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जनता प्यासी, जनप्रतिनिधि खामोश

Thu, 28 Apr 2016 01:22 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Thu, 28 Apr 2016 01:22 AM IST
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Thirsty people, representatives silent
जनता प्यासी, जनप्रतिनिधि खामोश - फोटो : Amar Ujala
यमुना पूरी तरह सूखने के कगार पर है। जो पानी है वह इतना दूषित है कि शोधन करने में जलकल विभाग ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। बात हैंडपंप की करें तो अधिकतर खराब पड़े हैं। सबमर्सिबल के पाइप से पानी काफी नीचे चला गया है। जनता बूंद-बूंद को तरस रही है, लेकिन अधिकारियों पर फर्क नहीं, जनप्रतिनिधि भी खामोश बैठे हैं। भीषण गर्मी में लोग दूर से पानी भरकर ला रहे हैं। 
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शहर के 60 फीसदी हैंडपंप खराब हैं। जो ठीक हैं उनका पानी पीने योग्य नहीं है। गंगाजल प्रोजेक्ट के नाम पर जनता को 2007 से गुमराह किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि भाषण तो बड़े-बड़े देते हैं, लेकिन कोई जनता की आवाज उठाने आगे नहीं आ रहा है। लोग पानी के लिए प्रदर्शन कर रह हैं। विधायक उनके साथ तक खड़े नजर नहीं आ रहे। अफसरों पर दबाव बनाकर समस्या का समाधान भी नहीं करा पा रहे। दावे बड़े-बड़े हैं लेकिन जनता के सड़क पर उतरने से पता चल रहा है कि काम किया है या सिर्फ बातें बना रहे हैं।
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मांग और आपूर्ति
402 एमएलडी पानी की शहर में प्रतिदिन जरूरत (सीडीपी के अनुसार)
250 एमएलडी पानी प्रतिदिन दोनों वाटर वर्क्स से सप्लाई

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
मैंने अपने क्षेत्र में लगातार काम किया है। औसतन पांच दिन में एक हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप लगवाई हैं। चार वर्षों में करीब 100 हैंडपंप और 250 सबमर्सिबल पंप लगे हैं। रही बात शहर के हालात की तो सपा के राज में जलकल विभाग के अधिकारी भ्रष्ट हो चुके हैं।
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- योगेंद्र उपाध्याय, विधायक आगरा दक्षिण

पानी की समस्या शुरू होते ही मैंने एक अपने खर्च पर टीम बनाई है। जहां भी हैंडपंप खराब होने की शिकायत मिलती है टीम वहां जाकर हैंडपंप ठीक कराती है। समस्या के संबंध में शासन में लिखा है। पिछले डेढ़ माह में करीब 20 सबमर्सिबल पंप और 150 हैंडपंप लगवाए हैं। 
जगन प्रसाद गर्ग, विधायक आगरा उत्तर

किशोरपुरा में भड़की पब्लिक
किशोरपुरा में कई दिन से चल रही पेयजल समस्या का जायजा लेने पहुंचे जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता राजेंद्र आर्या को महिलाओं ने घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद भाजपा नेता त्रिलोकी नाथ शर्मा के आवास पर हुई वार्ता के दौरान राजेंद्र आर्य ने आश्वासन दिया कि समस्या का जल्द समाधान कर दिया जाएगा। इस पर महिलाओं ने उन्हें जाने दिया। बृजेश उपाध्याय, रेखा देवी, समी, चंद्रकांता, गीता देवी, त्रिवेणी, रेनू, सुनीता, जानकी देवी, अनीता, गोपाल, ओमवती, रजनी, सरस्वती, मीना आदि शामिल थीं।

नामनेर में भी बिगड़ रहे हालात
नामनेर में पिछले गई कई दिन से पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो रही है।  रात को क्षेत्र की सबमर्सिबल पंपों पर खाली बर्तन लिए लोगों की भीड़ रहती है। यही हालात मंटोला, काजीपाड़ा, मोहनपुरा, ईदगाह, नगला छउआ, शाहगंज, बोदला, प्रकाश नगर, सती नगर, नुनिहाई सहित शहर के तमाम हिस्सों में हैं।

यमुना पार : रात भर जागकर भरते हैं पानी
यमुना ब्रिज का नगला फितूरी। 250 परिवार और आबादी तीन हजार से अधिक। यहां रात आठ बजे लोग घरों से निकल आते हैं मानो सुबह हो गई हो। कारण इसी समय नलाें में पानी आता है। लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से ये भी बंद है। लोग जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से नाराज हैं। फरजीना कहती हैं, वोट मांगने आए थे तब सबमर्सिबल लगाने का वादा किया, इसके बाद आज तक नेता नहीं झांके। रेशमा बोलीं, पानी को दूध की तरह सहेजकर रखते हैं। हैंडपंप हैं, मगर खराब पड़े हैं। स्टेशन रोड, गणेश नगर, मोती बाग, हनुमान नगर, प्रकाश नगर, सुशील नगर की लगभग हर गली में हैंडपंप है। लेकिन अधिकांश खराब हैं। मोती बाग निवासी शबनम बताती हैं कि खाने-पीने के लिए प्रतिदिनि 10-20 रुपये और नहाने-धोने के लिए 30-50 रुपये का पानी खरीदना पड़ता है। फूलवती का कहना है कि आमदनी का एक हिस्सा तो पानी खरीदने में ही खर्च हो जाता है।

- जलकल विभाग को 40 खराब हैंडपंप की सूची दी है। कई बार बात की है, जल्द ठीक रिपेयर कराने को कहते हैं, अब तो अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। विभाग का घेराव की तैयारी है। मीनाक्षी साकेत, क्षेत्रीय पार्षद

पानी की समस्या की जानकारी है। इसके समाधान के लिए लगा हुआ हूं, खराब पड़े हैंडपंप ठीक कराने के लिए अधिकारियों से बात की है।
डा. धर्मपाल सिंह, विधायक

बाह बस अड्डा: सूखे नल, खराब हैंडपंप, प्यासे परेशान
दोपहर भीषण गर्मी में बुधवार को बाह के बस अड्डे पर पानी पीने के लिए पहुुंचा एक यात्री सूखे पडे़ नल के पास ही बेहोश होकर गिर पड़ा। प्यास से बेहोश हुआ युवक साथी यात्रियों की मदद से होश में तो आ गया लेकिन पेयजल संकट का सवाल छोड़ गया। 

बस अड्डा परिसर में पानी के इंतजाम की पड़ताल की तो यात्री के बेहोश होने का सच सामने आया। बस अड्डा परिसर में लगे दो हैंडपंप सालों से खराब पडे़ हैं। इन्हें ठीक कराने के बारे में न किसी ने सोचा और न ही किसी की इन पर नजर पड़ी है। यहां लगा सबमर्सिबल पंप भी गिरते भूगर्भ जल के कारण फेल हो गया। इसे ठीक कराने के लिए पंपसेट को निकाला जा रहा था लेकिन रस्सी टूटने के कारण पंपसेट बोरिंग में चला गया। पीने के पानी का और कोई इंतजाम नहीं है। गर्मी के मौसम में प्यास बुझाने के लिए यात्री नलों तक  पहुुंचते जरूर हैं लेकिन नल सूखे मिलने पर विभाग को कोसते हुये खरीद कर पानी पीने को मजबूर हैं। पेयजल संकट को लेकर विभिन्न रूटों पर यात्रा करने वाले यात्रियों ममता, राजेश्वरी, माया देवी, अर्चना, मीनाक्षी, मनोज, सतीश, अनिल, विनोद कुमार, सुनील आदि ने बताया कि रोडवेज पीने का पानी तक मुहैया नहीं करा पा रहा है। उन्होंने रोडवेज के रवैये को लेकर नाराजगी भी जताई। बाह बस अड्डे के प्रभारी रामनिवास ने पीने के पानी का इंतजाम फेल होने पर एसडीएम उमाशंकर से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। बोरिंग में पंपसेट चले जाने पर विभाग असहाय महसूस कर रहा है।
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