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पूरा का पूरा एटीएम खाली करने वाला हैकर पकड़ा
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 05 May 2015 02:20 AM IST
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फतेहाबाद रोड स्थित एक पांच सितारा होटल से गुजरात क्राइम ब्रांच की टीम ने एटीएम के कोड को हैक करके रकम उड़ाने वाले हैकर को पकड़ा है। यह रशियन हैकर की मदद से कई राज्यों के विभिन्न एटीएम से 4.5 करोड़ रुपये निकाल चुका है। इसके गैंग में 15 सदस्य हैं। इनमें से इसके समेत नौ को पुलिस दबोच चुकी है।
यह कार्रवाई सोमवार रात तकरीबन 12:45 बजे हुई। पकड़ा गया हैकर सुनील निवासी इंदौर है। दो दिन पहले गुजरात पुलिस ने इसी के गैंग के आठ सदस्यों को सूरत में पकड़ा था। उनसे पूछताछ में सुनील के दो दिन से आगरा मेें होने के बारे में सुराग लगे थे। इसके बाद गुजरात पुलिस की टीम ने आगरा पुलिस से संपर्क किया। सीओ सदर असीम चौधरी ने बताया कि ये 15 सदस्यीय गिरोह यूपी, राजस्थान, एमपी, दिल्ली एनसीआर, बिहार में वारदात कर चुका है। गैंग एक बार में एटीएम की पूरी रकम निकाल लेता है। एटीएम को चिह्नित करने के बाद दो की दबाकर उसके कोड का पता करके रशियन हैकर्स को बताते हैं। रशियन हैकर्स पांच से दस मिनट मेें इसे डीकोड करके कोड उपलब्ध करा देता था। इसके बाद कोड डालकर रकम निकाल ली जाती थी। इससे एटीएम को काटने या तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती थी। एक बार कोड डाले जाने के बाद रकम खुद ब खुद बाहर आ जाती। वारदात का भी पता नहीं चल पाता है। पुलिस बैंक कर्मियों और एटीएम में कैश डालने वाले कंपनी के कर्मचारियों पर शक करती रहती। बताया गया है कि गैंग के टारगेट पर आगरा और जयपुर के एटीएम थे।
आउट आफ सर्विस हो जाता है एटीएम
एक बार रकम निकलने के बाद एटीएम आउट आफ सर्विस हो जाता है।
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यह कार्रवाई सोमवार रात तकरीबन 12:45 बजे हुई। पकड़ा गया हैकर सुनील निवासी इंदौर है। दो दिन पहले गुजरात पुलिस ने इसी के गैंग के आठ सदस्यों को सूरत में पकड़ा था। उनसे पूछताछ में सुनील के दो दिन से आगरा मेें होने के बारे में सुराग लगे थे। इसके बाद गुजरात पुलिस की टीम ने आगरा पुलिस से संपर्क किया। सीओ सदर असीम चौधरी ने बताया कि ये 15 सदस्यीय गिरोह यूपी, राजस्थान, एमपी, दिल्ली एनसीआर, बिहार में वारदात कर चुका है। गैंग एक बार में एटीएम की पूरी रकम निकाल लेता है। एटीएम को चिह्नित करने के बाद दो की दबाकर उसके कोड का पता करके रशियन हैकर्स को बताते हैं। रशियन हैकर्स पांच से दस मिनट मेें इसे डीकोड करके कोड उपलब्ध करा देता था। इसके बाद कोड डालकर रकम निकाल ली जाती थी। इससे एटीएम को काटने या तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती थी। एक बार कोड डाले जाने के बाद रकम खुद ब खुद बाहर आ जाती। वारदात का भी पता नहीं चल पाता है। पुलिस बैंक कर्मियों और एटीएम में कैश डालने वाले कंपनी के कर्मचारियों पर शक करती रहती। बताया गया है कि गैंग के टारगेट पर आगरा और जयपुर के एटीएम थे।
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आउट आफ सर्विस हो जाता है एटीएम
एक बार रकम निकलने के बाद एटीएम आउट आफ सर्विस हो जाता है।