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आगरा: पॉलीटेक्निक पास दोस्तों ने बनाया गैंग, मास्क-सैनिटाइजर बेचने के नाम पर 30 लाख की ठगी

Fri, 12 Feb 2021 02:20 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 12 Feb 2021 02:20 PM IST
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three arrested for fraud in the name of selling mask-sanitizer in agra
आगरा: ठगी के आरोपी - फोटो : अमर उजाला

आगरा में पुलिस ने साइबर अपराधियों के ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जिसे पॉलीटेक्निक पास दो दोस्त तुषार और राहुल चला रहे थे। गैंग का सरगना तुषार है। उसने पॉलीटेक्निक में साथ में पढ़े राहुल और एक अन्य दोस्त विकास के साथ यह गिरोह बनाया। 

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गिरोह ऑनलाइन मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर बेचने के नाम पर करीब 30 लाख रुपये की ठगी कर चुका है। गिरोह ने एक साइट पर फर्जी फर्म बना रखी थी। इससे जानकारी लेने वाले व्यापारियों को कॉल करके सस्ते दाम में सामान देने का झांसा देकर खातों में रकम जमा करा लेते। तीनों दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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रेंज साइबर थाना पुलिस को इसकी शिकायत मिली थी। रावली, रकाबगंज के दिव्यकांत से दस्ताने भेजने के नाम पर सात फरवरी को 4,100 रुपये जमा करा लिए थे लेकिन माल नहीं भेजा। इसी तरह असम और आंध्र प्रदेश के व्यक्ति से ठगी की गई। टीम ने जांच की। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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रेंज साइबर थाना के प्रभारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि दयालबाग स्थित दयानंद नगर निवासी तुषार, थाना सिकंदरा के गांव पनवारी निवासी राहुल चौधरी और विकास को गिरफ्तार किया है। उनसे चार मोबाइल, तीन सिम कार्ड, तीन आधार कार्ड, 12 डेबिट कार्ड बरामद किए हैं।

इंडिया मार्ट पर खुद को दर्शाया विक्रेता
पुलिस के मुताबिक, आरोपी तुषार सरगना है। वह पॉलीटेक्निक पास है। पहले नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करता था। वहां विभिन्न राज्यों और शहरों के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाले सेफ्टी सामान कम कीमत पर देने का काम हो रहा था। यहां से उसे सामान को बेचने का तरीका मिल गया। 

उसने अपने बचपन के मित्र विकास और पॉलीटेक्निक में साथ में पढ़े राहुल के साथ गैंग बना लिया। इंडिया मार्ट की वेबसाइट पर अपने आप को दस्ताने, मास्क और सैनिटाइजर का विक्रेता दर्शाने लगे। जो लोग यह सामान खरीदने के लिए वेबसाइट पर जानकारी लेते थे, आरोपी उनके मोबाइल पर कॉल करते थे।

तीन साल से कर रहे थे ठगी
आरोपी तीन साल में 30 लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं। कॉल करने के लिए फर्जी आईडी से ली गई सिम का इस्तेमाल करते थे। लोगों को व्हाट्स एप और ईमेल पर सामान की फोटो भेजते थे। अधिक गुणवत्ता वाले सामान को कम कीमत में देने का लालच देते थे। इसके बाद व्यापारी को डिब्बे की फोटो, कुटेशन, फर्जी इनवाइस भेजते, जिसमें सामान भेजने का दावा करते। व्यापारी खाते में रकम जमा कर देते थे। इसके बाद मोबाइल बंद कर लेते। 

बैंक की लापरवाही सामने आई
गैंग के सरगना सहित अन्य सदस्य जिन खातों में रकम जमा कराते थे, वह लोगों से किराये पर लेते थे। इसके लिए खाता धारक को कमीशन देते थे। आरोपियों से पूछताछ में यह भी पता चला कि वह किसी फर्म का फर्जी नाम लिखते थे। उसमें सिर्फ खाता संख्या सही होती थी। कोड तक गलत डालते थे। इसके बावजूद बैंक की ओर से रकम को खाते में जमा कर दिया जाता था। कोड को चेक तक नहीं किया जाता था।

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