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UP: ई-वे बिल में छोटी गलती पर भारी जुर्माना क्यों? व्यापारियों ने उठाई आवाज, एसआईबी जांच के लिए मांगी एसओपी

Wed, 24 Jun 2026 10:03 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 24 Jun 2026 10:03 AM IST
सार

आगरा में व्यापारियों ने प्रमुख सचिव राज्य कर के समक्ष मांग रखी कि ई-वे बिल और इनवॉयस में मामूली लिपिकीय त्रुटियों पर भारी जुर्माना न लगाया जाए। साथ ही एसआईबी जांच के लिए स्पष्ट एसओपी लागू करने, नोटिस प्रक्रिया में पारदर्शिता और अपील संबंधी दिक्कतों के समाधान की भी मांग की गई।

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Traders Demand Relief from Penalties on Minor GST Errors, Seek SOP for SIB Investigations
एसजीएसटी - फोटो : amar ujala

विस्तार

एसजीएसटी (राज्य कर) में ई-वे बिल या इनवॉयस बनाते समय होने वाली मामूली लिपिकीय त्रुटियों पर व्यापारियों से भारी जुर्माना न वसूला जाए। इसके साथ ही एसआईबी की कार्रवाई के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू हो, ताकि व्यापारियों का उत्पीड़न रोका जा सके। ये प्रमुख मांगें सोमवार को नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के प्रतिनिधिमंडल ने आगरा आईं प्रमुख सचिव राज्य कर कामिनी चौहान के समक्ष जयपुर हाउस स्थित कार्यालय में रखीं।
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प्रमुख सचिव ने सभी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनकर शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया। चैंबर के उपाध्यक्ष अंबा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष व जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल और कोषाध्यक्ष विनय मित्तल ने प्रमुख सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए व्यापारिक दिक्कतें बताईं। कहा कि जीएसटीएन या वाहन नंबर का कोई अंक गलत होने जैसी छोटी त्रुटियों पर जुर्माना या जमानत राशि न ली जाए, क्योंकि इसमें कर चोरी की मंशा नहीं होती।
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एसआईबी अधिकारी जांच का कारण स्पष्ट करें। जिन मामलों की जांच नोटिस भेजकर हो सकती है, उनके लिए व्यापार स्थल पर न जाएं। माल रोके जाने पर लगाए गए अर्थदंड की अपील व्यापारी के पंजीकृत शहर में ही सुनने का प्रावधान हो, ताकि अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। नोटिस का जवाब देने की समय सीमा बीतने के बाद भी पोर्टल पर एडजर्नमेंट का विकल्प मिले। आईटीसी क्लेम के बार-बार निराधार नोटिस न भेजे जाएं। ईमेल के साथ-साथ फर्म के पते पर फिजिकल नोटिस भी भेजे जाएं, जिससे फर्जी फर्मों की असलियत उजागर हो सके।

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