आगरा में कोरोना: चार नए मिलने से बढ़ी सक्रिय मरीजों की संख्या, अब तक ठीक हुए 98 फीसदी मरीज
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एक साल हुआ पूरा, तीन मार्च को पहलीबार मिले थे कोरोना के मरीज
ताजनगरी में मार्च में पहली बार कोरोना के मरीज मिले थे। यह विदेश से लौटा एक परिवार था। इसके बाद संक्रमण की कई चेन बनीं और बीमारी फैलती चली गई। कोरोना संक्रमण का एक साल पूरा हो जाने पर ताजनगरी के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि पिछले तीन महीनों में कोई नई चेन नहीं बनी है। इस दौरान संक्रमण का ग्राफ भी तेजी से नीचे गया है, और अब मार्च में ही कोरोना संक्रमण शून्य पर आ चुका है।
मरीजों की मृत्युदर में भी आई कमी
कोरोना संक्रमण का एक साल पूरा हो चुका है। पिछले तीन महीनों में संक्रमण का ग्राफ भी तेजी से नीचे गया है। मरीजों की मृत्यु दर में भी कमी आई है। संक्रमित हुए लोगों में से 98 फीसदी से भी ज्यादा वायरस को मात दे चुके हैं। इन 12 महीनों में 5.50 लाख लोगों के नमूनों की जांच करने पर 10544 लोग संक्रमित पाए गए। इनमें से 6975 पुरुष, 3351 महिलाएं और 214 बच्चे थे। 174 मरीजों की मौत हुई। लोहामंडी क्षेत्र का 24 दिन का शिशु सबसे कम उम्र का और आवास विकास क्षेत्र की 103 साल की वृद्धा सबसे उम्रदराज मरीज रहे।
अगस्त में आगरा मॉडल फेल हो गया था। कारण यह था संक्रमण तेजी से फैल रहा था। एसएन में मरीजों को उपचार न मिलने की शिकायतें थीं। अगस्त से नवंबर तक संक्रमण सबसे चरम पर रहा। अगस्त में 1145, सितंबर: 2818, अक्तूबर 1528 और नवंबर में 2004 मरीज मिले। इन चार महीनों में 7495 संक्रमित मिले। यह 12 महीनों के कुल मरीजों में से आधे हैं।