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ के समक्ष इसकी सुनवाई हुई। न्यायमित्र गौरव अग्रवाल की भूमिका भी इस प्रकरण में विशेष थी, जिनके सकारात्मक नजरिये ने इस प्रकरण में विशेष भूमिका निभाई। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 162 और 164बी को जोड़ा गया था, जिसके तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन ऑवर के दौरान नकद रहित चिकित्सा सहायता प्रदान करने और मोटर वाहन दुर्घटना निधि स्थापित करने का प्रावधान है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2022 से लागू हो चुका है, लेकिन केंद्रीय सरकार की ओर से इस योजना को अधिसूचित नहीं किया गया। जिससे दुर्घटना पीड़ितों को समय परइलाज नहीं मिल पा रहा था।

 
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सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या 295/2012 में एक आवेदन संख्या 202442/2023 दायर किया। इसमें नकद रहित उपचार योजना को शीघ्र अधिसूचित करने की मांग की गई थी। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को आदेश पारित कर केंद्र सरकार को योजना 14 मार्च 2025 तक लागू करने के लिए आदेश दिए, पर निर्धारित तिथि तक नहीं लागू की जा सकी। न्यायालय ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को 28 अप्रैल 2025 को तलब किया। मंत्रालय के सचिव को न्यायालय ने एक सप्ताह के अंदर योजना लागू करने के आदेश दिए। मंत्रालय ने 5 मई को योजना लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी।

 
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धनराशि निर्धारण पर दर्ज कराई आपत्ति
योजना के तहत पीड़ित को अधिकतम 1.5 लाख उपचार 7 दिनों तक प्रदान किया जाएगा। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता केसी जैन ने आपत्ति प्रस्तुत की। न्यायालय के 8 जनवरी के आदेश का संदर्भ देते हुए कहा कि धनराशि और समय की सीमा निर्धारित नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने आपत्ति का उल्लेख अपने आदेश में करते हुए केंद्र सरकार को अगस्त 2025 तक शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा है, जिसमें योजना की प्रगति और लाभार्थियों की संख्या बतानी होगी।
 

क्या है योजना
हादसे की तिथि से 7 दिन तक 1.5 लाख तक का इलाज घायल को अस्पताल में मिलेगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी अस्पताल के क्लेम को सत्यापित करेगी। 10 दिन के अंदर भुगतान होगा। राज्य सड़क सुरक्षा परिषद राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी होगी। इलाज देसी-विदेशी को मिलेगा। यह भी नहीं देखा जाएगा कि दुर्घटना कारित करने वाले वाहन का बीमा है या नहीं।

 

समय पर सुधार भी जरूरी
 अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट केसी जैन ने बताया कि योजना की शुरुआत मील का पत्थर है। अनुभवों के आधार पर समय-समय पर इसमें सुधार किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और केंद्र सरकार की कार्रवाई हजारों परिवारों के लिए आशा की किरण है।
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