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ताजमहल को धूल से बचाने के लिए हुआ बड़ा फैसला, 5 किमी की परिधि में होगा ये काम

Thu, 28 Jun 2018 01:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 28 Jun 2018 01:05 PM IST
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tiles or grass will be planted around taj mahal
ताजमहल
संगमरमरी ताजमहल को धूल से बचाने के लिए अब इसके पांच किमी दायरे में टाइल्स या घास लगाई जाएगी। ताकि इस परिधि में धूल उड़ने से रोकी जा सके। 
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इसके लिए लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और आगरा विकास प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहले चरण में दो किमी की परिधि के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

मंडलायुक्त के. राममोहन राव की अध्यक्षता में 15 जून को  ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) की बैठक में यह निर्णय लिया गया था। इस बैठक का कार्यवृत्त तैयार कर 26 जून को संबंधित विभागों को भेज दिया गया है। 
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ताजमहल - फोटो : ANI
तीन विभागों को ताज को धूल से बचाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने ‘विजन डॉक्यूमेंट’ के तहत ताज को सौ साल तक संरक्षित करने के लिए योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। 

इस पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने स्मारक को धूल के प्रभाव से बचाने पर जोर दिया था। क्योंकि यमुना की बालू या दूसरे धूल के कण उड़कर ताज की दीवारों और फर्श पर चिपक जाते हैं। 

इससे स्मारक को नुकसान पहुंच रहा है। इसी क्रम में टीटीजेड की बैठक में स्मारक के पांच किमी दायरे को धूल रहित करने के लिए योजना तैयार की जा रही है। 

इसके लिए सड़क किनारों या दूसरे अन्य खुले स्थान को टाइल्स या घास से ढका जाएगा। जो क्षेत्र लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं होगा, उसके लिए नगर निगम को कार्ययोजना तैयार करनी होगी। 

पौधरोपण से वन विभाग ने खड़े किए हाथ

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demo pic - फोटो : अमर उजाला
टीटीजेड की बैठक में ताज के आसपास हरियाली विकसित करने का भी निर्णय हुआ था। मगर वन विभाग ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यमुना नदी के सहारे वन विभाग की कोई भूमि नहीं है। 

किसी अन्य की भूमि पर वन विभाग वृक्ष नहीं लगा सकता। नदी की जो रेत उड़ती है, उसको रोकने के लिए घास अथवा झाड़ियां लगाई जानी चाहिए। अधिकारियों का यह भी कहना है कि बायोडायवर्सिटी प्रोजेक्ट बनाने के संबंध में साइट विजिट के लिए दिल्ली के विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा। 

वही बताएंगे कि नदी किनारे किस तरह के पौधे लगाए जाने चाहिए। बता दें कि हवा के साथ यमुना नदी की बालू काफी मात्रा में उड़कर ताज के फर्श पर चली जाती है। पर्यटकों के पैरों के नीचे आई इस रेत की रगड़ से संगमरमरी पत्थर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। 
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