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Agra News: बच्चों की गर्दन मोटी और काली सिलवटें, न सुधरे तो मधुमेह तय

Mon, 24 Nov 2025 02:36 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 02:36 AM IST
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Thick and dark folds on the neck of children, if not improved then diabetes is certain
100 डॉ प्रभात अग्रवाल
आगरा। मोटी गर्दन, काली सिलवटें हों तो इसे त्वचा का मैल समझ लापरवाही न बरतें। बच्चों के बड़े होने पर ये मधुमेह (टाइप-2) का सबसे बड़ा लक्षण हैं। इसे चिकित्सकीय भाषा में एकेंथोसिस निग्रिकंस बोलते हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में 458 लोगों पर हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि 10 से 17 साल तक के 458 बच्चों पर अध्ययन किया गया। इसमें बच्चों का वजन, उम्र, खानपान और माता-पिता के वजन के बारे में जानकारी की। इसमें 18 फीसदी बच्चों में वजन बढ़ा मिला, जिनमें से 6 फीसदी बच्चों में एकेंथोसिस निग्रिकंस की दिक्कत मिली।
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इनमें 85 फीसदी का खानपान और दिनचर्या बिगड़ी हुई थी। जिनके परिजन भी मोटापे से पीड़ित हैं, उनमें 90 फीसदी बच्चों में ये परेशानी पाई गई। आगरा डायबिटीज फोरम के सचिव डॉ. सुनील बंसल ने बताया कि इंसुलिन प्रभावित होने से गर्दन, बगल और अंगुलियों के पीछे काले धब्बे पड़ने लगते हैं। ज्यादा समय तक इसके रहने पर इंसुलिन रेजिस्टेंट भी हो जाते हैं। मधुमेह के जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उन्होंने भी बचपन में ऐसे लक्षण होने की बात बताई।
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फिटनेस पर सचेत रहने की जरूरत
- वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि गर्दन पर सिलवटें, काले धब्बे और मोटी होने से बच्चों के बड़े होने पर 25 फीसदी बच्चों में मधुमेह के साथ उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग का भी खतरा है। बाजार के भोजन और स्क्रीन पर टाइम अधिक बिताने के कारण बच्चों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐेसे में परिजन को इनके फिटनेस पर विशेष सचेत रहने की जरूरत है।



पीड़ित बालिकाओं में हार्मोंस की दिक्कत
- एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह ने बताया कि एकेंथोसिस निग्रिकंस से पीड़ित बालिकाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की परेशानी भी बन रही है। इसमें हार्माेंस भी प्रभावित होने से चेहरे पर बाल उगने, मुंहासे की परेशानी हो जाती है। कई अस्वस्थ अंडाणु बन जाते हैं, जिससे बांझपन की दिक्कत बन जाती है।

इन बातों का रखें ध्यान
- तला हुआ, डिब्बा बंद और फास्ट फूड भोजन न करें।
- साइकिल चलाएं, शारीरिक परिश्रम वाली गतिविधियां बढ़ाएं।
- बच्चों के टिफिन में फल, पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें।
- बच्चों को नियमित पैदल चलने की आदत डालें। वजन घटाएं।
- बच्चों के टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल देखने पर नियंत्रण करें।

100 डॉ प्रभात अग्रवाल

100 डॉ प्रभात अग्रवाल

100 डॉ प्रभात अग्रवाल

100 डॉ प्रभात अग्रवाल

100 डॉ प्रभात अग्रवाल

100 डॉ प्रभात अग्रवाल

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