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पैसेंजर ट्रेन के यात्रियों को सालती है दिल्ली की दूरी
पैसेंजर ट्रेन के यात्रियों को सालती है दिल्ली की दूरी
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:57 AM IST
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गतिमान एक्सप्रेस
- फोटो : ANI
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प्रयोगों के रेलवे ट्रैक यानी आगरा दिल्ली रेलमार्ग पर देश की सबसे तेज दौड़ने वाले गतिमान एक्सप्रेस महज 90 मिनट में आगरा से दिल्ली की दूरी तय करती है, लेकिन इसी रूट पर दौैड़ने वाली आगरा कैंट दिल्ली पैसेंजर आज भी दिल्ली की दूरी आधे दिन में तय कर पाती है। एक ओर रेल विभाग आगरा भांडई जैसे रेलवे ट्रैक की स्पीड बढ़ाने का काम कर रहा है, तो दूसरी ओर ज्यादातर पैसेंजर गाड़ियां अपने निर्धारित समय से कई घंटे की देरी से ही गंतव्य तक पहुंच पाती हैं।
आगरा दिल्ली के ट्रैक पर हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन का ट्रायल भी हो चुका है। 160 घंटा प्रति किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ने वाली गतिमान एक्सप्रेस का संचालन भी पांच अप्रैल से शुरू हो चुका है। छह माह बीतने के बाद भी गतिमान एक्सप्रेस की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई है, क्योंकि इस गाड़ी की स्पीड पर अफसरों की नजर रहती है। दूसरी तरफ आगरा कैंट से सुबह चलने वाली दिल्ली पैसेंजर का दिल्ली पहुंचने का निर्धारित समय 10.30 घंटे है। रेलवे ने ही ये समय तय किया है। दिल्ली में पहुंचने का वक्त भले ही 10.30 घंटे हो, लेकिन ये गाड़ी यदा कदा ही निर्धारित समय पर पहुंचती है। अमूमन दिल्ली पैसेंजर 12 घंटे में यात्रियों को दिल्ली पहुंचाती है। आगरा इटावा पैसेंजर गाड़ी छह से आठ घंटे में इटावा तक पहुंचाती है। बांदीकुई पैसेंजर समेत ज्यादातर पैसेंजर गाड़ियां घंटों लेतलतीफी से चलती हैं। इन गाड़ियों की टाइमिंग को देखने की फुर्सत किसी के पास नहीं है क्योंकि इनमें कमजोर तबके के यात्री सफर करते हैं। रेल अधिकारी जहां चंबल के बीहड़ से गुजरने वाले आगरा भांडई रेलवे ट्रैक की स्पीड को बढ़ाने की कवायद में लगे हुए हैं, वहीं पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार को बढ़ाने पर उनका कोई ध्यान नहीं है। सूत्रों का कहना है कि डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर के तैयार होने के बाद मालगाड़ियों का बोझ कम हो जाएगा, ऐसे में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ सकती है।
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आगरा दिल्ली के ट्रैक पर हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन का ट्रायल भी हो चुका है। 160 घंटा प्रति किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ने वाली गतिमान एक्सप्रेस का संचालन भी पांच अप्रैल से शुरू हो चुका है। छह माह बीतने के बाद भी गतिमान एक्सप्रेस की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई है, क्योंकि इस गाड़ी की स्पीड पर अफसरों की नजर रहती है। दूसरी तरफ आगरा कैंट से सुबह चलने वाली दिल्ली पैसेंजर का दिल्ली पहुंचने का निर्धारित समय 10.30 घंटे है। रेलवे ने ही ये समय तय किया है। दिल्ली में पहुंचने का वक्त भले ही 10.30 घंटे हो, लेकिन ये गाड़ी यदा कदा ही निर्धारित समय पर पहुंचती है। अमूमन दिल्ली पैसेंजर 12 घंटे में यात्रियों को दिल्ली पहुंचाती है। आगरा इटावा पैसेंजर गाड़ी छह से आठ घंटे में इटावा तक पहुंचाती है। बांदीकुई पैसेंजर समेत ज्यादातर पैसेंजर गाड़ियां घंटों लेतलतीफी से चलती हैं। इन गाड़ियों की टाइमिंग को देखने की फुर्सत किसी के पास नहीं है क्योंकि इनमें कमजोर तबके के यात्री सफर करते हैं। रेल अधिकारी जहां चंबल के बीहड़ से गुजरने वाले आगरा भांडई रेलवे ट्रैक की स्पीड को बढ़ाने की कवायद में लगे हुए हैं, वहीं पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार को बढ़ाने पर उनका कोई ध्यान नहीं है। सूत्रों का कहना है कि डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर के तैयार होने के बाद मालगाड़ियों का बोझ कम हो जाएगा, ऐसे में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ सकती है।
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