{"_id":"4c3292ab21693fef24847d2f13350b58","slug":"three-new-born-baby-died-from-asphyxia-in-sn-medical-college-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसएन मेडिकल कालेज में दम घुटने से तीन नवजात की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसएन मेडिकल कालेज में दम घुटने से तीन नवजात की मौत
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 12 Aug 2015 01:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसएन मेडिकल कालेज में बदइंतजामी की इंतहा ने तीन नवजातों की जान ले ली। सोमवार आधी रात को बिजली गुल हुई तो जेनरेटर नहीं चलाया गया। दमघोंटू गर्मी में नन्हीं सी जान का दम घुट गया। नाजुक हालत में इंक्युबेटर में रखे दो मासूम दो घंटों के भीतर ही तड़प तड़पकर मौत के मुंह में समा गए, जबकि तीसरे की सांसें सुबह सात बजे थम गई। डाक्टर और नर्स ने इन्हें बचाने का कोई प्रयास ही नहीं किया। इसके बाद अपनी लापरवाही छिपाने के लिए पत्थर दिल बने डाक्टरों ने उनके माता-पिता के हाथों में उनके जिगर के टुकड़ों के शव थमाए और तुरंत चले जाने का हुक्म सुना दिया। लेकिन घर जाने से पहले रोते बिलखते ये गम के मारे लोग अपना दर्द बयां कर गए। मामला प्रशासन तक पहुंचा तो आनन फानन में मजिस्ट्रेटी जांच कराई गई। इसमें डाक्टरों की लापरवाही सामने आई। सीएम अखिलेश यादव ने भी झकझोर देने वाले मामले की रिपोर्ट तलब कर ली।
फीरोजाबाद के रेनू और जितेंद्र के चार दिन के शिशु को आठ अगस्त को बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। डाक्टरों ने उसे एचआई ग्रेड-थ्री (दिमाग में आक्सीजन न पहुंचने) की बीमारी बताई थी। हालत बेहद गंभीर थी। उसे शिशु सघन चिकित्सा केंद्र में भर्ती कर जीवन रक्षक उपकरणाें ( इंक्युबेटर) में रखा गया था। रात को दस बजे इसकी मौत हो गई। दूसरा 15 दिन का शिशु एत्माद्दौला निवासी जीनत का था। इसे सोमवार की शाम साढ़े सात बजे बेहोशी की हालत में भर्ती किया गया था। इसे सेप्टिीसीमिया बताया गया। उसने रात 12 बजे दम तोड़ दिया।
दोनों बच्चों की मौत दम घुटने से हुई। इसकी वजह इंक्युबेटर बंद हो जाना बताई गई। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि बिजली कटौती के चलते इंक्युबेटर बंद हो गए। तीसरा शिशु जगदीशपुरा के हीरालाल का रहा, जिसकी मौत सुबह सात बजे हुई। मरीजों का कहना है कि रात के 11 बजे से बिजली नहीं थी। जेनरेटर नहीं चलाया गया। सभी उपकरण बंद हो गए थे।
विज्ञापन
उधर, आरोप है कि तीन बच्चों की मौत के बाद डाक्टरों ने उनके मां-बाप को बुलाकर कहा कि वे शव लेकर घर चले जाएं। इस पर हंगामा खड़ा हो गया। मृतक बच्चों के माता पिता के अलावा अन्य मरीज भी भड़क गए। इसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो डीएम पंकज कुमार ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए। जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट रेखा चौहान ने बताया कि तीन शिशुओं की मौत बताई गई है। इनमें से एक का रिकार्ड मेडिकल कालेज में नहीं मिला है। करीब पांच-छह घंटे बिजली नहीं रही। जनरेटर स्टार्ट नहीं किया, जो खराब बताया गया है। यह घोर लापरवाही है।
उधर, कालेज के प्रभारी प्राचार्य डाक्टर राजेश्वर दयाल का कहना है कि दो शिशुओं की मौत हुई है। दोनाें ही शिशु प्राइवेट हास्पिटल से गंभीर हालत में लाए गए थे। इनका बचना बेहद मुश्किल था। लापरवाही जैसी कोई बात नहीं रही। उधर, शहर में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी टोरंट पॉवर के पीआरओ रजनीश पाठक का कहना है कि सोमवार रात में मेडिकल कालेज फीडर की बिजली सप्लाई में एक मिनट की भी कटौती नहीं हुई। हो सकता है कि मेडिकल कालेज में आंतरिक फाल्ट के चलते बिजली न रही हो। इससे टोरंट का कोई मतलब नहीं है।
विज्ञापन
फीरोजाबाद के रेनू और जितेंद्र के चार दिन के शिशु को आठ अगस्त को बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। डाक्टरों ने उसे एचआई ग्रेड-थ्री (दिमाग में आक्सीजन न पहुंचने) की बीमारी बताई थी। हालत बेहद गंभीर थी। उसे शिशु सघन चिकित्सा केंद्र में भर्ती कर जीवन रक्षक उपकरणाें ( इंक्युबेटर) में रखा गया था। रात को दस बजे इसकी मौत हो गई। दूसरा 15 दिन का शिशु एत्माद्दौला निवासी जीनत का था। इसे सोमवार की शाम साढ़े सात बजे बेहोशी की हालत में भर्ती किया गया था। इसे सेप्टिीसीमिया बताया गया। उसने रात 12 बजे दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
दोनों बच्चों की मौत दम घुटने से हुई। इसकी वजह इंक्युबेटर बंद हो जाना बताई गई। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि बिजली कटौती के चलते इंक्युबेटर बंद हो गए। तीसरा शिशु जगदीशपुरा के हीरालाल का रहा, जिसकी मौत सुबह सात बजे हुई। मरीजों का कहना है कि रात के 11 बजे से बिजली नहीं थी। जेनरेटर नहीं चलाया गया। सभी उपकरण बंद हो गए थे।
विज्ञापन
उधर, आरोप है कि तीन बच्चों की मौत के बाद डाक्टरों ने उनके मां-बाप को बुलाकर कहा कि वे शव लेकर घर चले जाएं। इस पर हंगामा खड़ा हो गया। मृतक बच्चों के माता पिता के अलावा अन्य मरीज भी भड़क गए। इसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो डीएम पंकज कुमार ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए। जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट रेखा चौहान ने बताया कि तीन शिशुओं की मौत बताई गई है। इनमें से एक का रिकार्ड मेडिकल कालेज में नहीं मिला है। करीब पांच-छह घंटे बिजली नहीं रही। जनरेटर स्टार्ट नहीं किया, जो खराब बताया गया है। यह घोर लापरवाही है।
उधर, कालेज के प्रभारी प्राचार्य डाक्टर राजेश्वर दयाल का कहना है कि दो शिशुओं की मौत हुई है। दोनाें ही शिशु प्राइवेट हास्पिटल से गंभीर हालत में लाए गए थे। इनका बचना बेहद मुश्किल था। लापरवाही जैसी कोई बात नहीं रही। उधर, शहर में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी टोरंट पॉवर के पीआरओ रजनीश पाठक का कहना है कि सोमवार रात में मेडिकल कालेज फीडर की बिजली सप्लाई में एक मिनट की भी कटौती नहीं हुई। हो सकता है कि मेडिकल कालेज में आंतरिक फाल्ट के चलते बिजली न रही हो। इससे टोरंट का कोई मतलब नहीं है।